इंदौर की जल व्यवस्था पर सवाल: ₹40 करोड़ की पाइपलाइन की टेस्टिंग में सड़क फटी, इधर जलाशयों में भी कम पानी
एक तरफ कम बारिश के कारण इंदौर के जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया है, दूसरी ओर गोराकुंड में 24 घंटे जलापूर्ति परियोजना की पाइपलाइन की हाई-प्रेशर टेस्टिंग के दौरान सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से बुनियादी ढांचे को लेकर सवाल उठे हैं।

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इंदौर की जल व्यवस्था के सामने दो अलग चुनौतियां
इंदौर में पानी को लेकर दो अलग-अलग मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं। पहला प्राकृतिक है, शहर में सामान्य से कम बारिश। दूसरा बुनियादी ढांचे से जुड़ा है, जहां गोराकुंड रोड पर नई जलापूर्ति पाइपलाइन की हाई-प्रेशर टेस्टिंग के दौरान सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
यह घटना 18 अगस्त को सामने आई थी। पानी के तेज दबाव से सड़क की ऊपरी सतह उखड़ गई और पेवर ब्लॉक हट गए। राहत की बात यह रही कि किसी राहगीर के घायल होने की सूचना नहीं मिली।
₹40 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
जिस पाइपलाइन की टेस्टिंग की जा रही थी, वह 24 घंटे जलापूर्ति से जुड़ी करीब ₹40 करोड़ की Smart City परियोजना का हिस्सा है।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। हालांकि इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड ने स्पष्ट किया कि इसे पूरी परियोजना की संरचनात्मक विफलता के रूप में देखना सही नहीं है।
Smart City ने क्या सफाई दी?
ISCDL के अनुसार गोराकुंड चौराहे के पास करीब 150 मीटर हिस्से को जानबूझकर स्थायी सीमेंट-कंक्रीट सड़क के रूप में पूरा नहीं किया गया था।
रामद्वारा और माताजी मंदिर के पास अतिक्रमण के कारण पाइपलाइन जोड़ने का कुछ काम बाकी था। इसी वजह से संबंधित हिस्से पर अस्थायी बिटुमिन/WBM सतह बनाई गई थी।
ISCDL के मुताबिक अधूरे हिस्से के लिए न तो completion certificate जारी हुआ है और न contractor का final payment किया गया है। हाई-प्रेशर टेस्टिंग के दौरान अचानक निकले पानी से अस्थायी ऊपरी सतह बह गई थी।
दूसरी तरफ जलाशयों में कम पानी
इसी बीच इंदौर में कम बारिश का असर जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है।
यशवंत सागर का जलस्तर करीब 12.8 फीट है, जबकि बिलावली 9.6 फीट, बड़ा सिरपुर 10.9 फीट और पिपलियापाला 5.5 फीट पर है। छोटा बिलावली सूखा बताया गया है।
यानी शहर के सामने फिलहाल दो अलग चुनौतियां हैं। पर्याप्त प्राकृतिक जल संचय और उस पानी को शहर तक पहुंचाने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा।
आने वाले समय में क्या होगा?
Smart City के मुताबिक सुभाष टैंक पर प्रमुख इंटरकनेक्टिविटी का काम पूरा हो चुका है। गोराकुंड क्षेत्र का बचा हुआ काम पूरा करने के लिए यातायात में अस्थायी बदलाव की जरूरत पड़ेगी।
पाइपलाइन की अंतिम टेस्टिंग और कमीशनिंग पूरी होने के बाद संबंधित सड़क को स्थायी रूप से कंक्रीट से बहाल करने की बात कही गई है।
दूसरी ओर शहर के जलाशयों की स्थिति काफी हद तक मानसून के बाकी दिनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।

