नेपाल में तबाही के 11वें दिन दो जिंदगियां बचीं, 740 फीट सुरंग से चीनी नागरिक और मलबे में दबी 64 साल की महिला रेस्क्यू
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के 11वें दिन राहत अभियान के दौरान दो लोगों को जिंदा बचाया गया। नुवाकोट में 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ को घर के मलबे और कीचड़ से बाहर निकाला गया, जबकि त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की करीब 740 फीट लंबी सुरंग से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित निकाला गया। दूसरी ओर हजारों लोगों की तलाश अब भी जारी है।

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नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच 11वें दिन राहत अभियान को दो ऐसी कामयाबियां मिलीं, जिन्होंने उम्मीद जगा दी है। घंटों और दिनों से मलबे व सुरंगों में फंसे दो लोगों को बचाव दलों ने जिंदा बाहर निकाल लिया।
नुवाकोट में 64 साल की एक महिला अपने ही घर के मलबे और मोटी कीचड़ के नीचे फंसी मिलीं। दूसरी ओर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की करीब 225 मीटर लंबी सुरंग में फंसे एक चीनी नागरिक को नेपाल सेना और दक्षिण कोरिया की रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला।
दोनों बचाव अभियानों के बाद अब उन इलाकों में तलाश तेज कर दी गई है, जहां अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है।
घर का हिस्सा मिट्टी में दबा था, अंदर मिलीं चंद्रिका
नुवाकोट में रेस्क्यू टीम को एक क्षतिग्रस्त मकान के मलबे में जिंदगी का सुराग मिला। 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ घर के निचले हिस्से में फंसी हुई थीं।
मकान का बड़ा हिस्सा मोटी कीचड़ की परत में दब चुका था। टीम ने सावधानी से मलबा हटाया और महिला को बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उनकी हालत की जांच की गई और बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट करके काठमांडू ले जाया गया।
इतने लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के बाद उनका जिंदा मिलना राहत अभियान के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
740 फीट लंबी सुरंग बनी चीनी नागरिक का ठिकाना
दूसरा रेस्क्यू अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में हुआ। बाढ़ के बाद एक चीनी नागरिक परियोजना की ऑडिट-4 सुरंग में फंस गया था।
करीब 225 मीटर यानी 740 फीट लंबी सुरंग के भीतर चलाए गए अभियान में नेपाल सेना और दक्षिण कोरिया के आपदा विशेषज्ञ शामिल हुए। संयुक्त टीम ने आखिरकार उसे सुरंग से बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के बाद उसकी स्वास्थ्य जांच की गई और आगे के इलाज व मदद के लिए उसे नुवाकोट के त्रिशूली स्थित मैथिल बैरक ले जाया गया।
हाइड्रो प्रोजेक्ट अब भी रेस्क्यू का बड़ा केंद्र
नेपाल में राहत दलों का ध्यान सिर्फ रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी बड़े स्तर पर चल रही है।
करीब 12 हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले लगभग 900 कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 500 लोगों के बड़ी सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है।
इन्हीं इलाकों में भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की रेस्क्यू टीमें मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचों के बीच तलाश कर रही हैं।
275 भारतीयों का अब भी पता नहीं
नेपाल में आई आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 169 भारतीयों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 275 भारतीयों के अभी भी लापता होने की जानकारी है।
नेपाल में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है और अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक आपदा से अब तक 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ और भूस्खलन ने सिर्फ घरों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। 6,500 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह और तीन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। करीब 55 किलोमीटर सड़कें टूट गई हैं। इसके अलावा 37 मोटरेबल ब्रिज और 68 झूला पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
भट्टार में फिर टली बड़ी चिंता
भट्टार इलाके में शुक्रवार को पहाड़ से मिट्टी और पत्थर गिरने के बाद नदी का बहाव प्रभावित होने की आशंका बनी थी। इससे आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई थी।
हालांकि शनिवार को प्रशासन के मुताबिक नदी का बहाव सामान्य रहा। जिला अधिकारी बार्टराज पौडेल ने बताया कि फिलहाल नदी का रास्ता बंद नहीं है और पहाड़ से मलबा गिरने की स्थिति भी शांत है।
एहतियात के तौर पर आठ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। घटना में किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं है।
सांसद ने उठाया राहत व्यवस्था पर सवाल
नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने आपदा के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
उनका दावा है कि बाढ़ से 800 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने राहत कार्यों में बेहतर तालमेल और लंबी अवधि की योजना की जरूरत बताई।
केसी ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लाइमेट जस्टिस और मुआवजे की मांग उठाने की बात भी कही है।
दो जिंदगियां बचीं, लेकिन तलाश अभी बाकी
नेपाल में 11 दिन बाद मलबे और सुरंग से दो लोगों का जिंदा निकलना राहत टीमों के लिए उम्मीद की बड़ी वजह है। लेकिन दूसरी तरफ हजारों लोग अब भी लापता हैं।
हर गुजरते दिन के साथ रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बढ़ रही है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी जारी है और सुरंगों, मलबे तथा टूटे ढांचों के भीतर जिंदगी के किसी भी संकेत को तलाशने का काम लगातार किया जा रहा है।
