दिवाली पर ‘5 हजार’ लोगों को मिलेगा मालिकाना हक, इंदौर में 16 गांव वालों का बड़ा फायदा
धनतेरस पर इंदौर के 16 गांवों के 5 हजार से अधिक परिवारों को स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक के दस्तावेज दिए जाएंगे। इसके लिए जिले में 10 विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। इंदौर में सर्वे के दौरान 95,089 लोगों की पहचान हुई थी, जिनमें से अब तक 32,537 लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र मिल चुके हैं।

इंदौर। वर्षों से अपनी ही जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हजारों परिवारों के लिए इस बार दिवाली खुशियों की सौगात लेकर आई है। अब तक जिन लोगों के पास अपनी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज नहीं था, उन्हें स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक मिलने जा रहा है। इंदौर जिले में धनतेरस के अवसर पर 5 हजार से अधिक परिवारों को स्वामित्व अधिकार पत्र सौंपने की तैयारी की गई है। इसके लिए जिले के 16 गांवों में 10 विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो दशकों से आबादी की जमीन पर रहने के बावजूद अपनी संपत्ति का कानूनी प्रमाण हासिल नहीं कर पाए थे।
16 गांवों में पहुंचेंगे अधिकारी, 10 स्थानों पर शिविर
स्वामित्व योजना के तहत इंदौर जिले में विशेष वितरण अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से दस स्थानों पर शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों में एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी आवश्यक दस्तावेजों तथा लैपटॉप के साथ मौजूद रहेंगे। पात्र परिवारों को मौके पर ही स्वामित्व अधिकार पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इस अभियान के तहत करीब 5 हजार परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रमों में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट सहित सांसद, राज्यसभा सदस्य और विधायक शामिल होंगे। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को दस्तावेज सौंपे जाएंगे।
40 साल से रह रहे थे, लेकिन जमीन का मालिकाना हक नहीं
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है, जो कई पीढ़ियों से आबादी क्षेत्र में रह रहे हैं। उनके मकान तो हैं, लेकिन जमीन के स्वामित्व का पुख्ता दस्तावेज नहीं है। ऐसी स्थिति में संपत्ति को बेचने, बैंक में गिरवी रखने या उसके आधार पर ऋण लेने में परेशानी आती रही है।
कई परिवारों के पास केवल पुराने सरकारी पट्टे या अन्य स्थानीय दस्तावेज मौजूद हैं। स्वामित्व अधिकार पत्र मिलने के बाद उन्हें अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार का प्रमाण मिलेगा। इससे संपत्ति संबंधी विवादों और आर्थिक जरूरतों के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
इंदौर में 95 हजार से अधिक लोगों की हुई थी पहचान
प्रशासनिक सर्वे के दौरान इंदौर जिले में आबादी की जमीन पर निवास करने वाले 95,089 लोगों की पहचान की गई थी। इसके बाद पात्र परिवारों को स्वामित्व अधिकार पत्र देने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, पटवारियों की हड़ताल के कारण अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई थी।
इसके बावजूद अब तक जिले में 32,537 लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र दिए जा चुके हैं। यह कुल चिह्नित संख्या का करीब 34.22 प्रतिशत है। अब धनतेरस पर होने वाले विशेष अभियान के जरिए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
योजना से संपत्ति के साथ आर्थिक सुरक्षा का रास्ता
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी आवासीय संपत्ति का आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध कराना है। इसके लिए ड्रोन और सर्वेक्षण तकनीक की मदद से आबादी क्षेत्रों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। पात्रता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित परिवारों को संपत्ति संबंधी दस्तावेज दिए जाते हैं।
मालिकाना हक का दस्तावेज मिलने से परिवारों को अपनी संपत्ति की पहचान और अधिकार स्थापित करने में मदद मिलती है। साथ ही बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
अब आगे कितने परिवारों तक पहुंचेगा लाभ?
इंदौर में अब तक 32,537 लोगों को अधिकार पत्र मिल चुके हैं, जबकि सर्वे में 95,089 लोगों की पहचान हुई थी। ऐसे में बड़ी संख्या में पात्र परिवारों तक अभी यह लाभ पहुंचना बाकी है। धनतेरस पर 5 हजार से अधिक परिवारों को दस्तावेज देने का अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शेष पात्र परिवारों के दस्तावेज तैयार करने और वितरण की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।



