
पाकिस्तान के आईपी से चल रहा था नौकरी ठगी का नेटवर्क, ₹19.16 लाख की धोखाधड़ी में मुरैना से दो गिरफ्तार
हरदोई साइबर पुलिस का दावा: ठगों के इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप नंबरों से जुड़ा आईपी पाकिस्तान का मिला। पुलिस ने साफ किया कि इससे आरोपियों की लोकेशन साबित नहीं होती।

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हरदोई/मुरैना। विदेश में नौकरी का झांसा देकर एक युवक से ₹19.16 लाख ठगने के मामले में हरदोई साइबर थाना पुलिस ने दो आरोपियों को मध्य प्रदेश के मुरैना से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों से संपर्क करते थे। जांच में सामने आया है कि वे जिन इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप नंबरों का इस्तेमाल करते थे, उनसे जुड़ा आईपी एड्रेस पाकिस्तान का है।
क्या है मामला
मल्लावां के रहने वाले मसजूद अली ने 20 नवंबर 2025 को हरदोई साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन देखकर उनकी बात मोहम्मद उमर और मोहम्मद अली नाम के लोगों से हुई। नौकरी की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे मांगे गए। इस तरह छह बैंक खातों में कुल ₹19.16 लाख जमा करा लिए गए। पैसे देने के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
बैंक खातों से आरोपियों तक
साइबर थाना निरीक्षक राजेश शर्मा की टीम ने क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम अनिल सिंह की निगरानी में जांच शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले उन छह बैंक खातों को खंगाला, जिनमें रकम डलवाई गई थी। इनमें से चार खाताधारकों तक पुलिस पहुंची। पूछताछ में इन्होंने कथित तौर पर बताया कि आगरा के हरि पर्वत निवासी योगराज उर्फ जॉनी और फिरोजाबाद निवासी आदिल ने उनके खातों में पैसा डलवाया था।
इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से दोनों की गतिविधियों का पता लगाया। ठिकाने की पुष्टि होने पर टीम ने मुरैना में छापा मारा। शुक्रवार रात की इस कार्रवाई में योगराज और आदिल पकड़े गए।
क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने दोनों के पास से करीब ₹35,670 नकद और कथित ठगी में इस्तेमाल हुए छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन फोन से सोशल मीडिया खातों, संपर्कों और संभावित लेनदेन के अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के आईपी का दावा, पर सीमाएं भी
सीओ साइबर क्राइम अनिल सिंह के मुताबिक, आरोपियों के इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप नंबरों से जुड़े आईपी एड्रेस की तकनीकी जांच कराई गई। अब तक की जांच में यह आईपी पाकिस्तान का पाया गया है।
यहां एक तकनीकी बात समझना जरूरी है। किसी आईपी एड्रेस का पाकिस्तान से जुड़ा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि आरोपी या नेटवर्क चलाने वाले पाकिस्तान में मौजूद थे। इसके लिए दूसरे तकनीकी और जांच संबंधी सबूतों का मिलान जरूरी है। पुलिस इसी आधार पर नेटवर्क के संचालन का तरीका परख रही है।
अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है पुलिस
मुरैना के श्यामगढ़ थाना क्षेत्र की पुलिस इस मामले में आठ अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। हरदोई पुलिस अब इन बिंदुओं की जांच कर रही है:
आरोपियों ने कुल कितने लोगों को विदेश में नौकरी का झांसा दिया
छह बैंक खातों का इस्तेमाल किस मकसद से हुआ
ठगी की रकम आगे किन खातों में गई
रकम का अंतिम लाभार्थी कौन है
ऐसी ठगी से कैसे बचें
यह मामला सोशल मीडिया पर आने वाले विदेशी नौकरी के विज्ञापनों के खतरे को दिखाता है। ऐसे विज्ञापन देखकर संपर्क करने वालों को नौकरी की पेशकश, वीजा प्रक्रिया और नियुक्ति की शर्तों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति या संस्था के कहने पर अलग-अलग खातों में बड़ी रकम जमा करने से पहले कंपनी, भर्ती एजेंसी और नियोक्ता की प्रामाणिकता जांचना जरूरी है।
