ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, ‘न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं देंगे’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने साफ कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

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SIR को लेकर चुनाव आयोग के फैसलों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। हालांकि, अदालत ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
मामले की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं से जुड़े तर्क सुने और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अखबार या न्यूज रिपोर्ट को अपने आप अंतिम तथ्य मानकर आदेश नहीं दिया जा सकता।
न्यूज रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई सावधानी?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस न्यूज रिपोर्ट को याचिका का आधार बनाया गया है, वह पूरी तरह सही हो सकती है, आंशिक रूप से सही हो सकती है या गलत भी हो सकती है। इसलिए केवल उस रिपोर्ट के आधार पर अदालत कोई आदेश जारी नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं है कि अगले 10 दिनों में ऐसी स्थिति बन जाएगी जिसे बाद में ठीक न किया जा सके। अगर जांच या सुनवाई के बाद कुछ गलत पाया जाता है तो अदालत उसके खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकती है।
CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों को भी नोटिस जारी किया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले चुनाव आयोग में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप सामूहिक रूप से नहीं लिए गए।
अब चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। इसी जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई की दिशा ज्यादा स्पष्ट होगी।
तीन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले से जुड़ी तीन अलग-अलग याचिकाएं हैं। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की।
याचिकाकर्ता ने फैसलों की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान वकील विकास सिंह ने दलील दी कि संबंधित कानून के मुताबिक चुनाव आयोग में फैसले बहुमत या सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले निर्णय नहीं लिया जा सकता।
याचिका में इसी आधार पर SIR से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस दलील पर चुनाव आयोग का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
अगली सुनवाई अगले हफ्ते
वकील विकास सिंह ने अदालत से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग भी की। हालांकि, इस पर कोर्ट ने कोई आदेश पारित नहीं किया। मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने न तो याचिका में लगाए गए आरोपों को सही माना है और न ही CEC के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। नोटिस जारी होने के बाद अब चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर आगे की सुनवाई होगी।

