कांग्रेस नेता अरुण यादव की सूत मिल पर शिकंजा: NCDC बेचेगा 19 एकड़ अचल संपत्ति, 24 करोड़ के भारी कर्ज में डूबी संस्था की ई-नीलामी तय
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने खरगोन की प्रतिष्ठित 'जवाहरलाल नेहरू सूत मिल' पर 24.16 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी न चुकाने पर कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी है. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के नेतृत्व वाली इस सहकारी संस्था की 19 एकड़ से ज्यादा जमीन और निर्मित ढांचे को सरफेसी एक्ट के तहत 23 सितंबर को ई-नीलामी में चढ़ाया जाएगा.

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खरगोन (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में सहकारिता आंदोलन के बड़े गढ़ मानी जाने वाली 'जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसाइटी लिमिटेड' (सूत मिल) गहराते वित्तीय भंवर में पूरी तरह फंस गई है. सालों से जारी वित्तीय बदहाली और बकाए की अनदेखी के बाद अब राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), भोपाल ने कड़ा प्रशासनिक और कानूनी रुख अपनाया है. संस्था द्वारा 24 करोड़ 16 लाख रुपये से अधिक का कर्ज न चुका पाने की एवज में निगम ने सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act), 2002 का इस्तेमाल करते हुए संस्था की बेशकीमती 19 एकड़ से अधिक अचल संपत्तियों को ई-नीलामी के जरिए नीलाम करने का सार्वजनिक फरमान जारी कर दिया है.
40 साल पुराना सहकारी साम्राज्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री पर उठे सवाल
इस पूरी देनदारी और वित्तीय विफलता का सबसे अहम पहलू इससे जुड़ा हाई-प्रोफाइल राजनीतिक नाम है:
राजनैतिक रसूख: इस डिफॉल्टर संस्था की कमान वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव के हाथों में है.
सहकारी विरासत: करीब चार दशक पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. सुभाष यादव ने इस सूत मिल की नींव रखी थी, जिसे कभी निमाड़ के किसानों और मजदूरों की आर्थिक रीढ़ माना जाता था. आज वही संस्था करोड़ों के कर्ज और मुकदमों के बोझ तले दबी है.
कागजों से कुर्की तक: कर्ज डिफ़ॉल्ट का पूरा लेखा-जोखा
NCDC द्वारा जारी विवरण के मुताबिक, कर्ज की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए क्रमबद्ध कठोर कदम उठाए गए हैं:
डिमांड नोटिस का बेअसर होना: 6 मई 2025 को NCDC ने सूत मिल प्रबंधन को 20,97,91,380 रुपये तुरंत चुकाने के लिए कानूनी डिमांड नोटिस जारी किया था, जिसे प्रबंधन ने अनसुना कर दिया.
सांकेतिक कब्जे की कार्रवाई: भुगतान की समयसीमा बीतने पर 25 अगस्त 2025 को निगम के अधिकृत अधिकारियों ने सूत मिल की संपत्तियों का सांकेतिक अधिग्रहण (Symbolic Possession) कर लिया.
पहाड़ जैसा बना कर्ज: लगातार बढ़ते ब्याज और प्रभारों के कारण 16 जुलाई तक यह कुल बकाया बढ़कर 24,16,39,017 रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया, जिसके बाद अंततः संपत्तियों को बेचने का अंतिम रास्ता अपनाया गया.
नीलाम होने वाले दो बड़े लॉट: जानें कितनी तय हुई रिजर्व प्राइस
एनसीडीसी द्वारा घोषित ई-नीलामी शेड्यूल के अनुसार, खरगोन स्थित इन प्राइम लोकेशंस की ई-नीलामी 23 सितंबर को आयोजित होगी:
प्रथम लॉट (ग्राम खेड़ी बुजुर्ग): खसरा नंबर 13 में दर्ज 9.78 एकड़ कृषि व औद्योगिक भूमि, जिसमें बनी सभी इमारतें, शेड और ढांचा शामिल हैं.
आरक्षित मूल्य (Reserve Price): ₹4.25 करोड़
अमानत राशि (EMD): ₹42.50 लाख
द्वितीय लॉट (ग्राम रहीमपुरा): खसरा नंबर 11/4/1 के तहत आने वाली 9.47 एकड़ भूमि और निर्मित परिसंपत्तियां.
आरक्षित मूल्य (Reserve Price): ₹3.83 करोड़ (3,83,29,000 रुपये)
अमानत राशि (EMD): ₹38.32 लाख (38,32,900 रुपये)
खरीददारों को 16 सितंबर को स्थल निरीक्षण (Physical Inspection) की छूट दी गई है, जिसके बाद 23 सितंबर को डिजिटल माध्यम से बोलियां लगाई जाएंगी.
400 से अधिक मजदूरों का भविष्य अधर में, 15 करोड़ के बकाए पर सन्नाटा
जहाँ वित्तीय संस्थान (NCDC) अपनी 24 करोड़ की मूल राशि वसूलने के लिए संपत्ति बेचने जा रहा है, वहीं इस मिल को अपने खून-पसीने से सींचने वाले 400 से अधिक मजदूर भुखमरी और अनिश्चितता की कगार पर खड़े हैं.
'सूत मिल श्रमिक व कर्मचारी संगठन' (INTUC खरगोन) के अध्यक्ष राजेश पाटीदार और महासचिव विकास पटेल के अनुसार, कर्मचारियों का वेतन, ग्रेच्युटी और बोनस मिलाकर 15 करोड़ रुपये से अधिक का वैधानिक बकाया पेंडिंग है. मजदूर कई वर्षों से अदालतों और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मिल प्रबंधन की तरफ से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया.
दूसरी ओर, मिल के प्रभारी प्रबंध निदेशक दीपक कट्टी का कहना है कि प्रबंधन ने ही NCDC को इन जमीनों की नीलामी के लिए सहमति दी है. नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो धनराशि आएगी, उसी के आकलन के आधार पर कर्मचारियों और अन्य देनदारों के बकाए का निस्तारण किया जाएगा.


