होर्मुज संकट के बीच पीएम मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात, चाबहार से ऊर्जा सुरक्षा तक इन मुद्दों पर नजर
किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता के बीच हुई इस बैठक को भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बातचीत में क्षेत्रीय तनाव, चाबहार पोर्ट, जहाजों की आवाजाही और भारत की ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं।

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किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा है। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी चिंता के बीच दोनों नेताओं की यह आमने-सामने की बैठक हुई है।
फरवरी में मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात बताई जा रही है। इससे पहले दोनों की अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी।
होर्मुज संकट के बीच मुलाकात क्यों अहम?
भारत के लिए ईरान के साथ संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। चाबहार पोर्ट, ऊर्जा आपूर्ति और मध्य एशिया तक संपर्क के लिहाज से ईरान भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा हुआ है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, मोदी-पेजेशकियान मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बातचीत में क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही जैसे मुद्दे उठने की संभावना है।
चाबहार पोर्ट भी बातचीत का अहम हिस्सा
भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार पोर्ट लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता देता है।
मध्य एशिया के साथ भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिशों के बीच चाबहार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत में इसके संचालन और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की नजर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है। ऐसे में समुद्री मार्गों में किसी तरह की लंबी रुकावट भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है।
मोदी और पेजेशकियान के बीच बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा भी अहम हो सकता है। हालांकि, बैठक की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पेजेशकियान ने कहा- ईरान युद्ध नहीं चाहता
मोदी से मुलाकात से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ बढ़े तनाव के बीच कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। अमेरिकी हमलों के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऐसे में भारत की कोशिश लगातार क्षेत्रीय तनाव को कम करने और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर देने की रही है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
इस मार्ग पर तनाव बढ़ने का असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। भारत के लिए भी यह मार्ग रणनीतिक महत्व रखता है।
अमेरिकी ड्रोन को गिराने का ईरान का दावा
इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।
ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि ईरानी एयर डिफेंस ने मिसाइल से अमेरिकी लंबी दूरी के ड्रोन को निशाना बनाया। IRGC ने दावा किया कि ड्रोन को होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर कार्रवाई कर गिराया गया।
इस घटना से क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका है। हालांकि, ड्रोन गिराए जाने के ईरानी दावे से जुड़ी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी फिलहाल सीमित है।
SCO में भारत की बढ़ती सक्रियता
प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। SCO की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में संगठन में शामिल हुए।
SCO के मंच पर भारत मध्य एशिया के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, पर्यटन और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
मुलाकात के बाद आगे क्या?
मोदी-पेजेशकियान मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। भारत के लिए चुनौती एक तरफ अपने रणनीतिक और ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखना है, तो दूसरी तरफ क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशों को आगे बढ़ाना भी है।
चाबहार पोर्ट, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और मध्य एशिया से कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे आने वाले समय में भारत-ईरान संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
