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विजय शाह पर कांग्रेस का वार, राज्यपाल से मिले विधायक; बोले- अभियोजन की मंजूरी दें, गवर्नर ने पुनर्विचार का दिया भरोसा
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी को लेकर मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के कैबिनेट प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की। सिंघार के मुताबिक,लोकस्वामी ग्राफिक्स
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विजय शाह पर कांग्रेस का वार, राज्यपाल से मिले विधायक; बोले- अभियोजन की मंजूरी दें, गवर्नर ने पुनर्विचार का दिया भरोसा

Reema Yadav4 min read01/09/26

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी को लेकर मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के कैबिनेट प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की। सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने मामले पर दोबारा विचार करने और सरकार से चर्चा का भरोसा दिया है।

Lokswami AI

मंत्री विजय शाह के खिलाफ चल रहे विवाद ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्मी बढ़ा दी है। कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस अब सीधे राजभवन पहुंच गई है। कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर कैबिनेट के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा गया है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मंगलवार को विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे के साथ राज्यपाल से मिले। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए।

कांग्रेस ने राज्यपाल से क्यों की मुलाकात?

कांग्रेस का कहना है कि विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के बजाय सरकार ने अभियोजन की मंजूरी से जुड़ा फैसला राज्यपाल के पास भेजकर जिम्मेदारी दूसरे स्तर पर डाल दी है।

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उनका सवाल था कि अगर कैबिनेट के पास अभियोजन की मंजूरी देने और मंत्री को पद से हटाने का अधिकार है, तो सरकार ने खुद इस दिशा में फैसला क्यों नहीं लिया।

सिंघार ने कहा कि मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि एक महिला सैन्य अधिकारी के सम्मान से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे मामले में सरकार की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है।

उमंग सिंघार बोले- गलती सरकार की तो राज्यपाल को बीच में क्यों लाया?

राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर गलती सरकार की है तो फिर राज्यपाल को इस मामले में बीच में लाने की जरूरत क्यों पड़ी।

उन्होंने भाजपा सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला अधिकारी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में सरकार का रुख स्पष्ट होना चाहिए।

सिंघार ने यह भी सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामला आगे बढ़ा है, तो सरकार अदालत के आदेश को लेकर इतनी देरी क्यों कर रही है।

राज्यपाल ने क्या भरोसा दिया?

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मामले पर पुनर्विचार करने का भरोसा दिया है। सिंघार ने बताया कि राज्यपाल ने सरकार से इस विषय पर चर्चा करने की बात भी कही है।

कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल कैबिनेट के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करेंगे और विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने के संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।

अब निगाहें राजभवन के अगले कदम पर हैं, क्योंकि राज्यपाल के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन की अनुमति को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी कांग्रेस ने उठाया मुद्दा

उमंग सिंघार ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर कोई सरकार अदालत के आदेश की भी परवाह नहीं करती तो सवाल उठता है कि क्या सरकार खुद को सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर समझ रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मामले को लेकर पार्टी अपनी आवाज आगे भी उठाती रहेगी और इसे जनता के सामने ले जाएगी।

केके मिश्रा ने राज्यपाल की भूमिका पर उठाए सवाल

विजय शाह मामले में प्रदेश कांग्रेस के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि मामला एक संज्ञेय अपराध और गैर-जमानती धाराओं में दर्ज FIR से जुड़ा है। ऐसे में अभियोजन की मंजूरी से जुड़े सरकार के फैसले में राज्यपाल की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मिश्रा के मुताबिक, यह मामला भारतीय सेना के सम्मान, देश की संप्रभुता और संविधान की मर्यादा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के स्वतः संज्ञान के बाद FIR दर्ज हुई है, इसलिए संवैधानिक संस्थाओं से अपेक्षा है कि वे इस मामले में निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखें।

कांग्रेस ने व्यापमं मामले का भी दिया उदाहरण

केके मिश्रा ने अपने तर्क के समर्थन में व्यापमं मामले का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ हाईकोर्ट के निर्देश पर एसटीएफ ने FIR दर्ज की थी।

उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि लोकभवन की संवैधानिक प्रतिष्ठा और निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए।

अब राजभवन के फैसले पर टिकी नजर

विजय शाह के बयान से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक लड़ाई से आगे बढ़कर अभियोजन की अनुमति के सवाल पर पहुंच चुका है। एक तरफ सरकार का कैबिनेट प्रस्ताव है, तो दूसरी ओर कांग्रेस राज्यपाल से इस पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

राज्यपाल ने पुनर्विचार और सरकार से चर्चा का भरोसा दिया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजभवन इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है और विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

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