भोजशाला विवाद: जुमे की नमाज़ के बाद 45 मिनट रोकी गई दर्शनार्थियों की एंट्री, समिति ने कलेक्टर-एसपी को सौंपा पत्र
महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति ने रविवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद प्रशासन ने भोजशाला परिसर के गेट नंबर 25 को करीब 45 मिनट के लिए बंद रखा। समिति ने इसे कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन बताया जो विशेष रूप से जुमे की नमाज़ के दिन की व्यवस्था के लिए है।

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समिति ने कलेक्टर को सौंपा पत्र, कोर्ट आदेश की अवहेलना का आरोप
धार। भोजशाला में पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति ने रविवार को प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की है। समिति ने पत्र में साफ लिखा है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश व निर्देशानुसार भोजशाला और सरस्वती मंदिर के प्रवेश मार्ग पर किसी तरह का विघ्न नहीं होना चाहिए और दोनों समुदायों के आने-जाने के लिए पृथक-पृथक मार्ग की व्यवस्था प्रशासन को पहले ही निर्देशित की गई थी। समिति के मुताबिक यह व्यवस्था विशेष रूप से जुमे की नमाज़ के दिन के लिए तय की गई है।
समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने कलेक्टर को दिए पत्र में आरोप लगाया कि तीन महीने बीत जाने के बावजूद समिति के आवेदन और विभिन्न समाजों के ज्ञापन के बाद भी हिन्दू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास प्रशासन के स्तर पर किया जा रहा है।
जुमे की नमाज़ के बाद रोकी गई एंट्री, गेट नंबर 25 बंद
समिति के पत्र के मुताबिक, शुक्रवार को नमाज़ के बाद प्रशासन ने अपनी सुरक्षा में सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों को कमाल मौलाना दरगाह भेजा। इसी दौरान भोजशाला में मौजूद दर्शनार्थियों और समिति सदस्यों को करीब 45 मिनट तक रोक कर रखा गया और भोजशाला के गेट नंबर 25 को बंद कर दिया गया।
समिति ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आवाजाही बंद किए जाने को लेकर हिन्दू समाज और समिति ने 2-3 दिन पहले ही प्रशासन को आवेदन दिया था, इसके बावजूद जिस तरह से मार्ग बंद किया गया, वह प्रशासन द्वारा नई परंपरा गढ़ने जैसा है।
पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज कलेक्टर को भेजा
समिति ने दावा किया है कि शुक्रवार की पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज कलेक्टर को भेज दिया गया है, ताकि प्रशासन की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो सके।
कोर्ट आदेश की अवहेलना पर अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग
समिति ने पत्र में स्पष्ट मांग की है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर शांति व्यवस्था भंग करने के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही सरस्वती मंदिर, भोजशाला के मार्ग को अवरुद्ध करने और दर्शनार्थियों को बंधक बनाने वाले दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी अविलंब कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की जाती, तो समाज उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगा। इस पत्र पर समिति के महामंत्री सुमित चौधरी और महाप्रवक्ता हेमंत डोरया के हस्ताक्षर हैं। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, धार को भी भेजी गई है।
