‘आपके खाते में आतंकियों ने जमा किए 7 करोड़’, डिजिटल अरेस्ट कर महिला से 35 लाख ठगे; भोपाल में साइबर फ्रॉड
पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने भोपाल की एक महिला को वीडियो कॉल पर डराया और उसके नाम से आतंकियों का खाता होने की कहानी सुनाई। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उससे जमा पूंजी, FD और उधार की रकम तक ट्रांसफर कराई गई।

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भोपाल में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। गोविंदपुरा इलाके की एक महिला को वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले आरोपियों ने कहा कि उसके नाम से एचडीएफसी बैंक में खाता खुला है और उसमें आतंकियों ने 7 करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसके बाद महिला को गिरफ्तारी और उसके बच्चों को भी हिरासत में लेने की धमकी दी गई।
डर के माहौल में आरोपियों ने महिला से कहा कि अगर वह गिरफ्तारी से बचना चाहती है तो अपनी रकम उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दे। पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग चरणों में महिला से करीब 35 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। लगातार पैसों की मांग होने के बाद उसे ठगी का शक हुआ और उसने साइबर क्राइम में शिकायत की।
वीडियो कॉल पर बनाया पुलिस मुख्यालय जैसा माहौल
साकेत नगर निवासी उमा समद्दार LIC और पोस्ट ऑफिस एजेंट हैं। पुलिस के मुताबिक, 23 सितंबर 2025 को उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि महिला के नाम से एचडीएफसी बैंक में एक खाता खुला है।
इसके बाद ठगों ने उस खाते में आतंकियों के 7 करोड़ रुपये जमा होने की कहानी सुनाई। महिला को बताया गया कि इस मामले में उसकी गिरफ्तारी होने वाली है। वीडियो कॉल के दौरान पुलिस मुख्यालय जैसा माहौल दिखाने और 45 दिन तक गिरफ्तारी में रखने की धमकी देने की बात भी शिकायत में सामने आई है।
आरोपियों ने महिला के बच्चों को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी, जिससे वह और डर गई।
जमा पूंजी के बाद FD भी तुड़वाई
पुलिस के अनुसार, ठगों के दबाव में महिला ने 29 सितंबर 2025 को 21 लाख 57 हजार 815 रुपये उनके बताए बैंक खाते में जमा कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने उसकी FD तुड़वाकर दूसरी जगह रकम भेजने को कहा।
महिला ने 15 अक्टूबर को करीब 8 लाख रुपये और ट्रांसफर किए। इसके बाद भी आरोपियों की पैसों की मांग खत्म नहीं हुई।
उधार लेकर भी भेजे पैसे
ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। महिला ने कथित दबाव में करीब साढ़े तीन लाख रुपये उधार लेकर और बाद में एक लाख रुपये और आरोपियों के बताए खातों में जमा किए।
इस तरह अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 35 लाख रुपये ठग लिए गए। जब आरोपियों ने इसके बाद भी और पैसे मांगे तो महिला को पूरे मामले पर संदेह हुआ।
साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत, 15 लाख रुपये होल्ड
महिला ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। पुलिस के अनुसार, शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए करीब 15 लाख रुपये की रकम संबंधित खाते में होल्ड कराई गई।
जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, WhatsApp चैट, वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट, रकम जमा करने की रसीदें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई।
एक साल बाद दर्ज हुआ केस
पुलिस के मुताबिक, साइबर क्राइम से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस मोबाइल नंबर और बैंक खातों के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
साथ ही जिन खातों में रकम भेजी गई, उनके ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी निकाली जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि ठगी में कितने लोग शामिल थे और रकम आगे किन खातों में ट्रांसफर हुई।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बनाया गया डर
इस मामले में ठगों ने कथित तौर पर तीन स्तर पर महिला पर दबाव बनाया—पहले आतंकियों के 7 करोड़ रुपये से जुड़े बैंक खाते की कहानी, फिर पुलिस गिरफ्तारी का डर और उसके बाद बच्चों को भी गिरफ्तार करने की धमकी।
पुलिस अब वीडियो कॉल, WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन को जांच का आधार बना रही है। 15 लाख रुपये होल्ड होने के बाद अब पुलिस की कोशिश रकम के बाकी हिस्से का पता लगाने और आरोपियों तक पहुंचने की है।
