MP Backdated Degree Racket: VC समेत 3 गिरफ्तार, PTI भर्ती से कैसे खुला पुरानी तारीख की डिग्री का खेल?
राजस्थान SOG की PTI भर्ती-2022 से जुड़ी जांच मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज तक पहुंची है। कथित तौर पर पुरानी तारीखों से डिग्री जारी करने के मामले की जांच में विश्वविद्यालय के कुलपति समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की गई है।

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PTI भर्ती से कैसे खुला मामला?
राजस्थान में Physical Training Instructor यानी PTI Recruitment Examination-2022 से जुड़े संदिग्ध शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच करते हुए Special Operations Group यानी SOG मध्य प्रदेश तक पहुंची।
जांच का दायरा सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज तक बढ़ा।
SOG कथित तौर पर ऐसी B.P.Ed डिग्रियों की जांच कर रही है जिनकी तारीख और विश्वविद्यालय के वास्तविक रिकॉर्ड के बीच अंतर होने का संदेह है।
Backdated Degree क्या होती है?
Backdated Degree का सामान्य अर्थ ऐसी डिग्री या शैक्षणिक दस्तावेज से है जिसे वास्तविक प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया हो लेकिन रिकॉर्ड में उसे पहले की तारीख से जारी हुआ दिखाया जाए।
भर्ती परीक्षा में इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि उम्मीदवार को अक्सर निर्धारित Cut-off Date तक आवश्यक योग्यता हासिल करना जरूरी होता है।
अगर कोई उम्मीदवार Cut-off Date के बाद योग्यता हासिल करता है लेकिन दस्तावेज में उसे पहले से योग्य दिखाया जाए, तो इससे भर्ती की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
यही पहलू इस जांच को गंभीर बनाता है।
VC समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी
मामले की जांच में विश्वविद्यालय के कुलपति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितता किसी एक डिग्री या उम्मीदवार तक सीमित थी या इसका दायरा बड़ा है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं होती। आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
मामला पहले से जांच के दायरे में
इस विश्वविद्यालय से जुड़ी संदिग्ध डिग्रियों की जांच अचानक शुरू नहीं हुई है।
जनवरी 2026 में भी राजस्थान SOG की टीम ने सीहोर स्थित विश्वविद्यालय के अलग-अलग कार्यालयों में जांच की थी। उस समय PTI भर्ती से जुड़ी 67 संदिग्ध डिग्रियों की पड़ताल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसलिए मौजूदा गिरफ्तारियां पहले से चल रही बड़ी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा सकती हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड क्यों बन सकता है सबसे बड़ा सबूत?
Backdated Degree जैसे मामलों में केवल कागज पर लिखी तारीख देखना पर्याप्त नहीं होता।
जांच में छात्र का प्रवेश रिकॉर्ड, फीस जमा होने की तारीख, परीक्षा में शामिल होने का रिकॉर्ड, परिणाम, मार्कशीट, विश्वविद्यालय के डिजिटल डेटाबेस में एंट्री और किसी रिकॉर्ड में बाद में किए गए बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इन सभी रिकॉर्ड्स की समयरेखा का मिलान यह स्थापित करने में मदद कर सकता है कि कोई शैक्षणिक दस्तावेज वास्तविक प्रक्रिया से जारी हुआ या बाद में पुराने समय का दिखाने की कोशिश हुई।
जांच में अब सबसे बड़ा सवाल
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब कथित नेटवर्क के दायरे का है।
क्या संदिग्ध Backdated Degree केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित थीं?
क्या दूसरी भर्तियों में भी ऐसी डिग्रियों का इस्तेमाल हुआ?
और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में कथित बदलाव किस स्तर पर किए गए?
SOG की आगे की जांच इन सवालों के जवाब तय करेगी।
