इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट: टिही-पीथमपुर सुरंग में बिछ रहा बैलास्टलेस ट्रैक, ड्रीलमेन गार्ड से सुरक्षित होंगे ट्रेन के पहिए
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से 2.95 किलोमीटर लंबी टिही-पीथमपुर टनल में बैलास्टलेस (बिना गिट्टी) ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है. अक्टूबर 2026 तक टनल निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय करते हुए रेलवे ने 150 सीसीटीवी कैमरों, 12 शक्तिशाली एग्जॉस्ट फैन और दुर्घटना से बचाव के लिए ड्रीलमेन गार्ड की तकनीक लागू की है.

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इंदौर (मध्य प्रदेश): इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के सबसे जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हिस्से 'टिही-पीथमपुर टनल' में रेलवे कंस्ट्रक्शन विभाग ने निर्माण कार्य की रफ्तार तेज कर दी है. 2,957 मीटर (लगभग 2.95 किमी) लंबी इस सुरंग के भीतर आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक (Ballastless Track) बिछाने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है.
रेलवे अधिकारियों ने अक्टूबर 2026 तक टनल का काम हर हाल में पूरा करने का दैनिक काउंटडाउन लक्ष्य निर्धारित किया है, हालांकि जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए साल के अंत तक इसके पूरी तरह तैयार होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
बिना गिट्टी का आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक
पारंपरिक रेल पटरियों के विपरीत सुरंग के भीतर गिट्टी (बैलास्ट) की जगह कंक्रीट का बेहद मजबूत आधार (Concrete Slab) तैयार किया जा रहा है:
रखरखाव में आसानी: टनल के भीतर पत्थरों/गिट्टी के खिसकने, धंसने या धूल उड़ने की समस्या नहीं होगी.
सुरक्षा व स्थिरता: कंक्रीट का स्लैब ट्रैक को लंबे समय तक अपनी जगह पर स्थिर रखेगा, जिससे हाई-स्पीड ट्रेन संचालन के दौरान वाइब्रेशन कम होगा.
लाइमिंग का काम अंतिम चरण में: खुदाई पूरी होने के बाद सुरंग की अंदरूनी सतह को चट्टानों और मिट्टी के दबाव से सुरक्षित रखने के लिए कंक्रीट लाइनिंग (Lining) का काम युद्धस्तर पर जारी है.
ड्रीलमेन गार्ड करेगा पहियों और टनल की दीवार की सुरक्षा
टनल सुरक्षा के लिए भारतीय रेलवे इसमें विशेष 'ड्रीलमेन गार्ड' (Drillman Guard) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है:
कार्यप्रणाली: पटरियों के बीचो-बीच करीब 12 मिमी नीचे ड्रीलमेन गार्ड इंस्टॉल किया जा रहा है.
हादसे से बचाव: यदि किसी ट्रेन का पहिया क्षतिग्रस्त या अनियंत्रित होता है, तो यह गार्ड उसे साइड में खिसकने से रोकेगा. इससे ट्रेन टनल की दीवारों से टकराने या पटरियों से उतरने से बच जाएगी.
वेंटिलेशन, सीसीटीवी और ड्रेनेज का त्रिस्तरीय सुरक्षा ढांचा
सुरंग के भीतर यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है:
12 एग्जॉस्ट फैन से मिलेगी ताजी हवा: टनल में प्रदूषित हवा और धुएं को बाहर फेंकने के लिए 37.5 किलोवाट क्षमता के कुल 12 एग्जॉस्ट फैन लगाए जा रहे हैं, जिनमें से 4 स्थापित हो चुके हैं. इनके बिजली कनेक्शन के लिए सुरंग के ऊपर सब-स्टेशन बनाए जा रहे हैं.
150 सीसीटीवी से रियल-टाइम निगरानी: पूरे 2.95 किमी के स्ट्रेच में सुरक्षा निगरानी के लिए 150 सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए जा रहे हैं.
हर 50 मीटर पर ड्रेनेज: बारिश और भूजल निकासी के लिए हर 50 मीटर की दूरी पर ड्रेनेज चैंबर (Drainage Chambers) बनाए गए हैं.
आपातकालीन रेस्क्यू शाफ्ट: किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए टनल में रिफ्यूज निच (Refuse Niche), रेस्क्यू शाफ्ट और वेंटिलेशन डक्ट का प्रावधान किया गया है.
विद्युतीकरण और प्रकाश व्यवस्था
रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण के लिए सुरंग के ऊपरी हिस्से में प्रत्येक 31.5 मीटर की दूरी पर कैंटिलीवर (Cantilever) लगाए जा रहे हैं, जिनके सहारे ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) केबल गुजरेगी. इसके साथ ही टनल के अंदर दृश्यता बनाए रखने के लिए दोनों दीवारों पर हर 8 मीटर पर लाइट्स लगाने की योजना है.
इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट: एक नज़र में आंकड़े
परियोजना की स्वीकृति: वर्ष 2008
कुल रेल लाइन की लंबाई: 200.97 किमी
वर्तमान संशोधित लागत: लगभग ₹1700 करोड़
सुरंग की लंबाई: 2957 मीटर (2.95 किमी)
विद्युतीकरण कैंटिलीवर दूरी: 31.5 मीटर
लाइट्स के बीच अंतराल: 8 मीटर
ड्रेनेज चैंबर अंतराल: 50 मीटर

