
रसोई ने फिर बिगाड़ा बजट! जुलाई में महंगाई 4.45%, अदरक 83% और लहसुन 35% महंगा; आगे और बढ़ सकती है कीमत
जुलाई में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% पहुंच गई। सबसे ज्यादा दबाव खाने-पीने की चीजों से आया, जहां अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों ने आम घर का बजट बिगाड़ दिया।

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नई दिल्ली। महीने की शुरुआत में जो सब्जी की थैली कुछ कम रुपयों में भर जाती थी, वही अब जेब पर ज्यादा भारी पड़ रही है। जुलाई के महंगाई आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आम आदमी को सबसे ज्यादा चोट रसोई से लग रही है। देश की खुदरा महंगाई दर जून के 4.38% से बढ़कर जुलाई में 4.45% हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई RBI के 4% के मध्यावधि लक्ष्य से ऊपर रही, हालांकि अब भी 2% से 6% के तय सहनशील दायरे के भीतर है।
असली दबाव जेब पर नहीं, थाली से शुरू हुआ
जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52% तक पहुंच गई, जबकि जून में यह 5.32% थी। यानी रोजमर्रा के खाने की कीमतें सामान्य महंगाई से तेज रफ्तार से बढ़ीं। ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा दिखा, जहां परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है।
अदरक ने सबसे ज्यादा चौंकाया
सब्जियों और मसालों में कीमतों की चाल एक जैसी नहीं रही। कुछ चीजों ने अचानक जोरदार उछाल लिया। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्याज की सालाना महंगाई जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54%, लहसुन की 17.93% से बढ़कर 35.36% और अदरक की महंगाई 50.41% से उछलकर 83.62% पहुंच गई।
आम भाषा में इसका मतलब यह नहीं है कि हर बाजार में अदरक का भाव ठीक 83.62% बढ़ गया, बल्कि CPI में दर्ज औसत कीमत पिछले साल के इसी महीने की तुलना में इतनी अधिक रही।
हर सब्जी महंगी नहीं हुई, कुछ ने राहत भी दी
महंगाई की इस तस्वीर में राहत वाला हिस्सा भी है। आलू के दाम पिछले साल की तुलना में करीब 16.56% नीचे रहे। भिंडी, मटर और टमाटर में भी सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। यानी पूरी सब्जी मंडी एक दिशा में नहीं चल रही; कुछ उत्पादों की सप्लाई बेहतर है तो कुछ में उपलब्धता और मौसम का दबाव कीमत बढ़ा रहा है।
महंगाई सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं
परिवार का खर्च केवल सब्जी और राशन पर नहीं रुकता। जुलाई में परिवहन से जुड़ी महंगाई भी बढ़ी, जबकि होटल और रेस्तरां सेवाओं में कीमतों का दबाव ऊंचा रहा। व्यक्तिगत देखभाल और दूसरी सेवाओं की कीमतें भी तेज बनी हुई हैं। इसलिए CPI का 4.45% आंकड़ा एक औसत है, लेकिन हर परिवार पर इसका असर उसके खर्च के तरीके के अनुसार अलग हो सकता है।
4.45% का मतलब आपकी जेब के लिए क्या है?
अगर महंगाई 4.45% है तो इसका सीधा मतलब यह नहीं कि आपकी हर खरीद 4.45% महंगी हो गई। CPI सैकड़ों वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों से तैयार औसत सूचकांक है। इसलिए किसी परिवार के लिए असली महंगाई इससे ज्यादा भी महसूस हो सकती है, खासकर तब जब उसकी खरीदारी में प्याज, लहसुन, अदरक और दूसरी महंगी खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी ज्यादा हो।
RBI अभी क्यों नहीं घबरा रहा?
महंगाई 4% के लक्ष्य से ऊपर जरूर है, लेकिन RBI के 2% से 6% के सहनशील दायरे के भीतर बनी हुई है। Reuters के मुताबिक जुलाई के आंकड़े के बाद भी तत्काल ब्याज दर बदलने की संभावना कम मानी जा रही है। RBI पहले ही संकेत दे चुका है कि वह कीमतों की अगली चाल, मानसून, ईंधन और वैश्विक कमोडिटी बाजार को देखकर आगे का फैसला करेगा।
आगे महंगाई और ऊपर जा सकती है
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने औसत महंगाई अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% किया है। दूसरी तिमाही के लिए 4.7%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% का अनुमान है। यानी केंद्रीय बैंक खुद मान रहा है कि आने वाले महीनों में महंगाई मौजूदा 4.45% से ऊपर जा सकती है।
तो क्या प्याज-अदरक और महंगे होंगे?
इसका सीधा जवाब अभी देना संभव नहीं है। जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि इनकी कीमतें पिछले साल से काफी ऊपर हैं, लेकिन आगे भाव मानसून, फसल की आवक, भंडारण और सप्लाई पर निर्भर करेंगे। Reuters के अनुसार कमजोर बारिश ने जुलाई में खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ाया, जबकि बाद में बारिश सुधरने से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
असली चिंता 4.45% नहीं, घर की अपनी महंगाई है
सरकारी आंकड़ा पूरे देश का औसत बताता है, लेकिन घर का बजट औसत से नहीं चलता। जिस परिवार की रसोई में रोज प्याज, लहसुन और अदरक इस्तेमाल होता है, उसके लिए महंगाई का अनुभव कहीं ज्यादा तीखा हो सकता है। आने वाले महीनों में नजर सिर्फ CPI के अगले नंबर पर नहीं, बल्कि मंडी में इन तीन चीजों के भाव पर भी रहेगी।




