UPI के बाद डिजिटल कैश की एंट्री, डिजिटल रुपया फोन में कैसे रखा जाएगा और बिना नेट कैसे होगा लेन-देन
UPI और डिजिटल रुपया एक ही चीज नहीं हैं। UPI बैंक खाते से भुगतान कराने का सिस्टम है, जबकि e₹ खुद RBI की ओर से जारी डिजिटल करेंसी है। इसके ऑफलाइन फीचर्स के जरिए सीमित परिस्थितियों में इंटरनेट के बिना भी डिजिटल भुगतान की सुविधा विकसित की जा रही है।

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मोबाइल से पेमेंट की बात आते ही सबसे पहले UPI का नाम आता है। लेकिन अब डिजिटल पेमेंट की दुनिया में एक और व्यवस्था पर काम चल रहा है, जिसका तरीका UPI से काफी अलग है। नाम है—डिजिटल रुपया या e₹।
सवाल यह है कि जब UPI से कुछ ही सेकंड में एक फोन से दूसरे फोन पर पैसा भेजा जा सकता है, तो डिजिटल रुपये की जरूरत क्यों पड़ी? और क्या वाकई ऐसा हो सकता है कि डिजिटल रुपया भेजने के लिए हर बार बैंक और इंटरनेट की जरूरत न पड़े?
इसे समझने के लिए पहले UPI और e₹ के बीच का मूल अंतर समझना जरूरी है।
UPI और डिजिटल रुपया एक चीज नहीं
UPI खुद पैसा नहीं है। यह बैंक खातों के बीच डिजिटल भुगतान कराने वाला सिस्टम है। जब आप UPI से किसी दुकानदार को 500 रुपए भेजते हैं, तो भुगतान बैंकिंग सिस्टम के जरिए प्रोसेस होता है।
दूसरी तरफ e₹ यानी डिजिटल रुपया खुद भारतीय मुद्रा का डिजिटल रूप है। इसे डिजिटल वॉलेट में रखा जा सकता है और भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीधी भाषा में कहें तो UPI भुगतान का रास्ता है, जबकि e₹ पैसा है।
डिजिटल रुपये का कॉन्सेप्ट क्या है?
डिजिटल रुपये को ऐसे समझिए जैसे आपकी जेब में रखा 500 रुपए का नोट। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां नोट कागज का नहीं, डिजिटल रूप में होगा।
e₹ RBI की ओर से जारी CBDC यानी Central Bank Digital Currency है। इसका इस्तेमाल डिजिटल वॉलेट के जरिए किया जाता है।
RBI के मुताबिक डिजिटल रुपये को रिटेल और होलसेल दोनों तरह के इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है। आम लोगों के लिए रिटेल CBDC का इस्तेमाल दुकानदारों और दूसरे लोगों को भुगतान करने में किया जा सकता है।
बिना इंटरनेट कैसे हो सकता है भुगतान?
डिजिटल रुपये की सबसे ज्यादा चर्चा इसके ऑफलाइन इस्तेमाल को लेकर होती है।
RBI अलग-अलग ऑफलाइन समाधानों पर काम कर चुका है। इनमें ऐसे मॉडल शामिल हैं जिनमें इंटरनेट कनेक्शन के बिना भुगतान की सुविधा विकसित की जा रही है। NFC यानी Near Field Communication जैसी तकनीक भी इसके लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
NFC को आसान भाषा में ऐसे समझें—दो संगत डिवाइस को एक-दूसरे के काफी करीब लाकर डेटा ट्रांसफर करना।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डिजिटल रुपया हर फोन और हर परिस्थिति में पूरी तरह बिना किसी नेटवर्क के अपने आप काम करेगा। ऑफलाइन भुगतान की सुविधा इस्तेमाल किए जा रहे तकनीकी मॉडल और उपलब्ध डिवाइस पर निर्भर करेगी।
फोन से फोन में पैसा जाएगा?
ऑफलाइन CBDC के कुछ मॉडल इसी तरह के भुगतान को संभव बनाने के लिए विकसित किए जा रहे हैं।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को 500 रुपए देने हैं। सामान्य UPI भुगतान में बैंकिंग सिस्टम के जरिए ट्रांजैक्शन प्रोसेस होगा। वहीं डिजिटल रुपये के वॉलेट आधारित मॉडल में e₹ को एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करने की व्यवस्था हो सकती है।
यानी यहां पैसा जरूरी नहीं कि उसी वक्त सामने वाले के बैंक खाते में पहुंचे। वह उसके डिजिटल वॉलेट में e₹ के रूप में पहुंच सकता है।
क्या डिजिटल नोट भी 500, 200 और 100 रुपए के होंगे?
डिजिटल रुपये को समझने का आसान तरीका यही है कि यह भारतीय रुपये का डिजिटल रूप है। लेकिन इसे कागजी नोट की हूबहू डिजिटल कॉपी समझना सही नहीं होगा।
e₹ डिजिटल करेंसी यूनिट के रूप में काम करता है। इसे डिजिटल वॉलेट में रखा और भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही है कि डिजिटल वॉलेट में डिजिटल रुपये की राशि रखी होगी, न कि फोन में कागज के नोटों की तस्वीरें।
UPI में क्या होता है?
अब एक सामान्य UPI भुगतान को समझिए।
आप किसी दुकानदार का QR कोड स्कैन करते हैं। राशि डालते हैं, UPI PIN दर्ज करते हैं और भुगतान हो जाता है।
इसके पीछे आपका UPI ऐप, संबंधित बैंक, NPCI और प्राप्तकर्ता बैंक जैसे सिस्टम मिलकर भुगतान को प्रोसेस करते हैं।
यूजर को यह पूरी प्रक्रिया दिखाई नहीं देती, क्योंकि सिस्टम इसे कुछ ही सेकंड में पूरा कर देता है।
यही वजह है कि UPI बेहद तेज दिखाई देता है, जबकि पर्दे के पीछे कई तकनीकी प्रक्रियाएं चल रही होती हैं।
डिजिटल रुपये में क्या बदलेगा?
e₹ का मॉडल अलग है। इसमें डिजिटल करेंसी को वॉलेट में रखा जा सकता है।
RBI के अनुसार CBDC का इस्तेमाल व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P और व्यक्ति से व्यापारी यानी P2M भुगतान में किया जा सकता है।
यही वजह है कि इसे डिजिटल कैश के एक संभावित रूप के तौर पर देखा जाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात है—डिजिटल रुपया UPI को खत्म करने के लिए नहीं बनाया गया है। दोनों की तकनीकी भूमिका अलग है और दोनों साथ-साथ इस्तेमाल हो सकते हैं।
डिजिटल रुपये में चार्ज का क्या होगा?
UPI चार्ज को लेकर बहस के बीच डिजिटल रुपये को लेकर यह दावा किया जाता है कि इसमें बैंकिंग सिस्टम की जरूरत कम होने से भुगतान की लागत भी अलग हो सकती है।
लेकिन इसे सीधे यह कहना कि डिजिटल रुपया आते ही UPI के सारे चार्ज खत्म हो जाएंगे, सही नहीं होगा। किसी भी भुगतान व्यवस्था की लागत और शुल्क उसके तकनीकी ढांचे, नियमों और भविष्य की नीति पर निर्भर करेंगे।
इसलिए e₹ को UPI चार्ज का निश्चित समाधान मानने के बजाय एक अलग डिजिटल भुगतान व्यवस्था के रूप में देखना ज्यादा सही है।
डिजिटल वॉलेट में पैसा आएगा कैसे?
डिजिटल रुपये को इस्तेमाल करने के लिए पहले उसे डिजिटल वॉलेट में प्राप्त करना होगा।
इसके लिए बैंक खाते से e₹ वॉलेट में रकम लोड करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद वॉलेट में मौजूद डिजिटल रुपया भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
जैसे आपके पास नकद खत्म होने पर आप ATM या बैंक से पैसे निकालते हैं, उसी तरह डिजिटल वॉलेट में e₹ खत्म होने पर उसे फिर से लोड किया जा सकता है।
सरकार के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है e₹?
डिजिटल रुपये की एक और खासियत programmability है।
RBI के मुताबिक CBDC में कुछ परिस्थितियों में भुगतान को किसी खास उद्देश्य, अवधि या निर्धारित उपयोग से जोड़ा जा सकता है।
उदाहरण के लिए किसी योजना के तहत दी गई राशि को किसी खास काम के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे सरकारी भुगतान और सब्सिडी के लक्षित इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
क्या भारत में डिजिटल रुपया शुरू हो चुका है?
भारत में डिजिटल रुपये का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। RBI ने पहले रिटेल और होलसेल दोनों CBDC पायलट लॉन्च किए थे।
इसका मतलब यह है कि डिजिटल रुपया सिर्फ भविष्य की योजना नहीं है। इसका परीक्षण और वास्तविक उपयोग सीमित स्तर पर किया जा चुका है।
हालांकि, इसे UPI की तरह देश के हर व्यक्ति के रोजमर्रा के भुगतान का सामान्य माध्यम बनाने की प्रक्रिया अभी अलग चरणों में है।
तो क्या डिजिटल रुपया UPI की जगह ले लेगा?
जरूरी नहीं।
दोनों की भूमिका अलग है। UPI बैंक खाते से डिजिटल भुगतान कराने का माध्यम है, जबकि e₹ खुद डिजिटल करेंसी है।
आने वाले समय में संभव है कि दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए हो। जहां बैंक खाते से तुरंत भुगतान करना हो, वहां UPI उपयोगी रहेगा और जहां डिजिटल कैश जैसे मॉडल की जरूरत हो, वहां CBDC की भूमिका बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा बदलाव ऑफलाइन भुगतान, डिजिटल वॉलेट और programmability जैसे फीचर्स के व्यापक इस्तेमाल से आ सकता है।
यानी डिजिटल रुपये की कहानी सिर्फ “फोन से फोन पैसा भेजने” की नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या डिजिटल करेंसी नकदी के कुछ गुणों को डिजिटल दुनिया में ला पाएगी—और क्या लोग इसे रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI के साथ अपनाएंगे?
