भोपाल में सफाई व्यवस्था बेपटरी: बाजारों में जल रहा कचरा, सड़ रहे मांस के अवशेष
सफाईकर्मियों की हड़ताल से भोपाल के चौक बाजार, इतवारा और बुधवारा में कचरा जमा है। कहीं कचरा जलाया जा रहा है तो कहीं मांस-मछली के अवशेष सड़ रहे हैं। पर्यावरणविद् मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे।

भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब शहर की सड़कों और बाजारों में दिखाई देने लगा है। पुराने शहर के चौक बाजार में कचरे के ढेर में आग लगाई जा रही है, जबकि इतवारा और बुधवारा के मछली-मांस बाजार में जैविक कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही है। इससे वायु प्रदूषण के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए इसे चिंताजनक बताया है।
मामले को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में भी भोपाल की स्थिति उठाने की तैयारी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामले के याचिकाकर्ता पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने कहा है कि वे 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले शहर के हालात की तस्वीरें और मीडिया रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे।
चौक बाजार में कचरे के ढेर में लगाई जा रही आग
पुराने भोपाल के चौक बाजार में नियमित सफाई नहीं होने से दुकानों और सड़कों के आसपास कचरा जमा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि परेशानी से बचने के लिए कुछ व्यापारियों ने कचरे में आग लगा दी। इस कचरे में प्लास्टिक और अन्य घरेलू अपशिष्ट शामिल होने की आशंका है।
कचरा जलने से निकलने वाला धुआं आसपास के लोगों और दुकानदारों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। इसमें मौजूद हानिकारक तत्व आंखों में जलन, गले में परेशानी और सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकते हैं। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों के लिए इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, प्लास्टिक और दूसरे मिश्रित कचरे को खुले में जलाने से जहरीले प्रदूषक निकल सकते हैं। इनके संपर्क में आने से श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कचरे को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण जरूरी है।
मछली-मांस बाजार में सड़ रहे अवशेष
इतवारा और बुधवारा के मछली व मीट बाजार में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से मछली, चिकन और मांस के अवशेष खुले में पड़े हैं। इनके सड़ने से आसपास दुर्गंध फैल रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के जैविक कचरे का समय पर निस्तारण नहीं होने से अस्वच्छता बढ़ती है। जमा कचरे पर मक्खियों और अन्य कीटों के पनपने की आशंका रहती है। ये दूषित वातावरण के जरिए संक्रमण फैलाने का माध्यम बन सकते हैं।
डॉक्टरों ने भी ऐसे माहौल में साफ-सफाई और स्वच्छ भोजन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। कचरे के संपर्क के बाद हाथ नहीं धोना और दूषित वातावरण में खाद्य पदार्थों का सेवन करना स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
डॉक्टरों ने सांस के मरीजों को दी सावधानी बरतने की सलाह
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. पराग शर्मा के अनुसार, मौसम में बदलाव के कारण हवा में धूल और प्रदूषण का स्तर पहले से परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में कचरा जलने से निकलने वाला धुआं सांस के मरीजों के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करता है।
उनका कहना है कि अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों में एक्यूट अटैक की आशंका बढ़ सकती है। एलर्जी से पीड़ित लोगों को छींक, नाक बहने और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
डॉ. लोकेन्द्र दवे ने भी बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कलेक्टरों की जिम्मेदारी के बावजूद व्यवस्था पर सवाल
पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे का कहना है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बावजूद भोपाल में कचरे का नियमित निस्तारण नहीं हो रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी तय है, तो हड़ताल के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उनके मुताबिक, कचरा जलाना एयर एक्ट-1981 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों के अनुरूप नहीं है।
17 नवंबर की सुनवाई में उठेगा मामला
सुभाष सी. पांडे ने कहा है कि वे 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले भोपाल के हालात से संबंधित तस्वीरें और मीडिया कवरेज प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही कलेक्टर की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया जाएगा।
फिलहाल शहर में सफाईकर्मियों की हड़ताल के बीच कचरा प्रबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित बाजारों की सफाई को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।




