
हरदीप पुरी को MP से राज्यसभा टिकट: UP से बाहर, एपस्टीन विवाद के बीच भोपाल में सियासी घमासान
भाजपा ने मुरुगन की खाली सीट पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उतारा है। कांग्रेस ने उनके कथित एपस्टीन संपर्कों पर सवाल उठाए, भाजपा ने 1984 याद दिलाया। 12 नवंबर को मतदान है, और भाजपा के लिए जीत की राह आसान मानी जा रही है।

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भोपाल। मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी ने प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को उनके नाम पर मुहर लगाई। इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सवालों पर पुरी को घेरा, जबकि भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाई।
क्या है पूरा मामला
यह सीट एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई है। मुरुगन ने 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा, दोनों से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तारीख 2 नवंबर, जांच 3 नवंबर और नाम वापसी 5 नवंबर है। मतदान 12 नवंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे गिनती होगी।
पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। 5 अक्टूबर को भाजपा ने UP के लिए आठ उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें पुरी का नाम नहीं था। पार्टी ने इसकी कोई वजह नहीं बताई थी।
कांग्रेस का हमला: किसने क्या कहा
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना रही है जो "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर" बच्चियों के शोषण और तस्करी के मामलों में अपराधी रहा है। उन्होंने जांच की मांग की और हर स्तर पर विरोध की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि राज्यसभा टिकट भाजपा का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन एपस्टीन से जुड़े गंभीर सवालों के बीच पुरी को मध्य प्रदेश का प्रतिनिधि बनाना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है। सिंघार ने यह भी पूछा कि नामांकन में प्रस्तावक और समर्थक कौन-कौन भाजपा नेता होंगे।
एपस्टीन कनेक्शन: रिकॉर्ड पर क्या है
एपस्टीन यौन अपराधों का दोषी अमेरिकी फाइनेंसर था, जिसकी 2019 में हिरासत में मौत हुई। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस साल जनवरी में उससे जुड़े लाखों दस्तावेज सार्वजनिक किए, जिनमें पुरी और एपस्टीन के बीच ईमेल भी शामिल बताए गए हैं। इसी साल फरवरी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुरी का नाम उठाया था।
पुरी का पक्ष: पुरी ने फरवरी में कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहने के दौरान आठ साल में तीन-चार मुलाकातें हुईं, जो एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर थीं। उन्होंने एक ईमेल का जिक्र किया और कहा कि इन मुलाकातों का एपस्टीन के आपराधिक मामलों से कोई लेना-देना नहीं था।
कांग्रेस का दावा: पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 2014 से 2017 के बीच 62 ईमेल और 14 मुलाकातों का दावा किया। यह दावा कांग्रेस का है, और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के लिए मूल दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
नई तस्वीरें: 21 अक्टूबर को अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड से पुरी की एपस्टीन के साथ मेज पर बैठे हुए तस्वीरें सामने आने की खबरें आईं। विपक्ष ने पूछा कि जब पुरी ने कहा था कि वह आमने-सामने कभी नहीं मिले, तो ये तस्वीरें क्या कहती हैं। अगले दिन आई रिपोर्टों के मुताबिक पुरी ने इन संपर्कों को पेशेवर बताया और आपराधिक मामलों से किसी संबंध से इनकार किया।
भाजपा का जवाब: बहस का फ्रेम बदला
राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि पुरी उम्मीदवार हैं और जीतेंगे भी। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि उसे सिखों से इतनी नफरत क्यों है, और 1984 के दंगों का हवाला दिया। उन्होंने कांग्रेस पर बिना तथ्य और तर्क के राजनीति करने का आरोप लगाया।
UP से MP क्यों, और इसका गणित
भाजपा ने पुरी को UP से दोबारा नहीं भेजा और अब MP का रुख किया, इसकी आधिकारिक वजह पार्टी ने नहीं बताई है। इतना तय है कि 12 नवंबर की जीत उन्हें 25 नवंबर के बाद भी राज्यसभा में बनाए रखेगी। राज्यसभा उपचुनाव में विधायक वोट देते हैं, और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने से मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके उम्मीदवार की राह आसान मानी जा रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भाजपा ने केंद्र को 4-5 नामों का पैनल भेजने का फैसला किया था, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने पुरी का नाम तय किया। यानी एक बार फिर मध्य प्रदेश के हिस्से का राज्यसभा टिकट बाहरी चेहरे को गया है। मुरुगन भी तमिलनाडु के नेता हैं, जो MP से राज्यसभा गए थे।


