जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर के डिजिटल बोर्ड पर दिखीं कुरान की आयतें, इंदौर में मचा विवाद; पुलिस बोली- शुरुआती जांच में लापरवाही का मामला
इंदौर में जन्माष्टमी के दौरान बांके बिहारी मंदिर के बाहर लगे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर अचानक उर्दू की कुछ लाइनें दिखाई देने से विवाद हो गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे साजिश के बजाय कंटेंट मैनेजमेंट में हुई गलती बताया गया है।

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जन्माष्टमी के मौके पर इंदौर के बांके बिहारी मंदिर के बाहर उस वक्त विवाद की स्थिति बन गई, जब डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर धार्मिक संदेशों के बीच अचानक उर्दू की कुछ लाइनें दिखाई देने लगीं। कुछ ही देर में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताते हुए जांच की मांग कर दी।
मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची तो जांच शुरू की गई। शुरुआती पड़ताल में पुलिस को ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिससे इसे किसी साजिश का हिस्सा माना जाए। पुलिस के मुताबिक फिलहाल मामला डिजिटल बोर्ड पर गलत कंटेंट प्ले होने की लापरवाही से जुड़ा दिखाई दे रहा है।
जन्माष्टमी के संदेशों के बीच अचानक चला उर्दू कंटेंट
मंदिर के बाहर लगे डिजिटल डिस्प्ले पर जन्माष्टमी से जुड़े संदेश चलाए जा रहे थे। इसी दौरान स्क्रीन पर उर्दू में लिखी कुछ पंक्तियां दिखाई दीं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इन पंक्तियों को कुरान की आयतें बताया गया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई।
पुलिस की शुरुआती जांच में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर अलग-अलग धार्मिक आयोजनों से संबंधित सामग्री एक ही पेन ड्राइव में सेव थी। जन्माष्टमी का कंटेंट चलाने के दौरान उसी डेटा में मौजूद उर्दू सामग्री गलती से स्क्रीन पर प्ले हो गई।
जैसे ही संचालक और वहां मौजूद लोगों को स्क्रीन पर चल रहे कंटेंट की जानकारी हुई, उसे तत्काल बदल दिया गया।
ADCP ने क्या कहा?
ADCP राजेश दंडोतिया के मुताबिक स्क्रीन पर किसी धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक या भड़काऊ नारा नहीं चलाया गया था। उनके अनुसार डिस्प्ले पर कुरान की कुछ आयतें दिखाई दी थीं।
पुलिस का कहना है कि मौजूदा जांच में इसे कंटेंट संबंधी गलती माना जा रहा है। हालांकि, पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए डिस्प्ले सिस्टम और उसमें इस्तेमाल किए गए कंटेंट की जांच की जा रही है।
हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद जांच तेज
वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने मामले को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने डिजिटल बोर्ड के संचालन से जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।
जांच का फोकस अब इस बात पर है कि बोर्ड किसने लगवाया था, उसका संचालन किसके जिम्मे था और उसमें अलग-अलग धार्मिक आयोजनों की सामग्री एक ही पेन ड्राइव में किस तरह रखी गई थी।
साजिश थी या सिर्फ कंटेंट मैनेजमेंट की गलती?
फिलहाल पुलिस की शुरुआती जांच साजिश की बजाय लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
पुलिस यह भी देख रही है कि उर्दू कंटेंट पेन ड्राइव में किसने सेव किया था और डिस्प्ले पर उसे चलने से रोकने के लिए कंटेंट की जांच क्यों नहीं की गई।
जांच पूरी होने के बाद तय होगी जिम्मेदारी
मामले में फिलहाल किसी साजिश की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस डिजिटल बोर्ड, पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री और संचालन की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
अब जांच के बाद ही साफ होगा कि स्क्रीन पर उर्दू की आयतें किस तकनीकी प्रक्रिया के तहत चलीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन था। फिलहाल पुलिस ने लोगों से मामले को लेकर अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की है।