9 दिन बैंक बंद? 7 हजार शाखाएं और 40 हजार कर्मचारी क्यों रहेंगे छुट्टी पर? सितंबर में क्या होने वाला है?
मध्य प्रदेश में सितंबर के दौरान दो चरणों में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल और साप्ताहिक छुट्टियों के कारण बैंकिंग कामकाज प्रभावित होने वाला है। 40 हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे और करीब 7 हजार शाखाओं में कैश जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और KYC जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

Audio tools for this article
अगर आपको सितंबर में बैंक जाकर कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तारीख जरूर देख लें। मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल और छुट्टियों के कारण पूरे महीने में 9 दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहने की स्थिति बन रही है।
करीब 40 हजार बैंककर्मियों के हड़ताल पर जाने से राज्य की लगभग 7 हजार शाखाओं पर असर पड़ सकता है। खासकर कैश जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, KYC और लॉकर जैसी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
दो चरणों में प्रभावित होगा बैंकिंग कामकाज
बैंकिंग सेवाओं पर पहला असर 11 सितंबर से शुरू होगा। इस दिन हड़ताल प्रस्तावित है और इसके बाद 12 व 13 सितंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी।
दूसरे चरण में 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टी के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल प्रस्तावित है।
इस तरह हड़ताल और नियमित छुट्टियों को मिलाकर सितंबर में कुल 9 दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहने की स्थिति बनेगी।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में होने वाले रोजमर्रा के कई काम प्रभावित हो सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से:
कैश जमा और निकासी
चेक क्लियरेंस
KYC से जुड़े काम
लॉकर सेवाएं
शाखा स्तर पर होने वाले अन्य बैंकिंग कार्य
हालांकि डिजिटल बैंकिंग और ATM जैसी सेवाओं की स्थिति अलग हो सकती है।
5-डे बैंकिंग वीक क्यों मांग रहे कर्मचारी?
बैंक यूनियन लंबे समय से पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग कर रही हैं। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है।
यूनियन चाहती है कि हर शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज का समय करीब 40 मिनट बढ़ाने का प्रस्ताव है।
यानी कर्मचारियों का तर्क है कि शनिवार की छुट्टी की भरपाई सप्ताह के पांच कार्यदिवसों में अतिरिक्त कामकाजी समय से की जा सकती है।
PLI योजना भी बनी विवाद की वजह
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की प्रमुख मांगों में 5-डे बैंकिंग वीक के साथ स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू PLI योजना को वापस लेना भी शामिल है।
यूनियन का आरोप है कि नई PLI व्यवस्था कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ा सकती है और अधिकारियों के एक सीमित वर्ग को अपेक्षाकृत ज्यादा प्रोत्साहन राशि का लाभ दे सकती है।
पेंशन और भर्ती के मुद्दे भी उठाए
बैंक यूनियनों का कहना है कि केवल 5-डे बैंकिंग वीक ही नहीं, बल्कि कई दूसरे मुद्दे भी लंबे समय से लंबित हैं।
इनमें पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, NPS को OPS में बदलना और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान DA व्यवस्था जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की पर्याप्त भर्ती तथा ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत सीमा बढ़ाने की मांग भी यूनियन उठा रही है।
सरकार से बातचीत के बाद तय होगा अगला कदम
बैंक संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को नई दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है। यूनियनों की मांगों पर बातचीत सकारात्मक रहती है तो आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
वहीं, समाधान नहीं निकलने की स्थिति में हड़ताल जारी रखने का फैसला किया जाएगा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 27 अगस्त को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन और आगे बैंक हड़तालों का आह्वान किया था।
यूनियन को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा का आरोप है कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि अन्य लंबित मांगों के समाधान के बिना वेतन संशोधन समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।