आठ बार नंबर-1 बनने के बाद अब इंदौर की नई परीक्षा! 50 मॉडल शहरों में शामिल होगा, कचरे से क्लीन एनर्जी तक बनेगा मिसाल
स्वच्छता में लगातार आठवीं बार देश में नंबर-1 रहे इंदौर को अब 50 मॉडल शहरों में शामिल किए जाने की तैयारी है। शहर को सिर्फ गार्बेज फ्री सिटी ही नहीं, बल्कि पर्यटन, धार्मिक विरासत, संस्कृति और स्वच्छ ऊर्जा के मॉडल के तौर पर विकसित करने की योजना है।

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इंदौर ने सफाई की ऐसी कहानी लिखी है, जिसे देश ने लगातार आठ बार नंबर-1 का तमगा देकर पहचाना। अब इस कहानी का अगला अध्याय और बड़ा होने जा रहा है।
देश में 50 ऐसे मॉडल शहर विकसित करने की तैयारी है, जिन्हें गार्बेज फ्री सिटी के तौर पर उदाहरण बनाया जाएगा। संभावित सूची में इंदौर का नाम प्रमुखता से सामने आया है। खास बात यह है कि इंदौर को सिर्फ कचरा मुक्त शहर बनाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसकी पहचान पर्यटन, धार्मिक विरासत, इतिहास, संस्कृति और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़कर एक व्यापक मॉडल तैयार किया जा सकता है।
यानी अब इंदौर की परीक्षा सिर्फ इस बात की नहीं होगी कि शहर कितना साफ है, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि सफाई से आगे बढ़कर शहर ने अपनी पूरी शहरी व्यवस्था को कितना बदला है।
सफाई की पहचान से मॉडल सिटी तक पहुंचा इंदौर
इंदौर की सबसे बड़ी ताकत उसका स्वच्छता मॉडल माना जाता है। घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर कचरे के अलग-अलग प्रबंधन और नागरिक भागीदारी तक शहर ने कई स्तरों पर ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं, जिन्हें देश के दूसरे शहरों में भी अपनाया गया है।
लगातार आठवीं बार स्वच्छता में नंबर-1 रहने के बाद अब इसी अनुभव को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी है।
प्रस्तावित मॉडल सिटी योजना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को चुना जा रहा है। इंदौर को इसमें शामिल किया जाता है तो यह उसके लिए सिर्फ एक और उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि अपने पूरे शहरी मॉडल को देश के सामने पेश करने का मौका होगा।
दिल्ली की बैठक में इंदौर ने दिखाई अपनी पूरी तस्वीर
गुरुवार को दिल्ली में हुई बैठक में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था और शहर में किए गए अलग-अलग नवाचारों की जानकारी दी।
केंद्र को सिर्फ सफाई से जुड़ी जानकारी नहीं दी गई, बल्कि सौर ऊर्जा और ऊर्जा साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे कामों का भी ब्यौरा साझा किया गया।
इससे साफ है कि प्रस्तावित मॉडल में शहर की रैंकिंग से आगे जाकर उसके विकास के अलग-अलग पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
अब कचरे के साथ पर्यटन भी बनेगा मॉडल की पहचान
इंदौर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित करने की संभावित योजना में शहर की दूसरी खूबियों को भी शामिल किया जा सकता है।
इंदौर की धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक गतिविधियां और आसपास के पर्यटन स्थल इसे दूसरे शहरों से अलग बनाते हैं।
अगर स्वच्छता के साथ इन क्षेत्रों को भी एक ही मॉडल में जोड़ा जाता है, तो इंदौर की तस्वीर सिर्फ साफ शहर की नहीं, बल्कि एक ऐसे शहर की बन सकती है जहां सफाई, पर्यटन और शहरी विकास साथ-साथ चलते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा पर भी देना होगा जवाब
मॉडल सिटी की दौड़ में एक और महत्वपूर्ण हिस्सा ऊर्जा का है।
इंदौर में सौर ऊर्जा और ऊर्जा साक्षरता को लेकर किए जा रहे कामों की जानकारी भी केंद्र के साथ साझा की गई है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में शहर की उपलब्धियों का आकलन सिर्फ सड़क और सफाई से नहीं, बल्कि यह भी देखा जा सकता है कि शहर ऊर्जा के क्षेत्र में कितना टिकाऊ बन रहा है।
कचरा प्रबंधन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक का यह मॉडल इंदौर को एक अलग पहचान दे सकता है।
जल्द इंदौर आ सकती है केंद्र की टीम
दिल्ली में हुई बैठक के बाद अब केंद्र की टीम द्वारा इंदौर का दौरा किए जाने की संभावना है।
टीम शहर में जमीन पर मौजूद व्यवस्थाओं और स्वच्छता से जुड़े नवाचारों का अध्ययन कर सकती है। इसके बाद तय पैमानों के आधार पर यह देखा जाएगा कि इंदौर प्रस्तावित मॉडल सिटी की कसौटियों पर कितना खरा उतरता है।
यानी अभी अंतिम घोषणा का इंतजार है, लेकिन इंदौर ने इस संभावित सूची में जगह बनाने के लिए अपनी दावेदारी जरूर मजबूत कर ली है।
इंदौर अकेला नहीं, कई बड़े शहर दौड़ में
देश के 50 मॉडल शहरों की संभावित सूची में इंदौर के साथ कई दूसरे शहरों के नाम भी सामने आए हैं।
इनमें सूरत, अहमदाबाद, नवी मुंबई, जयपुर, विशाखापट्टनम, तिरुवनंतपुरम और भुवनेश्वर जैसे शहर शामिल बताए जा रहे हैं।
इन शहरों के बीच इंदौर की सबसे बड़ी पहचान उसका लगातार बना हुआ स्वच्छता रिकॉर्ड है। अब देखना यह होगा कि सफाई के इस मॉडल को पर्यटन, संस्कृति और स्वच्छ ऊर्जा के साथ जोड़कर इंदौर देश के लिए कितना बड़ा उदाहरण बन पाता है।
आठ बार की जीत के बाद अब असली चुनौती
इंदौर ने सफाई के मैदान में अपनी पहचान बना ली है। लेकिन मॉडल शहर बनना सिर्फ पुरस्कार जीतने से अलग चुनौती है।
अब शहर के सामने सवाल है कि क्या वह अपनी स्वच्छता की उपलब्धि को ऐसी संपूर्ण व्यवस्था में बदल सकता है, जिसे देश के दूसरे शहर भी अपनाना चाहें।
अगर ऐसा हुआ तो इंदौर की कहानी सिर्फ ‘आठ बार नंबर-1’ की नहीं रहेगी।
फिर पहचान होगी—एक ऐसा शहर, जिसने कचरे से शुरुआत की और स्वच्छता, पर्यटन, संस्कृति और ऊर्जा तक अपनी पूरी शहरी तस्वीर बदल दी।
