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एक फोटो से OpenAI के अंदर तक पहुंच! 3 भारतीय रिसर्चर्स ने 72 घंटे में खोजी बड़ी सुरक्षा खामी
HackTron AI के तीन भारतीय रिसर्चर्स ने OpenAI से जुड़ी सुरक्षा कमजोरियों की जांच की।लोकस्वामी ग्राफिक्स
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एक फोटो से OpenAI के अंदर तक पहुंच! 3 भारतीय रिसर्चर्स ने 72 घंटे में खोजी बड़ी सुरक्षा खामी

Digital News Desk7 min read24/09/26

iPhone की HEIC फोटो से शुरू हुई सिक्योरिटी रिसर्च OpenAI के कर्मचारी अकाउंट और इंटरनल GitHub रिपॉजिटरी तक पहुंच साबित करने तक पहुंच गई। HackTron AI की टीम ने AI मॉडल्स की मदद से इस खामी की जांच की और रिपोर्ट OpenAI को दी।

Lokswami AI

एक साधारण-सी iPhone फोटो ने AI की दुनिया की सबसे चर्चित कंपनियों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था की कई परतें खोल दीं। HackTron AI के तीन भारतीय सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने OpenAI के कम्युनिटी फोरम से शुरू हुई जांच में ऐसी कमजोरियां खोजीं, जिनके जरिए फोरम के सर्वर से आगे OpenAI के कुछ कर्मचारी अकाउंट और उनसे जुड़े आंतरिक डेवलपमेंट सिस्टम तक पहुंच साबित की गई। रिसर्चर्स के मुताबिक, पहली खामी मिलने से लेकर OpenAI के इंटरनल कोड रिपॉजिटरी में बदलाव का प्रस्ताव भेजकर पहुंच साबित करने तक का समय 72 घंटे से भी कम रहा।

शुरुआत OpenAI के मुख्य सिस्टम से नहीं हुई

इस मामले की शुरुआत OpenAI के मुख्य AI सिस्टम से नहीं, बल्कि उसके कम्युनिटी फोरम से हुई। इस फोरम पर यूजर्स OpenAI के प्रोडक्ट से जुड़े सवाल, समस्याएं और फीडबैक साझा करते हैं। फोरम के पीछे Discourse प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। HackTron की टीम यह समझना चाहती थी कि फोरम पर यूजर द्वारा अपलोड की गई तस्वीर सर्वर पर किस-किस सॉफ्टवेयर से होकर गुजरती है।

23 जुलाई 2026 को इसी इमेज अपलोड सिस्टम की जांच शुरू हुई। रिसर्चर्स ने पाया कि अलग-अलग इमेज फॉर्मेट के लिए अलग प्रोसेसिंग पाथ इस्तेमाल हो रहे थे। सामान्य इमेज के लिए FastImage का इस्तेमाल होता था, जबकि iPhone में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले HEIC/HEIF फॉर्मेट के लिए प्रक्रिया अलग थी।

iPhone की HEIC फोटो बनी जांच का केंद्र

HEIF इमेज को प्रोसेस करने के लिए ImageMagick और उसके नीचे libheif जैसी लाइब्रेरी इस्तेमाल हो रही थी। रिसर्चर्स ने libheif के उस वर्जन की जांच की और HackTron के मुताबिक उन्हें ऐसी मेमोरी-संबंधी सुरक्षा समस्या मिली, जिसका फायदा खास तौर पर तैयार की गई इमेज के जरिए उठाया जा सकता था।

रिपोर्ट के अनुसार समस्या heap buffer overflow से जुड़ी थी। आसान भाषा में इसका मतलब है कि किसी प्रोग्राम को दी गई मेमोरी की सीमा से बाहर डेटा पढ़ने या लिखने की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी memory-safety समस्या गंभीर हो सकती है, क्योंकि सही परिस्थितियों में इससे प्रोग्राम के व्यवहार और execution flow पर असर डालने की कोशिश की जा सकती है।

AI ने खोज में कैसे मदद की?

रिसर्चर्स ने इस जांच में AI मॉडल का भी इस्तेमाल किया। HackTron के मुताबिक, उन्होंने Discourse के Docker environment में Claude Opus 4.8 की मदद से installed libheif package और उसके security history की जांच कराई।

उनके अनुसार upstream code में कुछ जरूरी सुधार मौजूद थे, लेकिन इस्तेमाल किए जा रहे Debian package में वे security fix के रूप में शामिल नहीं हुए थे। जिस environment की जांच की जा रही थी, उसमें Debian 12 और libheif 1.19.7 का इस्तेमाल हो रहा था।

यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। किसी software project's मुख्य code में बदलाव आ जाना और वही security fix हर operating-system package तक पहुंच जाना एक ही बात नहीं है। इसी अंतर ने रिसर्चर्स को पुराने vulnerable code की मौजूदगी की जांच का रास्ता दिया।

24 जुलाई को बदला जांच का तरीका

इसके बाद सवाल यह था कि क्या memory corruption की समस्या को आगे बढ़ाकर सर्वर पर कोड चलाने तक पहुंचा जा सकता है। रिसर्चर्स ने इसके लिए Claude की मदद से प्रयोग किए।

पहले मॉडल को ASLR जैसी memory सुरक्षा व्यवस्था के कारण कठिनाई आई। ASLR का उद्देश्य ही यह है कि प्रोग्राम और डेटा मेमोरी में हर बार एक ही जगह न रहें, जिससे किसी हमलावर के लिए सही memory address का अनुमान लगाना मुश्किल हो।

HackTron के मुताबिक, नए Claude मॉडल के साथ दोबारा परीक्षण किया गया और 25 जुलाई की सुबह तक उनके नियंत्रित environment में image के जरिए server पर code execution साबित हो गया।

25 जुलाई को OpenAI फोरम तक पहुंच

इसके बाद यही तकनीक OpenAI के कम्युनिटी फोरम के environment में जांची गई। रिसर्चर्स के अनुसार करीब सुबह 10 बजे तक उनके अपने नियंत्रित Discourse server पर भी यह काम कर गया।

इसका मतलब था कि एक विशेष रूप से तैयार की गई इमेज के जरिए उस सर्वर पर code execution की स्थिति बनाई जा सकती थी। यहीं से जांच OpenAI की दूसरी सुरक्षा परत की तरफ बढ़ी।

SSO ने खोला दूसरा रास्ता

फोरम में OpenAI अकाउंट से लॉगिन करने की सुविधा भी मौजूद थी। इसे Single Sign-On यानी SSO व्यवस्था से जोड़ा गया था। ऐसी व्यवस्था में एक पहचान के जरिए अलग-अलग जुड़ी सेवाओं में यूजर को प्रमाणित किया जा सकता है।

HackTron के अनुसार फोरम सर्वर तक मिली पहुंच और SSO से जुड़ी दूसरी समस्या को जोड़कर कुछ सक्रिय ChatGPT और Codex अकाउंट तक पहुंच हासिल करना संभव हुआ। इनमें OpenAI कर्मचारियों के अकाउंट भी शामिल थे।

यहीं से मामला सिर्फ एक थर्ड-पार्टी फोरम की सुरक्षा खामी तक सीमित नहीं रहा।

कर्मचारी के Codex से GitHub तक पहुंच

रिसर्चर्स के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों ने अपने Codex अकाउंट को GitHub से जोड़ रखा था। Codex को AI आधारित प्रोग्रामिंग सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस कनेक्शन के कारण संबंधित कर्मचारी अकाउंट से जुड़े डेवलपमेंट संसाधनों तक पहुंच का रास्ता मिला।

HackTron ने इसके बाद एक सीमित परीक्षण किया। रिसर्चर्स ने संवेदनशील कोड को बड़े पैमाने पर पढ़ने या कॉपी करने के बजाय एक Pull Request बनाकर यह साबित करने की कोशिश की कि वे OpenAI के आंतरिक कोड रिपॉजिटरी तक उस स्तर पर पहुंच चुके हैं जहां बदलाव का प्रस्ताव भेजा जा सकता है।

उनके मुताबिक यह Pull Request OpenAI के आंतरिक openai/openai रिपॉजिटरी में बनाया गया। यही वह बिंदु था जिसने रिसर्चर्स को अपनी रिपोर्ट में वास्तविक प्रभाव साबित करने का आधार दिया।

रिसर्चर्स ने यहीं रोक दी जांच

रिसर्चर्स के मुताबिक, पहुंच की सीमा साबित होने के बाद उन्होंने आगे बढ़ने के बजाय जांच रोक दी। उनका उद्देश्य OpenAI के सिस्टम को नुकसान पहुंचाना या बड़ी मात्रा में कंपनी का डेटा निकालना नहीं था। उन्होंने सुरक्षा टीम को समस्या की जानकारी दी और बताया कि अलग-अलग कमजोरियां आपस में जुड़कर कितनी दूर तक पहुंच बना सकती हैं।

यह distinction महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में जिस घटना को “हैक” कहा गया है, वह सामान्य साइबर अपराध की बजाय रिसर्चर्स द्वारा अधिकृत सुरक्षा जांच और vulnerability disclosure के संदर्भ में सामने आई थी।

OpenAI और Discourse ने किए सुधार

HackTron की टाइमलाइन के मुताबिक OpenAI ने 25 जुलाई को अपनी तरफ की समस्या को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। वहीं Discourse को इमेज प्रोसेसिंग से संबंधित vulnerability की जानकारी दी गई।

26 जुलाई को Discourse की ओर से प्रतिक्रिया दी गई और 27 जुलाई तक सुधार तैयार किए गए। इसके बाद ImageMagick को अधिक सीमित वातावरण में चलाने के लिए sandboxing जैसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

28 जुलाई को Discourse ने सुरक्षा संबंधी सूचना जारी कर प्रभावित सिस्टम को नए वर्जन के साथ अपडेट करने की सलाह दी।

1 सितंबर को मिला 6,500 डॉलर का इनाम

1 सितंबर 2026 को OpenAI ने HackTron को 6,500 डॉलर का bug bounty reward दिया। यह रकम सुरक्षा खामी की जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग के लिए दिए गए इनाम के तौर पर बताई गई है।

यहां यह भी समझना जरूरी है कि OpenAI का इनाम मिलना किसी अवैध साइबर हमले को पुरस्कृत करना नहीं था। यह bug bounty और responsible disclosure प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसमें रिसर्चर्स संभावित सुरक्षा खामियां कंपनी को बताते हैं ताकि उन्हें ठीक किया जा सके।

दो अलग कमजोरियों ने बनाया पूरा रास्ता

इस पूरी घटना को एक ही “OpenAI hack” के रूप में समझना अधूरा होगा। HackTron की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें कम से कम दो अलग सुरक्षा समस्याएं महत्वपूर्ण थीं।

पहली कमजोरी Discourse के इमेज प्रोसेसिंग रास्ते और libheif से संबंधित थी, जिसके जरिए फोरम सर्वर पर code execution साबित किया गया।

दूसरी समस्या OpenAI की authentication/SSO व्यवस्था से जुड़ी थी, जिसने पहले से मिली server access को कुछ कर्मचारी अकाउंट तक पहुंचने के रास्ते से जोड़ा।

इन दोनों कड़ियों के बाद एक कर्मचारी के Codex और GitHub कनेक्शन के जरिए आंतरिक code repository में Pull Request बनाकर प्रभाव साबित किया गया।

AI ने हैक किया या रिसर्चर्स ने AI का इस्तेमाल किया?

इस कहानी का शायद सबसे दिलचस्प पहलू यही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक AI मॉडल ने अपने आप OpenAI को “हैक” नहीं किया था। तीनों रिसर्चर्स ने environment तैयार किया, vulnerability की दिशा तय की, परिणामों की जांच की और AI मॉडल्स का इस्तेमाल code analysis तथा exploitation research में सहायता के लिए किया।

HackTron के अनुसार इस शोध में लगभग दो महीने के दौरान AI tokens पर करीब 3,000 डॉलर खर्च हुए। यानी AI यहां एक research tool के रूप में इस्तेमाल हुआ, जबकि पूरी प्रक्रिया का नियंत्रण और निर्णय रिसर्चर्स के पास था।

3 भारतीय रिसर्चर्स कौन हैं?

इस सुरक्षा शोध के पीछे HackTron AI की टीम थी। मोहन पेधापति और हर्ष जयसवाल HackTron AI के co-founders हैं, जबकि राहुल मैनी vulnerability researcher के तौर पर काम करते हैं।

उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, टीम frontier AI कंपनियों की security research कर रही थी। इस जांच का घोषित उद्देश्य कमजोरियों को ढूंढना, उनका वास्तविक प्रभाव समझना और संबंधित कंपनी को जानकारी देकर उन्हें ठीक कराने में मदद करना था।

इस मामले में एक साधारण HEIC फोटो से शुरू हुई जांच कुछ ही दिनों में कई तकनीकी परतों से गुजरते हुए OpenAI के आंतरिक development infrastructure तक पहुंच साबित करने तक पहुंच गई।

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