सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति में फिर नया ट्विस्ट, कोर्ट पहुंचीं प्रतिमा देवी… ‘मुझे वसीयत ही नहीं मिली तो सहमति कैसे मान ली?’
सिंधिया राजघराने की संपत्ति के बंटवारे का विवाद एक बार फिर ग्वालियर कोर्ट पहुंच गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ प्रतिमा देवी ने कहा है कि उन्हें न तो वसीयत की प्रति मिली और न ही मामले की जानकारी सही तरीके से दी गई। उन्होंने संपत्ति में अपने अधिकार का दावा किया है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

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ग्वालियर में सिंधिया राजघराने की बेशकीमती संपत्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अभी खत्म होती नहीं दिख रही। मामला अब एक ऐसे सवाल पर आकर टिक गया है, जो आगे की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है—अगर किसी उत्तराधिकारी को वसीयत और केस की जानकारी ही ठीक से नहीं मिली, तो संपत्ति के बंटवारे पर उसकी सहमति कैसे मानी गई?
इसी सवाल के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ प्रतिमा देवी बुधवार को ग्वालियर जिला न्यायालय पहुंचीं। बेटी शिवांगी और दामाद के साथ कोर्ट पहुंची प्रतिमा देवी ने करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में रहकर अपना पक्ष रखा।
उनकी आपत्ति सीधे संपत्ति के अधिकार और अब तक चली प्रक्रिया से जुड़ी है।
कोर्ट में प्रतिमा देवी ने क्या कहा?
प्रतिमा देवी का कहना है कि उन्हें राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की प्रति तक नहीं दी गई। उनके पास वसीयत को लेकर जो जानकारी आई, वह मुंबई की अदालत में उपलब्ध दस्तावेजों के जरिए मिली।
उनका सवाल है कि जब उन्हें जरूरी दस्तावेज और पूरी जानकारी नहीं दी गई, तो संपत्ति से जुड़े समझौते में उनकी स्थिति को किस आधार पर तय किया गया?
प्रतिमा देवी ने अदालत से संपत्ति में अपने अधिकार को भी मान्यता देने की मांग की है।
एक नोटिस ने भी खड़ा किया बड़ा सवाल
मामले में सिर्फ वसीयत ही मुद्दा नहीं है। प्रतिमा देवी ने नोटिस भेजे जाने के तरीके पर भी सवाल उठाया।
उनके मुताबिक, मामले से जुड़े नोटिस नेपालगंज के एक पते पर भेजे गए थे। उनका कहना है कि वह वहां रहती ही नहीं हैं। प्रतिमा देवी के अनुसार, वह करीब 20 साल से काठमांडू में रह रही हैं और उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास है।
अब उनका तर्क है कि जब नोटिस ही सही पते पर नहीं पहुंचा, तो उन्हें मामले की जानकारी कैसे होती?
‘मुझे एक्स पार्टी कैसे बनाया?’
प्रतिमा देवी ने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े दूसरे पक्षों को भी प्रक्रिया में उचित जानकारी दी जानी चाहिए थी।
यानी अब अदालत के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि संपत्ति किसे मिलेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण हो गया है कि बंटवारे की प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को कानूनी तौर पर पर्याप्त मौका मिला या नहीं।
मां के हिस्से से जोड़कर बताया अपना दावा
प्रतिमा देवी ने अपने अधिकार का आधार अपनी मां पद्मावती राजे के हिस्से को बताया है।
उनके मुताबिक, पद्मावती राजे राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बड़ी पुत्री थीं। इसलिए उनका कहना है कि उनकी मां के उत्तराधिकारियों के अधिकारों को भी संपत्ति के विवाद में ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसी आधार पर प्रतिमा देवी ने संपत्ति में अपना हिस्सा और अधिकार सुरक्षित रखने की मांग की है।
10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
उस दिन प्रतिमा देवी की आपत्तियों के साथ संपत्ति के बंटवारे के लिए तैयार किए गए समझौते की वैधता पर भी दलीलें रखी जा सकती हैं।
परिवार के दूसरे पक्ष भी कोर्ट पहुंचे
बुधवार को वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अधिवक्ता अदालत पहुंचे। उन्होंने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा।
इससे साफ है कि संपत्ति का यह विवाद अब परिवार के अलग-अलग उत्तराधिकारियों के अधिकारों और पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच उलझता जा रहा है।
पहले भी कोर्ट ने दस्तावेजों को लेकर जताई थी नाराजगी
इस मामले की पिछली सुनवाई में भी दस्तावेजों को लेकर अदालत का रुख सख्त रहा था। बंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए जाने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि दस्तावेज सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों के सामने प्रस्तुत किए जाएं।
वहीं, पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब भी अदालत में दिया जा चुका है। उस पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया था कि यदि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी या खुद को अलग रखा था, तो बाद में आपत्ति क्यों उठाई गई।
अब प्रतिमा देवी इसी पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं।
अब निगाह 10 सितंबर की सुनवाई पर
सिंधिया राजघराने की संपत्ति का यह विवाद अब सिर्फ करोड़ों की संपत्ति के बंटवारे का मामला नहीं रह गया है। इसमें वसीयत, नोटिस, उत्तराधिकार और समझौते की कानूनी वैधता जैसे कई सवाल जुड़ चुके हैं।
प्रतिमा देवी की आपत्ति पर अदालत क्या रुख अपनाती है और पहले से चल रही बंटवारे की प्रक्रिया पर इसका कितना असर पड़ता है, इसका संकेत 10 सितंबर की सुनवाई में मिल सकता है।
