DAVV में नकल जांच का नया पेंच, महीनों बंद रहने से जब्त मोबाइल की बैटरी हो रही खत्म; अब तुरंत होगी डिजिटल जांच
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में परीक्षा के दौरान जब्त किए जाने वाले मोबाइल अब नकल जांच की प्रक्रिया में ही परेशानी खड़ी कर रहे हैं। महीनों तक रिकॉर्ड में पड़े रहने से फोन की बैटरी खत्म हो जाती है और डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित होती है। अब DAVV ने मोबाइल जब्त होते ही उसकी तकनीकी जांच के लिए अलग व्यवस्था बनाने का फैसला किया है।

Audio tools for this article
इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल पकड़ने के बाद अब एक नई तकनीकी दिक्कत सामने आ गई है। परीक्षा के दौरान छात्रों से जब्त किए गए मोबाइल जब तक जांच समिति तक पहुंचते हैं, तब तक कई फोन महीनों बंद पड़े रहते हैं। नतीजा यह कि उनकी बैटरी खत्म हो जाती है और मोबाइल में मौजूद जानकारी की जांच करना मुश्किल हो जाता है।
इस देरी का असर नकल प्रकरण के फैसले पर भी पड़ रहा है। कई बार सिर्फ परीक्षा कक्ष में मोबाइल मिलना और उससे वास्तव में नकल करना, दोनों के बीच फर्क साबित करना आसान नहीं होता। इसी समस्या को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय अब मोबाइल की जांच के तरीके में बदलाव करने जा रहा है।
मोबाइल जब्त होने के बाद महीनों तक रहता है रिकॉर्ड में
परीक्षा के दौरान किसी छात्र के पास मोबाइल मिलने पर उड़नदस्ता या परीक्षा केंद्राध्यक्ष उसे जब्त कर नकल प्रकरण दर्ज करता है। इसके बाद फोन विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में जमा हो जाता है और मामला अनफेयर मीन्स कमेटी तक पहुंचता है।
यहीं से जांच में समय लगने की समस्या सामने आती है। जब तक समिति मोबाइल की जांच शुरू करती है, कई बार फोन लंबे समय से बंद पड़ा होता है। बैटरी खत्म होने के कारण उसे चालू करने में ही परेशानी आने लगती है।
सिर्फ मोबाइल मिलना नकल का पूरा सबूत नहीं
विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह तय करने की है कि परीक्षा के दौरान छात्र ने मोबाइल का इस्तेमाल किस तरह किया था।
क्या फोन सिर्फ अपने पास रखा गया था या उससे परीक्षा के सवालों के जवाब तलाशे गए? क्या उसमें परीक्षा से संबंधित सामग्री मौजूद थी? इन सवालों का जवाब मोबाइल की तकनीकी जांच से मिल सकता है।
लेकिन फोन लंबे समय तक बंद रहने से जांच में देरी होती है और डिजिटल सामग्री तक तत्काल पहुंच नहीं हो पाती। इससे कुछ मामलों में कार्रवाई तय करने की प्रक्रिया भी लंबी हो जाती है।
अब जब्त होते ही होगी मोबाइल की जांच
इस समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने नई व्यवस्था को मंजूरी दी है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के मुताबिक, मोबाइल से जुड़े नकल मामलों की जांच के लिए अलग समिति बनाई जाएगी।
यह समिति फोन जब्त होने के बाद ही उसकी तकनीकी जांच शुरू करेगी। यानी मोबाइल को महीनों तक सिर्फ रिकॉर्ड में रखे रहने के बजाय उसमें मौजूद डिजिटल जानकारी को शुरुआती स्तर पर ही सुरक्षित और जांचा जाएगा।
इससे परीक्षा के दौरान मोबाइल के इस्तेमाल से जुड़े तथ्य जल्दी सामने आने की उम्मीद है।
हर साल करीब 300 नकल प्रकरण
DAVV में हर साल करीब 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की होती है, जिनमें छात्रों के पास मोबाइल फोन मिलने पर उन्हें जब्त किया जाता है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों को जल्द निपटाना है। समय रहते डिजिटल साक्ष्य की जांच होने पर समिति के लिए यह तय करना आसान होगा कि मामला कितना गंभीर है और छात्र के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नकल प्रकरणों की जांच कितनी तेजी से होती है और डिजिटल सबूतों के आधार पर फैसले लेने में कितना बदलाव आता है।