
दुबई में छिपा ‘ड्रग किंगपिन’ आखिर भारत कैसे आया? 970 किलो मेफेड्रोन केस में वीरेंद्र बसोया NCB के शिकंजे में
NCB ने UAE से फरार आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया की भारत वापसी सुनिश्चित की है। वह पुणे से जुड़े बड़े मेफेड्रोन नेटवर्क में वांछित था, जहां जांच के दौरान करीब 970 किलो ड्रग्स की खेप का लिंक सामने आया था। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी सफलता बताया है।

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नई दिल्ली। जिस आरोपी तक पहुंचने के लिए भारतीय एजेंसियों को देश की सीमा से बाहर तक जाना पड़ा, वह अब NCB की हिरासत में है। वीरेंद्र सिंह बसोया, जिसे जांच एजेंसियां एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का अहम चेहरा मानती हैं, UAE से भारत लाया गया है। उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ था और जून 2026 में UAE में गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियां उसकी वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। अब उसे भारत लाए जाने के साथ उस नेटवर्क की कई नई परतें खुलने की उम्मीद है, जिसकी जड़ें पुणे से दिल्ली और फिर विदेश तक बताई जा रही हैं।
500 ग्राम से शुरू हुई जांच, फिर सामने आया सैकड़ों किलो का नेटवर्क
इस केस की शुरुआत फरवरी 2024 में पुणे पुलिस की एक अपेक्षाकृत छोटी बरामदगी से हुई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो मामला कई सौ किलो मेफेड्रोन तक पहुंच गया। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक कार्रवाई के दौरान लगभग 867 किलो मेफेड्रोन जब्त किया गया, जबकि जांच में करीब 970 किलो की एक बड़ी खेप विदेश भेजे जाने की साजिश का भी खुलासा हुआ। एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे ऑपरेशन में बसोया की भूमिका नेटवर्क को जोड़ने और माल की आवाजाही नियंत्रित करने की थी।
लंदन तक भेजी जानी थी खेप
जांच में दावा किया गया कि भारी मात्रा में मेफेड्रोन को सामान्य कमर्शियल कंसाइनमेंट की तरह दिखाकर विदेश भेजने की तैयारी थी। इसके लिए लॉजिस्टिक्स चैनल का इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि माल सामान्य सप्लाई चेन में छिपा रहे और एजेंसियों की नजर से बच सके। इसी कड़ी में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई और जांचकर्ताओं ने धीरे-धीरे ऑपरेशन की कमान बसोया तक पहुंचने का दावा किया।
दुबई में बैठा आरोपी भारत के रडार पर कैसे आया
जांच एजेंसियों के मुताबिक पुणे केस में पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारी, कॉल रिकॉर्ड और नेटवर्क की परतें जोड़ते-जोड़ते वीरेंद्र बसोया का नाम प्रमुखता से सामने आया। उसके बाद उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी कराया गया। जून 2026 में UAE में उसे हिरासत में लिए जाने के बाद भारत और UAE के बीच समन्वय से उसकी वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी और शुक्रवार को उसे भारत लाया गया।
अमित शाह ने क्यों बताया बड़ी कामयाबी
गृह मंत्री अमित शाह ने बसोया की भारत वापसी को सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनका कहना था कि विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों को ट्रैक कर उनके पूरे नेटवर्क पर प्रहार किया जा रहा है और कोई भी आरोपी कानून की पहुंच से बाहर नहीं रहेगा। केंद्र के मुताबिक 2019 से 2026 के बीच अलग-अलग देशों से बड़ी संख्या में वांछित आरोपियों को भारत वापस लाया गया है।
₹6,000 करोड़ या ₹13,000 करोड़—दो अलग मामलों का फर्क समझना जरूरी
बसोया का नाम सिर्फ पुणे वाले मेफेड्रोन केस तक सीमित नहीं बताया गया है। कुछ रिपोर्टों में उसे दिल्ली पुलिस की उस अलग जांच से भी जोड़ा गया है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के ड्रग्स नेटवर्क की पड़ताल चल रही है। इसी वजह से अलग-अलग रिपोर्टों में ₹6,000 करोड़ और ₹13,000 करोड़ जैसे आंकड़े सामने आ रहे हैं। इसलिए इन दोनों रकमों को एक ही केस का आंकड़ा मानना ठीक नहीं होगा।
बेटा ऋषभ भी जांच के घेरे में
जांच में वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया है और उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी, पैसा किस रास्ते घूमता था और ड्रग्स की खेप किन देशों तक पहुंचाई जानी थी।
अब असली पूछताछ भारत में होगी
बसोया की वापसी सिर्फ गिरफ्तारी का अंत नहीं, बल्कि जांच के नए चरण की शुरुआत है। NCB अब उससे सप्लाई चेन, विदेश संपर्क, पैसों के लेन-देन, लॉजिस्टिक्स कंपनियों की भूमिका और संभावित दूसरे संचालकों के बारे में पूछताछ कर सकती है। अगर एजेंसियों के दावे दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों से जुड़ते हैं, तो यह केस सिर्फ एक बड़े ड्रग कंसाइनमेंट की बरामदगी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की संरचना खोल सकता है।



