
इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के किनारे बसेंगे नए औद्योगिक क्षेत्र, निवेश और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। योजना के तहत विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के गठन, भूमि चयन और निवेश केंद्रों की पहचान पर काम किया जाएगा। आष्टा और धरमपुरा की औद्योगिक परियोजनाएं भी इस रणनीति का हिस्सा हैं।

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मध्य प्रदेश में अब एक्सप्रेस-वे को केवल शहरों के बीच तेज आवाजाही का माध्यम नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास की धुरी बनाने की तैयारी है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित करीब 600 किलोमीटर लंबे मार्ग के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके जरिए उद्योगों के लिए जमीन, बेहतर परिवहन सुविधा और निवेश के नए अवसर उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई जा रही है।
इस योजना के तहत सड़क के किनारे ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार की मंशा है कि प्रमुख शहरों तक सीमित औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार दूसरे क्षेत्रों में भी हो, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
SPV कंपनी संभालेगी औद्योगिक क्षेत्रों की योजना
प्रस्तावित कॉरिडोर को विकसित करने के लिए विशेष प्रयोजन वाहन यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) गठित करने की योजना है। यह कंपनी एक्सप्रेस-वे के आसपास उपलब्ध जमीन, सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेगी।
भूमि चयन और अधिग्रहण से संबंधित अधिकारों को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और अलग-अलग स्थानों पर निवेश के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करना है।
प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी के गठन और आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। योजना के मुताबिक, मंजूरी के बाद एक वर्ष के भीतर यह तय करने का लक्ष्य रखा गया है कि एक्सप्रेस-वे के किन हिस्सों में नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जा सकते हैं।
धरमपुरा में 954 एकड़ का इंडस्ट्रियल पार्क
जबलपुर-भोपाल मार्ग से जुड़े औद्योगिक विकास की योजनाओं में धरमपुरा का मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क प्रमुख है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, यहां 954 एकड़ भूमि पर औद्योगिक पार्क विकसित किया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत 576 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस स्थान की अहमियत इसकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से भी जुड़ी है। दिए गए विवरण के अनुसार, धरमपुरा जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर, सिवनी से 156 किलोमीटर, नागपुर से 260 किलोमीटर और भोपाल से लगभग 297 किलोमीटर दूर स्थित है।
मल्टी-प्रोडक्ट पार्क का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयों के लिए आधार तैयार करना है। हालांकि, यहां कितनी इकाइयां स्थापित होंगी और कितने रोजगार पैदा होंगे, इसका आकलन परियोजना की प्रगति और निवेश प्रस्तावों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
आष्टा में विशाल औद्योगिक पार्क का प्रस्ताव
भोपाल-इंदौर मार्ग पर सीहोर जिले का आष्टा भी औद्योगिक विस्तार की योजना में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां लगभग 8,482 हेक्टेयर यानी करीब 21,000 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा बड़ियाखेड़ी और झीलेला में भी औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की योजना बताई गई है। भूमि संबंधी प्रस्ताव में लगभग 6,000 एकड़ सरकारी और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन के उपयोग के साथ 5,000 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण का उल्लेख है।
इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए भूमि की उपलब्धता, अधिग्रहण की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं और निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप आगे की कार्रवाई जरूरी होगी। अंतिम क्षेत्रफल और परियोजना की रूपरेखा संबंधित स्वीकृतियों के बाद स्पष्ट होगी।
निवेश के साथ रोजगार पर भी नजर
औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने के पीछे प्रमुख उद्देश्य परिवहन और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना है। एक्सप्रेस-वे के माध्यम से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान होने पर उद्योगों की परिचालन लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इसके साथ परिवहन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, मरम्मत और अन्य सहायक सेवाओं में कारोबार बढ़ने की संभावना रहेगी।
हालांकि, निवेश और रोजगार के वास्तविक आंकड़े इस बात पर निर्भर करेंगे कि कितनी जमीन विकसित होती है, कितनी औद्योगिक इकाइयां आती हैं और परियोजनाओं को पूरा होने में कितना समय लगता है।
कैबिनेट के एजेंडे में दूसरे प्रस्ताव भी
औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्तावों के अलावा कैबिनेट में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं से संबंधित मुद्दे भी विचार के लिए रखे जाने की जानकारी है।
निवाड़ी, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालयों की स्थापना और आवश्यक पदों की स्वीकृति से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं।
वहीं, सांदीपनि स्कूलों की बसों का किराया तय करने की व्यवस्था में बदलाव पर भी विचार किया जाना है। प्रस्ताव के अनुसार, किराया निर्धारित करने का अधिकार राज्य स्तर के बजाय कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति को दिया जा सकता है। उपलब्ध विवरण में 19 जिलों में बस ऑपरेटरों की कमी के कारण लगभग 1.5 लाख विद्यार्थियों को हो रही परेशानी का भी उल्लेख है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने से जुड़े प्रस्ताव भी विचाराधीन बताए गए हैं। इन सभी विषयों पर अंतिम स्थिति संबंधित कैबिनेट निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब फैसले और क्रियान्वयन पर नजर
इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना प्रदेश में निवेश का नया भूगोल तैयार कर सकती है। लेकिन इसकी सफलता केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होगी। जमीन की उपलब्धता, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, बिजली-पानी, निवेशकों की भागीदारी और समयबद्ध क्रियान्वयन की भूमिका भी अहम होगी।
फिलहाल योजना का अगला महत्वपूर्ण चरण कैबिनेट की मंजूरी, SPV का गठन और संभावित औद्योगिक स्थलों की पहचान है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तावित कॉरिडोर प्रदेश के किन क्षेत्रों में उद्योगों और रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा।

