फिर जहरीली गैस का रिसाव, अस्पताल पहुंचे 8-10 लोग; प्रशासन के दावे और जमीन की हकीकत में फर्क क्यों?
पानी फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने की सूचना के बाद कई ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई। आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी के बाद करीब 8 से 10 लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जबकि एक मरीज की हालत गंभीर बताई गई है

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रात में अचानक लोगों को आंखों में तेज जलन और सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत भी हुई। इसके बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रभावित ग्रामीणों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
मामला पानी फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस के कथित रिसाव से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि टैंक में लीकेज के कारण गैस आसपास के क्षेत्र में फैल गई। इसके बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई।
घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इसी प्लांट से पहले भी गैस रिसाव की बात सामने आ चुकी है।
अचानक बिगड़ी लोगों की तबीयत
काहिरी बांध के पास स्थित पानी फिल्टर प्लांट से रात में गैस निकलने की सूचना के बाद आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।
प्रभावित लोगों ने आंखों में तेज जलन, घुटन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। कुछ लोगों को उल्टी-दस्त की समस्या भी हुई।
प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह समेत कई लोगों को देर रात जिला अस्पताल लाया गया। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
डॉक्टर बोले- 8 से 10 मरीज पहुंचे
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता के मुताबिक, लसूड़िया खास क्षेत्र से करीब 8 से 10 लोग उपचार के लिए पहुंचे थे।
डॉक्टरों की टीम ने मरीजों का प्राथमिक उपचार शुरू किया और उनकी स्थिति पर नजर रखी। जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि पांच मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।
इनमें से एक मरीज की हालत ज्यादा गंभीर बताई गई है।
प्रशासन कह रहा स्थिति नियंत्रण में, ग्रामीणों के दावे अलग
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल गैस रिसाव को लेकर सामने आया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति नियंत्रण में होने तथा लीकेज नहीं होने की बात कही जा रही है।
लेकिन स्थानीय ग्रामीण इससे अलग दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्लांट के आसपास गैस के असर के निशान अब भी दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने पेड़-पौधों के झुलसने की बात भी कही है।
यानी अधिकारियों के दावे और मौके पर मौजूद लोगों की बातों में साफ अंतर नजर आ रहा है। इसी वजह से अब रिसाव की वास्तविक स्थिति और उसके कारण की जांच की मांग उठ रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों का गुस्सा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पानी शुद्ध करने वाले प्लांट में सुरक्षा और रखरखाव को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्लांट की तकनीकी खामियों को दूर किया जाता तो दोबारा ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
तीन सिलेंडर प्लांट से हटाए गए
नगर पालिका सीहोर के सीएमओ सुधीर सिंह ने बताया कि ग्रासिम कंपनी नागदा की तकनीकी टीम ने सावधानी के साथ तीनों सिलेंडर हटाए हैं।
इन सिलेंडरों को ट्रक के जरिए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर ले जाया गया है। प्रशासन की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद अब यह देखना अहम होगा कि गैस रिसाव की वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जाती है।