DAVV में कम नंबर पर RTI से कॉपियां निकलवा रहे छात्र, 700 जांचीं तो सिर्फ 8-10 के नतीजे बदले
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में कम अंक आने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी RTI के जरिए अपनी उत्तरपुस्तिकाएं निकलवा रहे हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक करीब 700 कॉपियों की जांच हो चुकी है, लेकिन केवल 8 से 10 मामलों में परिणाम बदला। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से उत्तरों के समर्थन में प्रमाणित किताबें और अध्ययन सामग्री मांगी है।

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परीक्षा में कम नंबर आने के बाद अब DAVV के विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिकाएं RTI के जरिए निकलवाकर खुद जांच रहे हैं। मकसद यह पता लगाना है कि कॉपी में लिखे जवाब और दिए गए अंकों के बीच कहीं गलती तो नहीं हुई।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मुताबिक अब तक करीब 700 उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच की जा चुकी है। लेकिन इन सभी मामलों में गड़बड़ी नहीं मिली। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार सिर्फ 8 से 10 विद्यार्थियों के परिणाम में बदलाव हुआ है।
कॉपी में लिखे जवाब पर उठ रहे सवाल
उत्तरपुस्तिका देखने के बाद कुछ विद्यार्थी मूल्यांकन में दिए गए अंकों पर आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जिन किताबों, कुंजी, परीक्षा बोध या दूसरी अध्ययन सामग्री से तैयारी की थी, उनमें उन्हीं सवालों के अलग उत्तर दिए गए हैं।
ऐसी आपत्तियों पर विश्वविद्यालय अब सिर्फ विद्यार्थी के दावे के आधार पर फैसला नहीं कर रहा। अधिकारियों ने संबंधित उत्तर के प्रमाण के तौर पर वही किताब या अध्ययन सामग्री पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर विद्यार्थी ने परीक्षा में जवाब लिखा था।
सिर्फ गाइड दिखाने से नहीं मानी जाएगी आपत्ति
DAVV के अधिकारियों के मुताबिक सामान्य कुंजी या गाइड के आधार पर उत्तर को सही साबित करने का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थी को उस पुस्तक का प्रमाणित संस्करण प्रस्तुत करना होगा, जिसके आधार पर वह अपने उत्तर को सही बता रहा है। इसके लिए ISBN नंबर वाला संस्करण मांगा जा रहा है।
यानी विश्वविद्यालय यह देखना चाहता है कि परीक्षा में लिखे गए उत्तर का आधार किसी मान्य और प्रमाणित स्रोत में मौजूद है या नहीं।
700-800 में करीब 50 छात्र ही दे पाए स्रोत
DAVV के एग्जाम कंट्रोलर अशेष तिवारी के मुताबिक उत्तरपुस्तिकाओं पर आपत्ति जताने वाले करीब 700 से 800 विद्यार्थियों में से लगभग 50 ही ऐसे थे, जो अपने उत्तर के समर्थन में संबंधित किताब या अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा पाए।
बाकी विद्यार्थी उस स्रोत को प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके आधार पर उन्होंने परीक्षा में उत्तर लिखने का दावा किया था।
विश्वविद्यालय का कहना है कि अब तक जिन कॉपियों की जांच हुई है, उनमें अधिकांश में मूल्यांकन और बाद में किया गया पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक पाया गया।
AI और डिजिटल पढ़ाई से बदल रहा पढ़ने का तरीका
DAVV अधिकारियों के मुताबिक विद्यार्थियों के पढ़ने के तरीके में भी बदलाव आया है। किताबों के साथ AI, डिजिटल प्लेटफॉर्म और दूसरी ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
इससे एक नई स्थिति सामने आ रही है, जहां विद्यार्थी परीक्षा में लिखे उत्तर को डिजिटल या वैकल्पिक स्रोत से मिली जानकारी के आधार पर सही मान रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय के मूल्यांकन में स्थिति अलग हो सकती है।
RTI के जरिए कॉपी देखने पर विद्यार्थियों को यह भी पता चल रहा है कि उन्होंने वास्तव में क्या लिखा और परीक्षक ने उसका मूल्यांकन किस आधार पर किया।
कॉलेजों को प्रमाणित सामग्री पर जोर देने के निर्देश
इस पूरे मामले के बाद DAVV ने कॉलेज प्राचार्यों को भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने को कहा है। विश्वविद्यालय का जोर है कि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रामाणिक और प्रमाणित अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल करें।
अधिकारियों के मुताबिक किसी उत्तर को परीक्षा में लिखने से पहले उसके स्रोत की विश्वसनीयता की पुष्टि करना जरूरी है। इससे परिणाम आने के बाद उत्तरपुस्तिका को लेकर होने वाली आपत्तियों और विवादों को भी कम किया जा सकता है।