इंदौर-धार के 24 मंदिरों में बदलेगी व्यवस्था, धार्मिक स्वरूप से छेड़छाड़ पर रोक; आय-दान का भी बनेगा पूरा रिकॉर्ड
इंदौर संभाग के 24 मंदिरों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की समीक्षा के बाद संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने कई अहम निर्देश दिए हैं। इंदौर के 7 और धार के 17 मंदिरों में प्रबंधन समितियों की बैठक, प्रबंधक नियुक्ति और भंडार के सत्यापन की प्रक्रिया तय की गई है। जीर्णोद्धार के दौरान मंदिरों के मूल धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

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इंदौर संभाग के सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में अब सिर्फ निर्माण और सौंदर्यीकरण पर ही जोर नहीं रहेगा, बल्कि उनकी रोजमर्रा की व्यवस्था और संपत्तियों के हिसाब-किताब को भी व्यवस्थित किया जाएगा। संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने इंदौर और धार के 24 मंदिरों की समीक्षा के दौरान प्रबंधन से जुड़े कामों के लिए समयसीमा तय की है।
इनमें इंदौर के 7 और धार जिले के 17 मंदिर शामिल हैं। अधिकारियों को मंदिर प्रबंधन समितियों की बैठक कराने, प्रत्येक मंदिर के लिए प्रबंधक नियुक्त करने और भंडार का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास को लेकर रहा। संभागायुक्त ने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य के दौरान मंदिर का मूल धार्मिक स्वरूप और उसका महत्व प्रभावित नहीं होना चाहिए।
15 दिन में मंदिर समितियों की बैठक
संभागायुक्त ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अगले 15 दिनों के भीतर संबंधित मंदिर प्रबंधन समितियों की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
इन बैठकों के जरिए मंदिरों की मौजूदा व्यवस्था, विकास कार्य और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक मंदिर के लिए प्रबंधक नियुक्त करने को भी कहा गया है, ताकि जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जा सके।
भंडार का 10 दिन में होगा सत्यापन
मंदिरों में मौजूद भंडार को लेकर भी प्रशासन ने समयसीमा तय की है। अधिकारियों को 10 दिन के भीतर भंडार का भौतिक सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही दान में मिलने वाली बहुमूल्य वस्तुओं की सूची तैयार की जाएगी। इन वस्तुओं का संभावित मूल्य भी दर्ज किया जाएगा और उनके सुरक्षित भंडारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
दान और रोज की आय-व्यय का हिसाब रहेगा दर्ज
बैठक में मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए गए। मंदिरों को मिलने वाली दान राशि और दैनिक आय-व्यय का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया।
मंदिरों की जमीन और अन्य संपत्तियों के प्रबंधन के साथ श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं पर भी ध्यान देने को कहा गया है। यानी विकास योजना में निर्माण के साथ प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को भी शामिल किया गया है।
गोपाल मंदिर में गीता भवन और दुकानों पर फोकस
इंदौर के गोपाल मंदिर में नवनिर्मित गीता भवन के संचालन की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए गए। यहां दर्शनार्थियों के बैठने और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
गोपाल मंदिर कॉम्प्लेक्स में आवंटित दुकानों की रजिस्ट्री जल्द पूरी करने और बाकी दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
नर्मदा के बीच बिलवामृतेश्वर मंदिर में 5.50 करोड़ के काम
धार के धरमपुरी में नर्मदा नदी के बीच स्थित बिलवामृतेश्वर मंदिर के विकास कार्य की भी समीक्षा की गई। यहां वर्ष 2025 से निर्माण कार्य चल रहा है।
करीब 5.50 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर परिसर में बाउंड्रीवाल, संत निवास, शौचालय और अन्य सुविधाओं से जुड़े निर्माण किए जा रहे हैं। संभागायुक्त ने इन कामों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
विकास होगा, लेकिन धार्मिक पहचान के साथ
समीक्षा बैठक का सबसे अहम संदेश यही रहा कि मंदिरों का विकास उनकी मूल पहचान को बदलकर नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने जीर्णोद्धार और नए निर्माण में धार्मिक स्वरूप तथा मंदिरों के महत्व को बनाए रखने पर स्पष्ट जोर दिया है।
अब 24 मंदिरों में प्रबंधन समितियों की बैठक, भंडार सत्यापन और प्रबंधक नियुक्ति जैसे काम तय समय में पूरे करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।