LIVE
ताज़ा समाचार लोड हो रहे हैं...
होम
दिल्ली में 48 दिन, नाबालिगों से रेप की 3 घटनाएं; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अपराधियों में मौत का डर जरूरी
दिल्ली-NCR में नाबालिगों से जुड़ी तीन घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया।लोकस्वामी ग्राफिक्स
National
ई-पेपर

दिल्ली में 48 दिन, नाबालिगों से रेप की 3 घटनाएं; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अपराधियों में मौत का डर जरूरी

Digital News Desk5 min read05/10/26

दिल्ली-NCR में 48 दिनों के भीतर नाबालिगों से जुड़ी तीन गंभीर घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ कागजों तक सीमित रखने के बजाय संवेदनशील इलाकों की पहचान, पेट्रोलिंग, रोशनी, निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

Lokswami AI

दिल्ली-NCR में कुछ ही हफ्तों के भीतर नाबालिगों से जुड़ी तीन गंभीर यौन अपराध की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक घटना चलती बस में हुई, दूसरी में नाबालिग की हत्या कर दी गई और तीसरी घटना में आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर वारदात को अंजाम दिया। इन घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने पुलिस की जिम्मेदारी को लेकर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि केवल योजनाएं और निर्देश कागज पर लिख देने से अपराध नहीं रुकेंगे। जरूरत पड़ने पर पुलिस को सख्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए।

कोर्ट ने सुरक्षा को चार हिस्सों में बांटकर देखा

सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला सिर्फ तीन घटनाओं तक सीमित नहीं रहा। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए उन परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया, जहां अपराध का खतरा बढ़ सकता है।

कोर्ट के निर्देशों में संवेदनशील इलाकों की पहचान, पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाना, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और इल्यूमिनेशन सुनिश्चित करना तथा अपराध रोकने में जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करना शामिल है। यानी अदालत का फोकस वारदात होने के बाद कार्रवाई से ज्यादा उन जगहों और परिस्थितियों को सुरक्षित बनाने पर है, जहां पहले से खतरा मौजूद है।

हर जिले में पहले पता चलेगा- खतरा कहां है

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक दिल्ली पुलिस को हर जिले में ऐसे स्थानों की पहचान करनी होगी जहां अपराध का खतरा ज्यादा है। इसमें सुनसान रास्ते, पार्क, बाजार, परिवहन केंद्र और स्कूल-कॉलेज के आसपास के इलाके शामिल किए जा सकते हैं।

इसके लिए पुलिस को पुराने अपराध, शिकायतों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल कर संवेदनशील इलाकों का मैप तैयार करना होगा। यह जानकारी आसपास के पुलिस स्टेशनों के साथ साझा करने की व्यवस्था भी की जानी है, ताकि किसी इलाके में अपराध के पैटर्न और सक्रिय अपराधियों पर नजर रखी जा सके।

सिर्फ पेट्रोलिंग नहीं, निगरानी का सिस्टम भी मजबूत होगा

संवेदनशील इलाकों में खासकर सुबह और शाम के समय पुलिस गश्त बढ़ाने पर जोर दिया गया है। हर ऐसे इलाके की निगरानी के लिए एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने की बात भी सामने आई है।

इसके साथ ही पार्क और दूसरे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर खराब CCTV और स्ट्रीट लाइट की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने तथा जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त कैमरे और रोशनी लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। सार्वजनिक परिवहन केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

अंधेरे रास्ते और खराब CCTV भी जांच के दायरे में

अदालत के निर्देशों में उन शिकायतों को भी गंभीरता से लेने की बात है, जो खराब लाइट, CCTV की कमी, अंधेरे रास्ते या असुरक्षित सार्वजनिक स्थानों से जुड़ी हों।

ऐसी शिकायतों को दर्ज करने के बाद उनका सत्यापन और तय समय में कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। पुलिस और नागरिक प्रशासन को नियमित रूप से शिकायतों की समीक्षा कर बार-बार सामने आने वाली समस्याओं को संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा योजना में शामिल करना होगा।

मोबाइल चेक-पोस्ट से लेकर वाहन जांच तक

सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए सुरक्षा उपायों में मोबाइल चेक-पोस्ट और वाहनों की नियमित जांच भी शामिल है। गश्त के दौरान वाहनों की निगरानी बढ़ाने और खिड़कियों पर प्रतिबंधित ब्लैक फिल्म, टिंटेड या सोलर-कंट्रोल फिल्म के इस्तेमाल पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात कही गई है।

इसका उद्देश्य उन वाहनों की निगरानी बढ़ाना है जिनका इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर अपराध के लिए किया जा सकता है।

4 अगस्त से 21 सितंबर के बीच तीन घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 48 दिनों के दौरान सामने आई तीन घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है।

4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी 16 साल की नाबालिग के साथ चलती बस में गैंगरेप का आरोप सामने आया। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर उतारा। इस दौरान बस करीब 47 किलोमीटर चली। बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने की बात भी सामने आई।

12 सितंबर को स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग के साथ गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया। अगले दिन उसका शव खेत के पास खुले मैदान में मिला। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन नाबालिग बताए गए हैं।

21 सितंबर को कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। आरोप है कि तीन युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसके साथ रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने उठाया था जवाबदेही का सवाल

28 सितंबर की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पर्याप्त पेट्रोलिंग नहीं होने के कारण सार्वजनिक स्थानों को हाई रिस्क जोन नहीं बनने दिया जा सकता।

आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए अदालत ने यह भी कहा था कि LSR कॉलेज की छात्राओं की ओर से पहले यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए।

यहीं से मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रहकर उस व्यवस्था की जवाबदेही तक पहुंचा, जो किसी संवेदनशील जगह को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार है।

‘कागज पर लिखना काफी नहीं’, पुलिस से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस को केवल सुरक्षा संबंधी योजनाएं बनाने से आगे बढ़कर उन्हें जमीन पर लागू करना होगा। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त होने में पुलिस को हिचकना नहीं चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि कुछ लोग अनुच्छेद 21 और मानवाधिकारों का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए अपना कर्तव्य निभाना होगा। इसी संदर्भ में अदालत ने अपराधियों के मन में सजा और मौत का डर होने की जरूरत पर टिप्पणी की।

दिल्ली में बच्चों से जुड़े अपराध के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं

NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यानी औसतन हर दिन चार से ज्यादा मामले। 2025 के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।

अब दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को चार हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट के सामने जवाब देना है। अदालत के निर्देशों का असर सिर्फ इन तीन मामलों की जांच तक नहीं, बल्कि दिल्ली के संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

संबंधित खबरें

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, ‘न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं देंगे’
National

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, ‘न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं देंगे’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने साफ कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

पूरा खबर
Top 5 National News: आंध्र प्रदेश फार्मा फैक्ट्री विस्फोट समेत देश की 5 बड़ी खबरें
National

Top 5 National News: आंध्र प्रदेश फार्मा फैक्ट्री विस्फोट समेत देश की 5 बड़ी खबरें

देश में आज सुबह से कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। आंध्र प्रदेश की फार्मा फैक्ट्री में विस्फोट में कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जबकि होर्मुज में हमले की चपेट में आए टैंकर से पांच भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। केरल, बेंगलुरु और बिहार से भी बड़ी घटनाएं सामने आई हैं।

पूरा खबर
रोहतक में BJP नेत्री के पति की मौत के बाद 10 पर FIR, सुसाइड नोट में 3 लोगों पर गंभीर आरोप
National

रोहतक में BJP नेत्री के पति की मौत के बाद 10 पर FIR, सुसाइड नोट में 3 लोगों पर गंभीर आरोप

रोहतक में भाजपा नेत्री दीपिका नारा के पति और वकील प्रदीप नारा की मौत के बाद पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। परिवार का आरोप है कि कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपए के भुगतान विवाद और मध्य प्रदेश में हुए कथित हमले ने प्रदीप को मानसिक दबाव में डाल दिया था।

पूरा खबर
CISF कर्मियों की होगी साइकोमेट्रिक जांच, संसद और VIP सुरक्षा में तैनात जवान भी दायरे में
National

CISF कर्मियों की होगी साइकोमेट्रिक जांच, संसद और VIP सुरक्षा में तैनात जवान भी दायरे में

CISF संवेदनशील और अधिक तनाव वाली ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए विशेष साइकोमेट्रिक असेसमेंट शुरू कर रहा है। संसद भवन परिसर और हाई-लेवल VIP सुरक्षा में तैनात कमांडो भी इसके दायरे में आएंगे। पहल का उद्देश्य मानसिक तनाव के संकेतों की समय रहते पहचान और सहायता व्यवस्था मजबूत करना है।

पूरा खबर