स्वच्छता में नंबर-1 शहर, लेकिन सफाईकर्मियों के घर बदहाल! 2,012 फ्लैट... उखड़ रहा प्लास्टर!
इंदौर के बड़ा बांगड़दा और नैनोद स्थित JNNURM आवासों में प्लास्टर उखड़ने, दीवारों में दरारें और सीढ़ियों की खराब रेलिंग जैसी समस्याएं सामने आई हैं। करीब 2,012 फ्लैटों में परिवार रह रहे हैं। रहवासियों की समस्याओं को लेकर नगर निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर मरम्मत और निरीक्षण की मांग की गई है।

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जिस शहर की सफाई की मिसाल देशभर में दी जाती है, उसी इंदौर में शहर की स्वच्छता व्यवस्था संभालने वाले कई परिवार अपने ही घरों की हालत से परेशान हैं। बड़ा बांगड़दा और नैनोद की JNNURM मल्टियों में जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है, दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं और सीढ़ियों की रेलिंग तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
इन इमारतों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि मरम्मत और रखरखाव की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है। समस्याओं को लेकर पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। अब लहूजी शक्ति सेना मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अनिल साठे ने नगर निगम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर मल्टियों का निरीक्षण कराने और जरूरी मरम्मत कराने की मांग की है।
2 हजार से ज्यादा फ्लैट, हजारों लोगों का घर
नगर निगम के वार्ड क्रमांक 15, नया बसेरा-गांधी नगर क्षेत्र में JNNURM परियोजना के तहत बड़ा बांगड़दा और नैनोद में आवासीय मल्टियां बनाई गई हैं।
बड़ा बांगड़दा में करीब 1,012 फ्लैट हैं, जबकि नैनोद में लगभग 1,000 फ्लैट बताए गए हैं। यानी दोनों स्थानों को मिलाकर करीब 2,012 परिवारों के रहने की व्यवस्था है।
इतने बड़े आवासीय परिसर में यदि इमारतों के रखरखाव की अनदेखी होती है तो समस्या सिर्फ एक-दो परिवारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बड़ी आबादी प्रभावित होती है।
शहर साफ रखने वालों के घरों की हालत खराब
इन मल्टियों की एक खास बात यह भी है कि यहां बड़ी संख्या में नगर निगम के मस्टर कर्मचारी अपने परिवारों के साथ रहते हैं।
अनिल साठे के मुताबिक, दोनों मल्टियों में 700 से ज्यादा नगर निगम के मस्टर कर्मचारी और 800 से अधिक रेगपिकर्स, कचरा संग्रहण और स्वच्छता कार्य से जुड़े कर्मचारी रहते हैं।
यानी जिन लोगों की मेहनत से शहर की सफाई व्यवस्था चलती है, उनके अपने आवासों में ही बुनियादी मरम्मत का इंतजार बना हुआ है।
कहीं प्लास्टर उखड़ा, कहीं दीवारों में दरार
बड़ा बांगड़दा मल्टियों की स्थिति को लेकर ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं। यहां कई जगह दीवारों का प्लास्टर उखड़ने की बात कही गई है।
कुछ स्थानों पर दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं। सीढ़ियों की रेलिंग भी कई जगह क्षतिग्रस्त बताई गई है। इसके अलावा इमारतों में रंगाई-पुताई और दूसरे जरूरी सिविल रिपेयरिंग कार्य की जरूरत है।
रहवासियों का कहना है कि समय रहते इन कामों को कराया जाए तो छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी परेशानी में बदलने से रोकी जा सकती हैं।
शिकायतें पहले भी हुईं, अब निगम से निरीक्षण की मांग
मल्टियों की समस्याओं को लेकर नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को पहले भी जानकारी दिए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद मरम्मत का काम पूरी तरह नहीं हो सका।
अब ज्ञापन के जरिए नगर निगम कमिश्नर से दोनों परिसरों का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही इमारतों की स्थिति का आकलन कर जरूरी सिविल रिपेयरिंग और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग की गई है।
सवाल सिर्फ प्लास्टर का नहीं, सुरक्षा का भी है
मल्टियों में रहने वाले परिवारों के लिए उखड़ता प्लास्टर और दीवारों की दरारें सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं हैं। पुरानी या कमजोर होती संरचनाओं की समय पर जांच और मरम्मत जरूरी होती है, खासकर तब जब एक ही परिसर में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हों।
अब देखना होगा कि नगर निगम इन शिकायतों के बाद मौके का निरीक्षण कब करता है और मरम्मत को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।
