
CISF कर्मियों की होगी साइकोमेट्रिक जांच, संसद और VIP सुरक्षा में तैनात जवान भी दायरे में
CISF संवेदनशील और अधिक तनाव वाली ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए विशेष साइकोमेट्रिक असेसमेंट शुरू कर रहा है। संसद भवन परिसर और हाई-लेवल VIP सुरक्षा में तैनात कमांडो भी इसके दायरे में आएंगे। पहल का उद्देश्य मानसिक तनाव के संकेतों की समय रहते पहचान और सहायता व्यवस्था मजबूत करना है।

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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF ने संवेदनशील और अधिक तनाव वाली ड्यूटी करने वाले कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष पहल की है। संसद भवन परिसर की सुरक्षा और हाई-लेवल VIP सिक्योरिटी जैसी जिम्मेदारियों में तैनात कर्मियों का साइकोमेट्रिक असेसमेंट किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य उन कर्मियों की पहचान करना है जो लंबे समय तक अत्यधिक दबाव वाली जिम्मेदारियों के कारण मनोवैज्ञानिक तनाव का सामना कर रहे हों।
IHBAS के साथ CISF का समझौता
यह व्यवस्था CISF और दिल्ली स्थित Institute of Human Behaviour and Allied Sciences यानी IHBAS के बीच हुए समझौते का हिस्सा है। इसके तहत मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विशेषज्ञ सहायता और असेसमेंट व्यवस्था विकसित की जाएगी।
विशेष रूप से उन यूनिटों और जिम्मेदारियों पर ध्यान दिया जाएगा जहां कर्मियों को लंबे समय तक उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखनी पड़ती है। संसद भवन परिसर और VIP सुरक्षा जैसी ड्यूटी में छोटी चूक भी गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने पर जोर
साइकोमेट्रिक असेसमेंट के जरिए कर्मियों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझने और तनाव के संकेत समय रहते पहचानने की कोशिश होगी। इसका उद्देश्य किसी कर्मचारी को दंडित करना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करना है।
CISF अपने इन-हाउस स्टाफ को भी प्रशिक्षण दे रहा है ताकि सहकर्मियों के व्यवहार में बदलाव और तनाव के संभावित संकेत पहचाने जा सकें। इससे समस्या गंभीर होने से पहले संबंधित कर्मी तक मदद पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
हाई-प्रेशर ड्यूटी पर विशेष फोकस
CISF देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और दूसरी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा में तैनात है। इसके अलावा बल के कमांडो हाई-लेवल VIP सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।
नई पहल में ऐसी संवेदनशील जिम्मेदारियों में तैनात कर्मियों पर विशेष ध्यान रहेगा। असेसमेंट से मिले निष्कर्षों के आधार पर जरूरत वाले कर्मचारियों को काउंसलिंग या दूसरी विशेषज्ञ सहायता देने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।


