660 कैमरे और ट्रैफिक जवान फिर भी नियमों की धज्जियां क्यों? हाईकोर्ट ने प्रशासन से मांगा जवाब
इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट के सामने ही बिना नंबर और गलत नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के चलने, हूटर-सायरन के इस्तेमाल और लगातार जाम की स्थिति पर नाराजगी जताई गई। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

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इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए निगरानी का पूरा इंतजाम होने के प्रशासन के दावे के बावजूद सड़कों पर नियमों का उल्लंघन जारी है। यही सवाल अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के सामने भी खड़ा हो गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि मैदानी स्तर पर ट्रैफिक व्यवस्था में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप भट्ट और न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने की। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
660 कैमरे और जवानों की तैनाती, फिर भी हालात जस के तस
पिछली सुनवाई के आदेश के तहत प्रशासन से शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों और प्रमुख चौराहों पर तैनात ट्रैफिक जवानों की जानकारी शपथपत्र के जरिए मांगी गई थी।
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इंदौर के चौराहों पर 660 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक जवानों की तैनाती की गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जमीनी तस्वीर इससे अलग है।
कोर्ट के सामने ही टूट रहे ट्रैफिक नियम
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शहर में चल रही गाड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि गलत नंबर प्लेट और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं।
हूटर और सायरन लगी गाड़ियों के इस्तेमाल पर भी कोर्ट ने सवाल किया। खास बात यह रही कि कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के सामने तक ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं हो रहा।
कोर्ट की नाराजगी सिर्फ नियम तोड़ने तक सीमित नहीं रही। लगातार चालान किए जाने के बावजूद अगर जाम और उल्लंघन की स्थिति बनी हुई है, तो केवल चालानी कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
याचिकाकर्ता बोले- सिर्फ चालान से नहीं सुधरेगा ट्रैफिक
याचिकाकर्ता महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता अनस मकरानी ने पिछली सुनवाई के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उनका कहना था कि शहर के कई हिस्सों में आज भी ट्रैफिक व्यवस्था खराब है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन का फोकस मुख्य रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान पर दिखाई देता है, जबकि शहर की व्यापक ट्रैफिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
भारी वाहनों की एंट्री पर भी हाईकोर्ट सख्त
सुनवाई में भारी वाहनों के शहर में प्रवेश का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि दिन के समय भारी वाहनों की एंट्री को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था लागू है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए दिन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक से जुड़ा मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इंदौर में ऐसी प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
सरकार ने इस मुद्दे पर जवाब पेश करने के लिए समय मांगा है। अगली सुनवाई में प्रशासन को इस संबंध में अपना पक्ष रखना होगा।
ट्रैफिक से जुड़े छह से ज्यादा मामले लंबित
इंदौर की यातायात व्यवस्था से जुड़े छह से अधिक मामले हाईकोर्ट में लंबित बताए गए हैं। इनमें ट्रैफिक प्रबंधन, नियमों का पालन, यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों की आवाजाही जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अब प्रशासन के सामने सिर्फ कैमरों और जवानों की संख्या बताने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह भी बताना होगा कि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक असर सड़कों पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा।