एमपी के खजाने से निकला 113 साल पुराना इतिहास: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की मिट्टी में चमके अंग्रेजों के जमाने के सिक्के, बटोरने के लिए दौड़ पड़ा पूरा गांव
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण स्थल पर ब्रिटिश काल के चांदी के सिक्के निकलने की खबर से सनसनी फैल गई. डोंगरपुर गांव में मिट्टी में दबे 1913 के सिक्के पाने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े. प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए सिक्कों को जब्त कर पुरातत्व विभाग को सौंपने के आदेश दिए हैं.

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मुरैना (मध्य प्रदेश): ग्वालियर से आगरा के बीच निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण स्थल पर अचानक चांदी के सिक्के मिलने की खबर से समूचे क्षेत्र में हड़कंप मच गया. मामला माता बसैया थाना क्षेत्र के डोंगरपुर गांव का है, जहां एक्सप्रेस-वे के लिए बिछाई गई मिट्टी से ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्के निकलने की बात सामने आते ही बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खजाने की तलाश में निर्माण स्थल की ओर दौड़ पड़े.
मिट्टी में दबा दिखा पहला सिक्का, तीन दिन बाद गांव में फैली खबर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब तीन दिन पहले डोंगरपुर गांव का एक युवक निर्माणाधीन सड़क से गुजर रहा था, तभी उसकी नजर मिट्टी में दबे एक चमकदार चांदी के सिक्के पर पड़ी. युवक सिक्का लेकर घर चला गया. अगले दिन वह अपने कुछ साथियों के साथ वापस आया और मिट्टी को कुरेदने पर उन्हें 3-4 सिक्के और मिले.
दो दिनों तक कुछ युवक चुपचाप वहां खुदाई करते रहे, लेकिन मंगलवार सुबह यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई. इसके बाद ग्रामीण हंसिया, खुरपी, सरिया और लकड़ियां लेकर एक्सप्रेस-वे की मिट्टी खोदने में जुट गए. इंटरनेट मीडिया पर ग्रामीणों द्वारा की जा रही खुदाई और सिक्के मिलने के वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं.
1913 के जॉर्ज पंचम कालीन सिक्के, 91 फीसदी चांदी का दावा
प्रारंभिक जांच और ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक 8 से 10 चांदी के सिक्के मिलने की बात सामने आई है. इन सिक्कों पर वर्ष 1913 अंकित है. विशेषज्ञों के अनुसार, ये सिक्के ब्रिटिश भारत में वर्ष 1910 से 1930 के बीच शासन करने वाले सम्राट जॉर्ज पंचम के कार्यकाल के हैं, जिनमें लगभग 91 प्रतिशत शुद्ध चांदी होती थी.
बाहर से लाई गई मिट्टी में निकले सिक्के, पुलिस ने ग्रामीणों को खदेड़ा
माता बसैया थाना प्रभारी विवेक सिंह तोमर ने बताया कि मंगलवार सुबह सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और खुदाई कर रहे ग्रामीणों को खदेड़कर क्षेत्र को खाली कराया.
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि एक्सप्रेस-वे के बेस निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही मिट्टी स्थानीय खेतों की नहीं है, बल्कि इसे किसी अन्य स्थान से खोदकर डंपरों के जरिए लाया गया था. आशंका जताई जा रही है कि जिस जगह से मिट्टी लाई गई, वहां यह पुराना खजाना दबा रहा होगा.
प्रशासन ने दिए जांच और सिक्के जब्त करने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर अश्विनी रावत ने एसडीएम (अंबाह/मुरैना) रामनिवास सिंह सिकरवार को मामले की सत्यता जांचने और मिले हुए सिक्कों को प्रशासनिक कस्टडी में लेकर पुरातत्व विभाग के सुपुर्द करने के कड़े निर्देश दिए हैं. फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग की टीम गांव में स्थिति पर नजर बनाए हुए है.



