टाटा संस की कमान 2032 तक चंद्रशेखरन के हाथ, बोर्ड ने बढ़ाया कार्यकाल; इस्तीफे के बाद फिर बड़ा फैसला
टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को 2032 तक चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था। अब इस फैसले पर सालाना आम बैठक में अंतिम मंजूरी जरूरी होगी।

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टाटा ग्रुप की लीडरशिप को लेकर पिछले कुछ महीनों से चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा फैसला हुआ है। टाटा संस के बोर्ड ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल करीब पांच साल और बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक वे 2032 तक समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की कमान संभालेंगे।
यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब चंद्रशेखरन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे और बोर्ड में उनके अगले कार्यकाल को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद मामला शेयरहोल्डर्स की सालाना आम बैठक तक पहुंचेगा।
फरवरी 2027 में खत्म होना था मौजूदा कार्यकाल
एन. चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था। नए प्रस्ताव के तहत उनका कार्यकाल 2032 तक जारी रहेगा।
हालांकि, बोर्ड की मंजूरी के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। प्रस्ताव को सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलना बाकी है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए इस स्तर पर ट्रस्ट की भूमिका अहम होगी।
अगस्त में इस्तीफे से शुरू हुआ था विवाद
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सर्वसम्मति से सिफारिश की थी।
उनके मुताबिक, यह प्रस्ताव टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड तक पहुंचा, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण आगे नहीं बढ़ सका।
चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफे के वक्त यह भी कहा था कि नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है, क्योंकि समूह के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण चरण में हैं।
नोएल टाटा की असहमति की चर्चा
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद की खबरें सामने आई थीं। ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य नोएल टाटा को उनके दोबारा कार्यकाल के प्रस्ताव का विरोध करने वालों में बताया गया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव का समर्थन किया।
हालांकि, बोर्ड ने अब चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अंतिम स्थिति सालाना आम बैठक में होने वाले फैसले के बाद स्पष्ट होगी।
65 साल की उम्र के बाद भी चेयरमैन बने रहेंगे
चंद्रशेखरन की उम्र अभी 63 साल है। अगर प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो 2032 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के समय वे 70 साल के होंगे।
टाटा ग्रुप की नीति के मुताबिक ग्रुप एग्जीक्यूटिव के लिए सामान्य रिटायरमेंट उम्र 65 साल है। वहीं नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों पर अधिकतम 70 साल तक रहने का प्रावधान बताया जाता है।
इस लिहाज से चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल समूह की मौजूदा एग्जीक्यूटिव रिटायरमेंट व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2017 में संभाली थी टाटा ग्रुप की कमान
चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया।
उन्होंने 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS से इंटर्न के तौर पर करियर शुरू किया था। बाद में वे TCS के CEO और MD बने और फिर टाटा संस की जिम्मेदारी संभाली।
9 साल में ग्रुप का कारोबार कितना बढ़ा?
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने एविएशन के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू करीब 7.89 लाख करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपए हो गया।
इसी अवधि में ग्रुप का मुनाफा करीब 32 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपए बताया गया है। टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी 2020 के 9.31 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2026 में करीब 24.39 लाख करोड़ रुपए पहुंचा।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स अलग कैसे?
टाटा ग्रुप कई अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह है। इसमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं।
टाटा संस इस पूरे समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। यह टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और समूह के रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं टाटा ट्रस्ट्स परोपकारी और सामाजिक कार्यों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
अब चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल को लेकर बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव सालाना आम बैठक होगा, जहां प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होना है।
