
इंदौर में इंटरनेशनल स्विमिंग कोच के दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप, IDA के स्विमिंग पूल टेंडर पर उठे सवाल
दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा ने आरोप लगाया है कि तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर के लिए दिए गए उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल बिना अनुमति इंदौर IDA के स्विमिंग पूल संचालन का टेंडर हासिल करने में किया गया। शिकायत के बाद मामला क्राइम ब्रांच की जांच में है। वहीं देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट ने आरोपों को निराधार बताया है।

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इंदौर। इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी IDA के स्विमिंग पूल संचालन से जुड़े टेंडर में दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा का आरोप है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना इंदौर के टेंडर में किया गया। शर्मा का कहना है कि उन्होंने ये दस्तावेज सिर्फ दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल टेंडर के लिए दिए थे।
करीब तीन साल बाद जब उन्हें अपने दस्तावेजों के इंदौर के टेंडर में इस्तेमाल होने की जानकारी मिली तो उन्होंने IDA और पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। अब मामला क्राइम ब्रांच तक पहुंच गया है और पुलिस इस पूरे मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
तालकटोरा के टेंडर से शुरू हुई दस्तावेजों की कहानी
मुकुंद मोहन शर्मा के मुताबिक, वर्ष 2022 में वे अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने संस्थान के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को अपने शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेज दिए।
शर्मा का कहना है कि दस्तावेज देने का उद्देश्य स्पष्ट था। इन्हें नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल के टेंडर में इस्तेमाल किया जाना था। बाद में वह टेंडर निरस्त हो गया। शर्मा के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने अपने दस्तावेज किसी दूसरे सरकारी, अर्द्धसरकारी या निजी टेंडर में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी।
यहीं से अब विवाद खड़ा हुआ है। शर्मा का आरोप है कि तालकटोरा के लिए दिए गए दस्तावेज बाद में इंदौर के IDA टेंडर में इस्तेमाल किए गए।
शर्मा का आरोप- मेरी अनुमति के बिना IDA का टेंडर हासिल किया
शर्मा के मुताबिक, उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी के स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल करने की प्रक्रिया में किया गया। उनका दावा है कि 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया था।
शर्मा का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई और न ही उनकी लिखित सहमति ली गई। उन्होंने टेंडर में लगाए गए कुछ अन्य दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन छात्रों से जुड़े दस्तावेज टेंडर में लगाए गए, उनमें से कुछ कभी देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े ही नहीं थे।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल IDA और क्राइम ब्रांच दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहे हैं।
तीन साल बाद ऐसे सामने आया मामला
शर्मा के अनुसार, जनवरी 2026 में एक परिचित के जरिए उन्हें जानकारी मिली कि उनके दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर में इस्तेमाल हुए हैं। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने IDA के CEO को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी।
इसके बाद 25 फरवरी 2026 को उन्होंने IDA को औपचारिक ई-मेल किया और दस्तावेजों के कथित गलत इस्तेमाल की जानकारी दी। 7 मार्च को उन्होंने रिमाइंडर भी भेजा। शर्मा का कहना है कि कई महीने बीतने के बाद भी उन्हें जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया और मामला पुलिस तक पहुंचा।
दूसरे शहरों के टेंडर भी जांच के घेरे में लाने की मांग
मुकुंद मोहन शर्मा ने केवल इंदौर के टेंडर तक जांच सीमित रखने की मांग नहीं की है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल दूसरे शहरों में भी स्विमिंग पूल से जुड़े टेंडर, लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए किया गया हो सकता है।
उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल से जुड़े टेंडर में भी अपने दस्तावेजों के संभावित इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि शर्मा के दस्तावेज वास्तव में किन-किन टेंडर में लगाए गए और उन्हें किसने उपलब्ध कराया।
देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट ने आरोपों को बताया गलत
मामले में देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने मुकुंद मोहन शर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। लांबा का कहना है कि वे इस मामले में क्राइम ब्रांच को अपना जवाब दे चुके हैं और जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज व अंडरटेकिंग भी उपलब्ध करा देंगे।
लांबा के मुताबिक, मुकुंद मोहन शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े थे। इसलिए उनकी शैक्षणिक योग्यता, उपलब्धियों और पेशेवर अनुभव से संबंधित दस्तावेज संस्थान के रिकॉर्ड में मौजूद थे। उनका कहना है कि किसी कोच या कर्मचारी के संस्थान से जुड़ने पर उसके योग्यता संबंधी दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का मुख्यालय गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके सेंटर हैं। उनके मुताबिक टेंडर से जुड़ी प्रक्रिया स्थानीय सेंटर के स्तर पर नहीं, बल्कि हेड ऑफिस के जरिए की जाती है।
IDA बोला- शिकायत मिली, जांच जारी
इस मामले में IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाडे ने बताया कि मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। विभाग की ओर से मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि तालकटोरा के एक पुराने टेंडर के लिए दिए गए दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर तक कैसे पहुंचे। क्या दस्तावेजों का इस्तेमाल वास्तव में बिना अनुमति किया गया और टेंडर प्रक्रिया में उनका क्या महत्व था—इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

