कीव में जयशंकर का बड़ा बयान- रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने में भारत निभाएगा भूमिका, बोले- मदद के लिए हम तैयार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में भारत हर संभव मदद के लिए तैयार है। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ बातचीत में ब्लैक सी में कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा, नेविगेशन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध के बीच समुद्री मार्गों पर हमले बढ़े हैं।

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी कूटनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा संकेत दिया है। कीव पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि अगर भारत युद्ध को खत्म कराने की कोशिश में किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है। यूक्रेन की राजधानी में दिया गया यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि नई दिल्ली एक तरफ मॉस्को के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्ते बनाए हुए है, वहीं कीव के साथ भी सीधे संवाद को लगातार आगे बढ़ा रही है।
‘भारत किसी भी तरह मदद के लिए तैयार’
जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत युद्ध का समाधान निकालने में किसी भी तरह योगदान दे सकता है तो वह पीछे नहीं हटेगा।
उनका संदेश मूल रूप से यही था कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की कोशिशों में मदद के लिए उपलब्ध है। भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की वकालत करता रहा है।
हालांकि, जयशंकर के बयान को सीधे तौर पर भारत द्वारा औपचारिक मध्यस्थता शुरू करने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने भारत की मदद की तत्परता जताई है, जबकि युद्ध खत्म कराने की वास्तविक प्रक्रिया रूस और यूक्रेन की सहमति और व्यापक कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेगी।
कीव में बातचीत का दूसरा बड़ा मुद्दा बना ब्लैक सी
जयशंकर और सिबिहा की बातचीत सिर्फ युद्ध खत्म कराने की संभावनाओं तक सीमित नहीं रही। ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमले भी चर्चा के प्रमुख मुद्दों में रहे।
ब्लैक सी रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का अहम समुद्री क्षेत्र बन चुका है। हाल के हमलों ने व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय नाविक और समुद्री व्यापार भी इस क्षेत्र की अस्थिरता से प्रभावित हो सकते हैं।
यूक्रेन ने मोदी के डायलॉग वाले रुख का किया स्वागत
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जयशंकर के दौरे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया जब रूस और यूक्रेन के बीच हमले जारी हैं। दोनों पक्षों के बीच ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों को सामान्य बनाने पर भी चर्चा हुई।
भारत की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि वह संवाद और कूटनीति को समाधान का रास्ता मानता है। इससे पहले सिबिहा और जयशंकर के बीच फोन पर हुई बातचीत में भी ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा तथा व्यापारिक आवाजाही बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
युद्ध के बीच भारत का संतुलन वाला दांव
जयशंकर का कीव दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क बनाए हुए है। इससे कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात हुई थी। इसके तुरंत बाद जयशंकर का यूक्रेन पहुंचना भारत की उस नीति को दिखाता है जिसमें वह मॉस्को के साथ अपने रिश्तों को बनाए रखते हुए कीव के साथ भी संवाद बढ़ा रहा है।
जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड के दौरे पर हैं। यूक्रेन के बाद उनका पोलैंड जाना भी भारत के यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।
सिर्फ युद्ध नहीं, भारत-यूक्रेन रिश्तों पर भी फोकस
कीव में हुई बातचीत का एजेंडा युद्ध तक सीमित नहीं रहा। दोनों देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
दोनों पक्षों के बीच आगे अंतर-सरकारी आयोग की बैठक को लेकर भी सहमति बनी है। यानी भारत के लिए यह दौरा एक साथ दो मोर्चों पर आगे बढ़ने का प्रयास है—एक तरफ युद्ध और उससे जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर संवाद, दूसरी तरफ भारत-यूक्रेन के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करना।
क्या भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा?
जयशंकर के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत आने वाले समय में रूस और यूक्रेन के बीच औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है?
फिलहाल इतना साफ है कि नई दिल्ली खुद को शांति प्रक्रिया में मदद करने के लिए तैयार बता रही है। लेकिन मध्यस्थता की वास्तविक भूमिका तभी आकार लेगी, जब दोनों युद्धरत पक्ष भारत की ऐसी भूमिका को स्वीकार करें।
युद्ध अभी जारी है, ब्लैक सी में तनाव भी बना हुआ है और बातचीत की कोशिशों के बीच सैन्य गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं हैं। ऐसे में कीव से जयशंकर का संदेश भारत की ‘संवाद भी, संतुलन भी’ वाली कूटनीति का अगला महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
