7 साल फरार रहने के बाद 14.5 करोड़ की ठगी का आरोपी बैतूल से गिरफ्तार, हांगकांग तक फैला निकला नेटवर्क
अहमदाबाद पुलिस ने 14.5 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी नीलेश धीरूभाई पटेल को मध्य प्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार किया है। आरोपी 7 साल से फरार था और हुलिया बदलकर बैतूल में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक उसने 65 बैंक खातों और करीब 20 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया था, जिसका एक सिरा हांगकांग तक जुड़ा है। आरोपी के साथी दीपक आहूजा उर्फ दीपू टांक को भी गिरफ्तार किया गया है।

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गुजरात के 14.5 करोड़ रुपए के ठगी मामले में सात साल से फरार चल रहे आरोपी नीलेश धीरूभाई पटेल को अहमदाबाद पुलिस ने मध्य प्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि पटेल ने पहचान छिपाने के लिए अपना हुलिया बदल लिया था और शेल कंपनियों तथा बैंक खातों का एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था। उसके साथी दीपक आहूजा उर्फ दीपू टांक को भी गिरफ्तार किया गया है।
10 महीने की निगरानी के बाद गिरफ्तारी
अहमदाबाद जोन-7 के डीसीपी शिवम शर्मा के मुताबिक, वासणा पुलिस पिछले करीब 10 महीने से पटेल की तलाश में जुटी थी। "ऑपरेशन हॉक आई" के तहत तकनीकी और मानवीय, दोनों तरीकों से निगरानी की गई। पुलिस के अनुसार पटेल पिछले दो साल से बैतूल में रह रहा था और हांगकांग से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था। हुलिया बदलने के लिए उसने अपनी दाढ़ी तक हटा ली थी।
मुंबई में खड़ा किया शेल कंपनियों का जाल
पुलिस का आरोप है कि गुजरात से फरार होने के बाद पटेल मुंबई चला गया, जहां उसने "टोशन ग्रुप" के नाम से करीब 19 से 20 शेल कंपनियां खड़ी कीं। इनमें से एक कंपनी हांगकांग में भी रजिस्टर्ड बताई जा रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक पटेल ने 65 बैंक खातों का नेटवर्क बनाया और खुद को शेयर मार्केट एडवाइजर बताकर निवेशकों का भरोसा जीता। आरोप है कि वह लग्जरी कारों और महंगे गैजेट्स के दिखावे से अपनी संपन्नता का भ्रम बनाए रखता था।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से करीब 35 लाख रुपए की संपत्ति बरामद की है, जिसमें एक कार, लैपटॉप और मोबाइल फोन शामिल हैं। आरोपियों से जुड़े 65 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें करीब 20 लाख रुपए जमा मिले हैं।
क्रिप्टोकरेंसी और सेमीकंडक्टर प्लांट के नाम पर निवेश
पुलिस का दावा है कि पटेल सेमीकंडक्टर प्लांट के नाम पर भी निवेश जुटा रहा था। इसके लिए उत्तर प्रदेश में जमीन चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि उसने "सेमी कॉइन" नाम की एक क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च की और इसके जरिए निवेशकों से करीब 5 करोड़ रुपए जुटाए।
अहमदाबाद के वासणा थाने में दर्ज एक अन्य मामले में आरोप है कि पटेल ने "प्रियंका फैशन्स" नाम की फर्म के जरिए असली संपत्ति मालिक को बिना जानकारी दिए 90 लाख रुपए का प्रॉपर्टी लोन हासिल किया।
बैंक अफसरों और वैल्यूअर्स की भूमिका जांच के घेरे में
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कुछ बैंक अफसरों और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स के साथ मिलकर विवादित संपत्तियां चिन्हित कीं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़े लोन पास कराए। शक से बचने के लिए शुरुआत की एक-दो किस्तें चुकाई जाती थीं, इसके बाद आरोपी फरार हो जाते थे। इस सिंडिकेट से जुड़ा एक बैंक मैनेजर पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पटेल के खिलाफ क्राइम ब्रांच-3, चिलोड़ा, नरोडा और निकोल थानों में भी अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
आगे की जांच जारी
वासणा पुलिस अब अन्य बैंक मैनेजरों और वैल्यूअर्स की भूमिका की जांच कर रही है। पूछताछ में पटेल ने कई ठिकानों की जानकारी दी है, जिनके आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सात साल की फरारी के दौरान वह कहां-कहां छिपा रहा और उसे किन लोगों ने मदद पहुंचाई।
