शाजापुर में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला, 5 दोषियों को आखिरी सांस तक जेल
शाजापुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में पांच दोषियों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों में एक महिला भी शामिल है, जिसे साजिश और सहयोग करने का दोषी माना गया।

नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और साजिश, शाजापुर कोर्ट ने 5 दोषियों को सुनाई प्राकृतिक जीवनकाल तक उम्रकैद
शाजापुर। नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर यौन अपराध करने के मामले में शाजापुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों समेत कुल पांच दोषियों को उनके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में एक महिला को भी आपराधिक षड्यंत्र और अपराध में सहयोग करने का दोषी ठहराया गया है। फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अदालत ने महिला की भूमिका को केवल इसलिए कमतर नहीं माना कि वह स्वयं दुष्कर्म की घटना में शारीरिक रूप से शामिल नहीं थी।
घर से निकली नाबालिग, रास्ते में चाकू दिखाकर किया अपहरण
अभियोजन के मुताबिक, घटना 25 जून 2025 की रात की है। पीड़िता के पिता ने 26 जून को शुजालपुर मंडी थाने में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 30 जून 2025 को उसे दस्तयाब किया।
महिला पुलिस अधिकारी के सामने दिए बयान में पीड़िता ने बताया कि घर से निकलने के बाद रास्ते में मयंक विश्वकर्मा और शाहदत उर्फ राजा पिकअप वाहन लेकर पहुंचे। आरोप है कि मयंक ने चाकू दिखाकर उसे डराया और जबरन वाहन में बैठा लिया।
इसके बाद उसे एक ढाबे के तलघर में ले जाया गया, जहां आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसे आरोपी मयंक की मौसी सुनीता राठौर के पास शाजापुर ले जाया गया। यहां दुर्गेश राठौर ने भी उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया।
अभियोजन के अनुसार, इसके बाद आरोपी पीड़िता को ट्रेन से इंदौर ले गए, जहां उसके साथ फिर दुष्कर्म किया गया। किसी तरह पीड़िता वापस अकोदिया पहुंची, जिसके बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी।
डीएनए रिपोर्ट बनी अभियोजन का अहम आधार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और घटनास्थल सहित अन्य स्थानों से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। जप्त किए गए प्रदर्शों और आरोपियों के डीएनए नमूनों का मिलान कराया गया।
अभियोजन के अनुसार, डीएनए रिपोर्ट आरोपियों के खिलाफ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य साबित हुई। मेडिकल परीक्षण, पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।
किस दोषी को कितनी सजा मिली?
अदालत ने अपराध की गंभीरता और अलग-अलग आरोपियों की भूमिका के आधार पर विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।
- मयंक उर्फ गोलू (निवासी अकोदिया मंडी), शाहदत उर्फ राजा और अनस उर्फ अनीस खां: धारा 70(2) बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास तथा अर्थदंड। अपहरण, धमकाने और एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य अपराधों में 5 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा।
- दुर्गेश राठौर (निवासी ज्योति नगर, शाजापुर): धारा 64(2)(एम) बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास तथा अर्थदंड। अन्य धाराओं में अपहरण, बंधक बनाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत 5 से 20 वर्ष तक का कठोर कारावास।
- सुनीता राठौर (दुर्गेश की माता): धारा 142 बीएनएस, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं। अदालत ने उन्हें अपराध की साजिश रचने और सहयोग करने का दोषी माना।
अदालत की टिप्पणी: महिला भी हो सकती है सामूहिक दुष्कर्म की जिम्मेदार
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सुनीता राठौर की भूमिका से जुड़ा है। अदालत ने माना कि किसी महिला का अपराध के दौरान स्वयं शारीरिक रूप से शामिल होना ही दोषसिद्धि की अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि वह साझा आपराधिक मंशा के तहत पीड़िता के साथ दुष्कर्म कराने की साजिश रचती है या अपराध में सहयोग करती है, तो उसे भी उसकी भूमिका के अनुसार जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
अदालत ने धारा 70(2) बीएनएस के प्रावधानों के तहत नाबालिग के साथ समूह में दुष्कर्म करने वाले आरोपियों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से इन वकीलों ने की पैरवी
मामले की जानकारी मीडिया सेल प्रभारी एवं जिला अभियोजन अधिकारी (अजाक), शाजापुर प्रतीक श्रीवास्तव ने दी। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी और प्रदीप कुमार भटेले ने अदालत में पैरवी की।
इस मामले में अदालत का फैसला केवल आरोपियों को सजा सुनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि नाबालिग के खिलाफ यौन अपराध में प्रत्यक्ष भूमिका के साथ-साथ साजिश और सहयोग की भूमिका भी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है।



