सिंहस्थ 2028 में स्टेशन पर सीधे नहीं पहुंचेंगे श्रद्धालु, उज्जैन में 7 जगह बनेंगे होल्डिंग एरिया
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए रेलवे ने अभी से व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। श्रद्धालुओं को जरूरत के मुताबिक पहले अलग-अलग होल्डिंग एरिया में रोका जाएगा और स्थिति सामान्य होने पर चरणबद्ध तरीके से मुख्य स्टेशन की ओर भेजा जाएगा।

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सिंहस्थ 2028 में उज्जैन पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को रेलवे स्टेशन तक एक साथ पहुंचने से रोकने की तैयारी शुरू हो गई है। पश्चिम रेलवे ने इसके लिए उज्जैन स्टेशन के आसपास के साथ-साथ चिंतामन गणेश, पंवासा, पिंगलेश्वर और विक्रमनगर स्टेशनों पर भी होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना बनाई है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं को पहले इन्हीं स्थानों पर रोका जाएगा और मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होने के बाद आगे भेजा जाएगा।
इस व्यवस्था का मकसद प्लेटफार्म, प्रवेश-निकास गेट और स्टेशन के आसपास अचानक बनने वाली भीड़ को नियंत्रित करना है। रेलवे की तैयारी सिर्फ यात्रियों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि होल्डिंग एरिया में जरूरी यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है।
तीन दिशाओं से संभाली जाएगी उज्जैन स्टेशन की भीड़
उज्जैन स्टेशन पर माधवनगर, नीलगंगा और इंदौरगेट की ओर होल्डिंग एरिया तैयार किए जा रहे हैं। इन जगहों पर रेलवे के पुराने क्वार्टरों को हटाने का काम शुरू हो चुका है।
सिंहस्थ के दौरान यदि मुख्य स्टेशन पर भीड़ क्षमता से ज्यादा होती है तो यात्रियों की आवाजाही को इन क्षेत्रों में नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे स्टेशन के प्लेटफार्म और प्रवेश-निकास मार्गों पर अचानक बनने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
पुराने क्वार्टरों की जगह मिलेंगी यात्री सुविधाएं
होल्डिंग एरिया में श्रद्धालुओं को सिर्फ इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेलवे यहां वाशरूम, पेयजल और टिकट विंडो जैसी सुविधाएं विकसित कर रहा है। ट्रेनों के आवागमन से जुड़ी जानकारी देने के लिए यात्री सूचना व्यवस्था भी रखी जाएगी।
योजना यह है कि स्टेशन पर भीड़ की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं को कुछ समय इन क्षेत्रों में रोका जाए। जैसे ही मुख्य स्टेशन पर जगह और आवाजाही सामान्य होगी, उन्हें चरणबद्ध तरीके से स्टेशन की ओर भेजा जाएगा।
चार और स्टेशनों पर भी बनेगी भीड़ प्रबंधन व्यवस्था
उज्जैन स्टेशन के अलावा चिंतामन गणेश, पंवासा, पिंगलेश्वर और विक्रमनगर रेलवे स्टेशनों को भी सिंहस्थ की भीड़ के लिए तैयार किया जा रहा है।
इन स्टेशनों का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाएगा। यानी सिंहस्थ के दौरान पूरा दबाव सिर्फ उज्जैन मुख्य स्टेशन पर रखने के बजाय अलग-अलग रेलवे स्टेशनों और होल्डिंग पॉइंट्स के जरिए भीड़ को बांटने की तैयारी है।
उज्जैन स्टेशन पर 217 CCTV कैमरों से नजर
भीड़ प्रबंधन के साथ सुरक्षा और निगरानी पर भी रेलवे ने फोकस बढ़ाया है। उज्जैन सहित आठ रेलवे स्टेशनों पर कुल 753 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें उज्जैन रेलवे स्टेशन पर अकेले 217 कैमरे लगाए जाने हैं।
स्टेशन पर केंद्रीयकृत कंट्रोल-कम-सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम बनाया जाएगा। यहां से प्लेटफार्म, प्रवेश-निकास मार्ग और भीड़ वाले इलाकों पर नजर रखी जा सकेगी।
घोषणा और यात्री सूचना सिस्टम भी होगा मजबूत
सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में यात्रियों के आने को देखते हुए रेलवे यात्री सूचना प्रणाली को भी मजबूत कर रहा है। ट्रेन से जुड़ी जानकारी समय पर यात्रियों तक पहुंचाने के लिए उद्घोषणा व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।
इसके साथ ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि निगरानी और यात्री सूचना से जुड़ी व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से काम कर सकें।
माधवनगर स्टेशन की बदलेगी तस्वीर
सिंहस्थ की तैयारियों में रेलवे स्टेशन परिसर के सौंदर्यीकरण को भी शामिल कर रहा है। माधवनगर स्टेशन के भवन पर आकर्षक पेंटिंग बनाई जा रही है।
रेलवे का फोकस सिर्फ भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं, बल्कि स्टेशन और आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने पर भी है। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को उज्जैन पहुंचते ही बेहतर और व्यवस्थित माहौल मिले, इसके लिए स्टेशन स्तर पर कई काम किए जा रहे हैं।
