5 करोड़ कैश, 6,350 कारतूस... फिर भी 'हिंदुत्व का रक्षक'! डॉन बाबा फरजान पर नेताओं के बचाव से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल
छत्रपति संभाजीनगर में कुख्यात डॉन बाबा फरजान के बंगले से करोड़ों की नकदी, हजारों कारतूस और हथियारों का जखीरा मिलने के बाद पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप मच गया है। लेकिन सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब कुछ नेताओं ने इस हथियारों के जखीरे को "शहर की जरूरत" और "हिंदुत्व की रक्षा" बताकर उसका बचाव कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या अपराध और राजनीति का गठजोड़ कानून से भी बड़ा हो गया है?

5 करोड़ नकद, हजारों कारतूस... और फिर शुरू हुआ नेताओं का बचाव
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में हुई एक पुलिस कार्रवाई ने सिर्फ अपराध जगत ही नहीं, बल्कि राजनीति की भी परतें खोल दी हैं। क्राइम ब्रांच ने कुख्यात गैंगस्टर बाबा फरजान के बंगले पर छापा मारकर करीब 5 करोड़ रुपये नकद, 6,350 जिंदा कारतूस और 21 हथियार बरामद किए। इतनी बड़ी बरामदगी के बाद जहां सख्त कार्रवाई की उम्मीद थी, वहीं कुछ नेताओं के बयान ने पूरे मामले को राजनीतिक तूफान में बदल दिया।
आधी रात की रेड में खुला हथियारों का खजाना
क्राइम ब्रांच की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बाबा फरजान के बंगले पर छापा मारा। तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में नकदी, कारतूस, बंदूकें, तलवारें और अन्य हथियार मिले। जांच में सामने आया कि बरामद 21 हथियारों में से केवल चार ही लाइसेंसी थे, बाकी हथियारों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतने बड़े पैमाने पर हथियार आखिर कहां से आए और उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए होना था।
नेताओं के बयान ने मचा दिया बवाल
छापेमारी के बाद सबसे ज्यादा विवाद नेताओं के बयानों को लेकर खड़ा हुआ।
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि एक समय शहर में ऐसे हथियार रखना "जरूरी" था और बाबा फरजान को "हिंदुत्ववादी" बताया।
वहीं शिंदे सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मामले में कई तथ्यों को सही तरीके से सामने नहीं रखा जा रहा है।
इन बयानों के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर एक गैंगस्टर के समर्थन में नेता क्यों खड़े नजर आ रहे हैं?
अब कानून से बड़ा कौन?
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निजी व्यक्ति के पास हजारों कारतूस और बड़ी संख्या में हथियार मिलना बेहद गंभीर मामला है। यदि अधिकांश हथियार बिना वैध लाइसेंस के हैं, तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है।
इस बीच पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद करोड़ों रुपये की नकदी का स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाना था।
राजनीति और अपराध का खतरनाक गठजोड़?
यह मामला सिर्फ एक गैंगस्टर के घर से हथियार मिलने का नहीं है, बल्कि उन सवालों का है जिनका जवाब जनता जानना चाहती है।
आखिर एक अपराधी के पक्ष में नेता क्यों बोल रहे हैं?
हजारों कारतूस किस मकसद से जमा किए गए थे?
करोड़ों रुपये की नकदी कहां से आई?
क्या राजनीतिक संरक्षण की वजह से ऐसे नेटवर्क फलते-फूलते रहे?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई से ही सामने आएंगे।



