बच्चों की चीख सुन दौड़ी महिला पुलिसकर्मी, झाड़ियों में बिजली के तार से चिपका मिला 6 साल का मासूम; बचाई जान
ड्यूटी से घर लौटने के बाद महिला पुलिसकर्मी निकिता जोशी ने बच्चों की चीख सुनकर मंदिर परिसर के पीछे पहुंचकर करंट की चपेट में आए छह साल के बच्चे की जान बचाई। बच्चे के हाथ में बिजली का तार चिपका था। निकिता ने उसे तार से अलग कर स्वजन की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।

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इंदौर में सोमवार शाम एक महिला पुलिसकर्मी की सतर्कता ने छह साल के बच्चे की जान बचा ली। ड्यूटी खत्म कर घर पहुंच चुकी निकिता जोशी ने पास के मंदिर परिसर से बच्चों की चीख सुनी। आवाज में घबराहट थी, इसलिए वह तुरंत वहां पहुंचीं।
मंदिर के पीछे झाड़ियों में एक बच्चा अचेत पड़ा था। उसके हाथ में बिजली का तार चिपका हुआ था। बच्चा कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। खतरा समझते ही निकिता ने सावधानी से बच्चे को तार से अलग किया।
कुछ देर बाद बच्चे ने आंखें खोलीं और घबराते हुए उनसे अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई।
मंदिर के पीछे झाड़ियों में पड़ा था बच्चा
निकिता जोशी डीसीपी जोन-2 कार्यालय में पदस्थ हैं। सोमवार शाम ड्यूटी खत्म करने के बाद वह अपने घर पहुंची थीं। इसी दौरान घर के सामने स्थित मंदिर परिसर से बच्चों के चिल्लाने की आवाज लगातार आ रही थी।
निकिता आवाज सुनकर मंदिर की तरफ गईं। आसपास तलाश करने पर मंदिर के पीछे झाड़ियों में करीब छह साल का बच्चा जमीन पर दिखाई दिया।
बच्चा अचेत था और उसके हाथ में बिजली का तार था। मौके की स्थिति देखकर निकिता ने पहले बच्चे को करंट के संपर्क से बाहर किया।
तार हटते ही बच्चे ने मांगी मदद
बिजली का तार हटाने के कुछ ही समय बाद बच्चे ने आंखें खोलीं। वह डरा हुआ था और निकिता से कहने लगा, “दीदी, मुझे अस्पताल ले चलो, नहीं तो मैं मर जाऊंगा।”
बच्चे की हालत को देखते हुए निकिता ने उसके स्वजन को सूचना दी। इसके बाद परिवार की मदद से उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
समय पर इलाज मिलने से बची जान
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे का उपचार शुरू किया। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उसकी हालत में सुधार हुआ और उसकी जान बच गई।
करंट लगने के बाद बच्चा जिस हालत में मिला था, उसमें थोड़ी देर और हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। मंदिर के पीछे झाड़ियों में होने के कारण बच्चे तक मदद पहुंचने में भी समय लग सकता था।
परिवार ने महिला पुलिसकर्मी का जताया आभार
घटना के बाद बच्चे के स्वजन ने निकिता जोशी का आभार जताया। परिवार के मुताबिक, अगर उन्होंने बच्चों की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचने में तत्परता नहीं दिखाई होती तो बच्चे को समय पर मदद मिलना मुश्किल हो सकता था।
यह घटना पुलिस की ड्यूटी के एक दूसरे पहलू को भी सामने लाती है। वर्दी में हो या ड्यूटी खत्म होने के बाद, किसी की जान खतरे में देखकर मदद के लिए आगे आना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है।