
152 हेक्टेयर की खदान पर वेदांता की जीत, आखिर ‘पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक’ में ऐसा क्या है जिस पर कंपनी ने लगाया दांव?
वेदांता लिमिटेड आंध्र प्रदेश के 152 हेक्टेयर में फैले पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक की ई-नीलामी में सफल बोलीदाता बनी है। ब्लॉक अभी शुरुआती G4 एक्सप्लोरेशन स्टेज पर है। कंपनी इसे अपने माइनिंग पोर्टफोलियो के विस्तार के साथ भारत की मैंगनीज जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रही है।

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नई दिल्ली। वेदांता की खनन संपत्तियों की सूची में अब एक और महत्वपूर्ण नाम जुड़ने जा रहा है। कंपनी ने आंध्र प्रदेश के पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक की बोली जीत ली है। पहली नजर में यह किसी खदान की सामान्य नीलामी लग सकती है, लेकिन 152 हेक्टेयर में फैले इस ब्लॉक पर वेदांता का दांव इसलिए दिलचस्प है क्योंकि मैंगनीज स्टील उद्योग के लिए अहम कच्चा माल है और भारत अपनी जरूरत का एक हिस्सा आयात से पूरा करता है।
ई-नीलामी में वेदांता ने मारी बाजी
वेदांता ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार के खान एवं भूविज्ञान विभाग की ई-नीलामी प्रक्रिया में उसे पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है। कंपनी के मुताबिक जरूरी वैधानिक प्रक्रियाओं और अनुपालनों के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।
152 हेक्टेयर का ब्लॉक, लेकिन अभी बाकी है असली तस्वीर
पुन्नम मैंगनीज ब्लॉक करीब 152 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और फिलहाल G4 एक्सप्लोरेशन स्टेज में है। इसका मतलब यह है कि ब्लॉक में खनिज मौजूदगी की प्रारंभिक पहचान हुई है, लेकिन विस्तृत खोज और आकलन के बाद ही रिजर्व की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक क्षमता की ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
यही कारण है कि अभी इसे सीधे विशाल उत्पादन वाली तैयार खदान मानना जल्दबाजी होगी। आगे की एक्सप्लोरेशन प्रक्रिया इस ब्लॉक की वास्तविक आर्थिक अहमियत तय करेगी।
मैंगनीज इतना जरूरी क्यों है?
मैंगनीज का सबसे बड़ा इस्तेमाल स्टील निर्माण में होता है। यह स्टील की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा कुछ प्रकार की बैटरी और दूसरे औद्योगिक उत्पादों में भी इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में देश में स्टील उत्पादन और नई औद्योगिक क्षमता बढ़ने के साथ इसकी मांग भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
वेदांता के लिए सिर्फ एक और खदान नहीं
वेदांता पहले से जिंक, एल्युमीनियम, आयरन ओर, तेल-गैस और दूसरी प्राकृतिक संसाधन गतिविधियों में मौजूद है। पुन्नम ब्लॉक कंपनी को मैंगनीज क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर दे सकता है। अगर आगे की खोज में पर्याप्त और आर्थिक रूप से निकालने योग्य भंडार मिलता है, तो यह वेदांता के माइनिंग पोर्टफोलियो के लिए रणनीतिक संपत्ति बन सकता है।
भारत के लिए कहां बनता है इसका बड़ा मतलब?
इस सौदे का दूसरा पहलू देश की खनिज सुरक्षा से जुड़ा है। भारत में मैंगनीज का उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात की भी जरूरत पड़ती है। इसलिए नए घरेलू भंडार का विकास लंबी अवधि में आयात निर्भरता कम करने की दिशा में मददगार हो सकता है।
हालांकि एक ब्लॉक मिलने भर से आयात निर्भरता तुरंत खत्म नहीं होगी। पुन्नम ब्लॉक का वास्तविक योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि विस्तृत एक्सप्लोरेशन में कितना रिजर्व मिलता है, उसकी ग्रेड क्या है और व्यावसायिक उत्पादन कब शुरू हो पाता है।
अब नजर अगले चरण पर
नीलामी जीतना वेदांता के लिए पहला बड़ा पड़ाव है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। विस्तृत सर्वे, खनिज भंडार का आकलन, जरूरी मंजूरियां और उसके बाद खनन की व्यावसायिक व्यवहार्यता तय करेगी कि 152 हेक्टेयर का यह दांव भविष्य में वेदांता के लिए कितना बड़ा साबित होता है।




