इंदौर की सड़क में अचानक खुला 20 फीट का गड्ढा! 9 दिन में दूसरी बार धंसी जमीन
इंदौर के गाड़ी अड्डा स्थित वाल्मीकि बस्ती में बुधवार को सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया और करीब 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया। रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही वाले इस रास्ते पर हादसा टल गया। निगम को सड़क के नीचे गुजर रही ड्रेनेज लाइन से मिट्टी खिसकने की आशंका है।

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इंदौर की एक व्यस्त सड़क पर बुधवार को अचानक ऐसा गड्ढा खुल गया, जिसे देखकर आसपास के लोग भी हैरान रह गए। सड़क के बीचों-बीच करीब 20 फीट गहराई तक जमीन धंस गई। सबसे राहत की बात यही रही कि जिस वक्त सड़क नीचे बैठी, वहां कोई वाहन या राहगीर इसकी चपेट में नहीं आया।
मामला गाड़ी अड्डा क्षेत्र की वाल्मीकि बस्ती का है। यह कोई सुनसान रास्ता नहीं है। यहां से हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का अचानक इस तरह धंसना सिर्फ एक गड्ढे की घटना नहीं, बल्कि सड़क के नीचे चल रही व्यवस्था को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
और चिंता की बात यह है कि इंदौर में नौ दिन के भीतर सड़क धंसने की यह दूसरी घटना है।
ऊपर सड़क, नीचे क्या? 20 फीट गड्ढे ने खोली परत
सड़क का एक हिस्सा धंसने के बाद जब गड्ढे की गहराई सामने आई तो मौके पर मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई। नगर निगम ने तत्काल आसपास बैरिकेडिंग कर दी, ताकि कोई वाहन या व्यक्ति गलती से गड्ढे तक न पहुंच जाए।
अब निगम की टीमें यह समझने में जुटी हैं कि सड़क के नीचे आखिर ऐसा क्या हुआ कि जमीन ने अचानक भार उठाना बंद कर दिया।
ड्रेनेज लाइन के ऊपर ही धंसी सड़क
जांच में सबसे पहले नजर उस ड्रेनेज लाइन पर गई, जो सड़क के नीचे से गुजर रही है। इसी के पास ड्रेनेज का चैंबर भी मौजूद है।
निगम अधिकारियों को आशंका है कि लाइन या चैंबर में किसी तरह की खराबी के कारण आसपास की मिट्टी खिसकी हो सकती है। हालांकि अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना गया है।
ड्रेनेज और जनकार्य विभाग की टीमें मौके पर स्थिति की जांच कर रही हैं। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि सड़क के नीचे पानी का रिसाव हुआ, मिट्टी बैठी या कोई दूसरी तकनीकी समस्या इसकी वजह बनी।
रोज 10 हजार से ज्यादा वाहन... इसलिए डर बड़ा
इस सड़क की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से रोजाना 10 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं।
ऐसे रास्ते पर 20 फीट गहरा गड्ढा बनना अपने आप में बड़ा खतरा है। फिलहाल बैरिकेडिंग के कारण हादसा टल गया है, लेकिन स्थानीय लोगों की चिंता सड़क की स्थायी मरम्मत को लेकर है।
सवाल यह भी है कि सिर्फ ऊपर से गड्ढा भर देने से समस्या खत्म होगी या पहले यह पता लगाया जाएगा कि जमीन के अंदर कमजोरी कहां से आई?
नौ दिन पहले भी इंदौर में धंस चुकी है सड़क
इस घटना को अकेले नहीं देखा जा रहा है। इससे पहले गोराकुंड इलाके में भी सड़क धंसने की घटना सामने आई थी।
करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से कुछ साल पहले तैयार की गई सड़क नई पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान धंस गई थी। अब वाल्मीकि बस्ती में दूसरी घटना सामने आने के बाद सड़क निर्माण और भूमिगत पाइपलाइन-ड्रेनेज व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
खास बात यह भी है कि इस बार बारिश बहुत ज्यादा नहीं हुई है। ऐसे में सामान्य बारिश के बीच सड़क के नीचे की जमीन कमजोर पड़ने का कारण जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
कांग्रेस ने गड्ढे को ही बना दिया ‘विकास का स्मारक’
सड़क धंसने के बाद कांग्रेस ने निगम पर हमला बोलने का अलग तरीका चुना।
कांग्रेस नेता पिंटू जोशी के नेतृत्व में महिलाओं ने गड्ढे का सांकेतिक लोकार्पण किया। मौके पर फीता काटा गया और महापौर का फोटो रखकर उस पर माला चढ़ाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने तंज कसते हुए ‘महापौर जी का विकास है... विकास है...’ जैसे नारे लगाए।
यानी जिस गड्ढे को निगम के लिए तकनीकी समस्या माना जा रहा है, विपक्ष ने उसी को शहर के विकास मॉडल पर सवाल उठाने का प्रतीक बना दिया।
निगम की जांच बताएगी गड्ढे का असली कारण
नगर निगम के जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर के मुताबिक, सड़क धंसने की वजह पता लगाने के लिए जांच कराई जा रही है। शुरुआती तौर पर ड्रेनेज लाइन से जुड़ी समस्या की आशंका है।
उन्होंने कहा कि जांच में अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब असली सवाल यही है कि 20 फीट नीचे धंसी सड़क को सिर्फ भर दिया जाएगा या उस वजह तक पहुंचा जाएगा, जिसने सड़क के नीचे की जमीन को खोखला कर दिया?
क्योंकि इंदौर जैसे व्यस्त शहर में सड़क का गड्ढा सिर्फ गड्ढा नहीं होता—कभी-कभी वह उस पूरी व्यवस्था की पोल खोल देता है, जो सड़क के नीचे दिखाई ही नहीं देती।
