विकास दुबे: एनकाउंटर के 2,256 दिन बाद जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र, कागजों में भी खत्म हुआ बिकरू कांड का मुख्य आरोपी
बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की मौत को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने में लगभग छह साल लग गए। पिता के नाम में दर्ज विसंगति के चलते अटका मृत्यु प्रमाण पत्र आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जारी हुआ।

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बिकरू कांड के मुख्य आरोपी और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में वांछित विकास दुबे को अब सरकारी दस्तावेजों में भी मृत घोषित कर दिया गया है। कानपुर नगर निगम के जोन-4 कार्यालय ने 11 सितंबर को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया — यानी एनकाउंटर में मारे जाने के ठीक 2,256 दिन बाद।
अधिकारियों ने यह प्रमाण पत्र न्यायिक दस्तावेजों में दर्ज बिकरू गांव के पते पर रजिस्टर्ड डाक से भेजा है, जिससे करीब छह साल से लटका प्रशासनिक मामला आखिरकार सुलझ गया।
बिकरू कांड क्या था
बिकरू, कानपुर नगर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र का एक गांव है, जो कानपुर शहर से सटे ग्रामीण इलाके में पड़ता है। 2-3 जुलाई 2020 की रात यहीं पुलिस टीम विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची थी, तभी दुबे और उसके साथियों ने छतों से घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। जेसीबी मशीन से रास्ता रोककर की गई इस फायरिंग में एक सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी। यही घटना "बिकरू कांड" के नाम से जानी जाती है, जिसने पूरे देश में पुलिस-अपराधी गठजोड़ और थाना स्तर पर सूचना लीक होने को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी थी।
जारी होने में देरी क्यों हुई
इस लंबी देरी की वजह एक क्लेरिकल गड़बड़ी थी — पुलिस पंचनामे और शवदाह के दस्तावेजों में विकास दुबे के पिता के नाम को लेकर अंतर था। इस विसंगति के चलते स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पहचान रिकॉर्ड का मिलान नहीं कर पाए, और मृत्यु का आधिकारिक पंजीकरण वर्षों तक लंबित रहा।
इस देरी का सीधा असर परिवार पर पड़ा। मृत्यु प्रमाण पत्र न होने की वजह से नॉमिनी उसकी जीवन बीमा पॉलिसी का दावा नहीं कर सके, और चल-अचल संपत्ति के वारिसों को हस्तांतरण में भी दिक्कत आई — जमीन की नामांतरण प्रक्रिया और राजस्व सत्यापन अटका रहा।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से बनी बात
जब स्थानीय स्तर पर मामला आगे नहीं बढ़ा, तो परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया और प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश मांगा। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को इस पर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
कोर्ट के निर्देश पर कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय ने पुराने रिकॉर्ड — पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इनक्वेस्ट पेपर और शवदाह पंजी — की जांच की। पिता के नाम की विसंगति स्पष्ट होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की सत्यापन रिपोर्ट पर जोन-4 नगर निगम कार्यालय ने एंट्री पूरी कर प्रमाण पत्र जारी किया।
उज्जैन से गिरफ्तारी, फिर एनकाउंटर
बिकरू कांड के बाद शुरू हुए मैनहंट के दौरान 9 जुलाई 2020 की सुबह मध्य प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर से गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में फूल-प्रसाद खरीदते वक्त एक दुकानदार ने उसे पहचान लिया और मंदिर की सुरक्षा एजेंसी को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। दुबे ने पहले खुद का झूठा नाम बताया, लेकिन बाद में "मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला" कहकर अपनी पहचान कबूल की। हालांकि गिरफ्तारी को लेकर विवाद भी रहा — कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे "सरेंडर" करार देते हुए पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए थे और जांच की मांग की थी।
अगले दिन, 10 जुलाई 2020 को पुलिस उसे उज्जैन से कानपुर ला रही थी। पुलिस के अनुसार, वाहन शहर के बाहरी इलाके में पलट गया, जिसके बाद दुबे ने भागने की कोशिश की और जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई। एनकाउंटर की परिस्थितियों की बाद में जांच एजेंसियों और न्यायिक आयोग द्वारा समीक्षा की गई थी।
अब मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के साथ परिवार के लिए लंबित बीमा, संपत्ति और कानूनी उत्तराधिकार के मामलों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
