जेल में 6935 दिन, आजादी के 310 दिन भी पूरे नहीं; हरिद्वार में निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली की मौत
निठारी कांड से जुड़े मामलों में करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। शुक्रवार को भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय के खोखे के भीतर उसका शव फंदे से लटका मिला।

Audio tools for this article
करीब 19 साल जेल की चारदीवारी में रहने के बाद जिस सुरेंद्र कोली ने नवंबर 2025 में खुली हवा में कदम रखा था, उसकी आजाद जिंदगी 310 दिन भी पूरी नहीं हो सकी। शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय के खोखे के भीतर उसका शव फंदे से लटका मिला।
कोली का नाम 2005-06 के निठारी कांड से जुड़ा था। लंबे समय तक चले मुकदमों में उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा तक सुनाई गई। लेकिन बाद में अदालतों में अभियोजन के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठे और एक-एक कर उसे राहत मिलती गई। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ लंबित आखिरी मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर दी थी।
अब उसकी मौत ने करीब दो दशक पुराने निठारी कांड की कहानी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
भूपतवाला में चाय के खोखे के अंदर मिला शव
शुक्रवार सुबह भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय के खोखे के अंदर एक व्यक्ति फंदे से लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में बताई गई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से इलाके की एक झुग्गी में रह रहा था और पास में ही चाय का खोखा चलाकर गुजर-बसर कर रहा था। पुलिस ने उसके अल्मोड़ा निवासी परिजनों को सूचना दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी में मौत को आत्महत्या बताया जा रहा है, लेकिन इसके कारणों को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
19 साल जेल के बाद मिली थी आजादी
सुरेंद्र कोली निठारी कांड से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा पाने वाला प्रमुख आरोपी रहा था। हालांकि, बाद के वर्षों में उसके खिलाफ मामलों की कानूनी स्थिति लगातार बदलती गई।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा। हालांकि, एक मामला तब भी लंबित था, जिसमें उसकी दोषसिद्धि बनी हुई थी।
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसी आखिरी मामले में भी उसकी दोषसिद्धि को रद्द करते हुए क्यूरेटिव याचिका मंजूर कर ली। इसके बाद उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ।
12 नवंबर 2025 से 18 सितंबर 2026 तक कुल 310 दिन होते हैं। यानी करीब 19 साल की कैद के बाद मिली आजादी 310 दिनों के भीतर ही खत्म हो गई।
निठारी कांड में मिला था मानव अवशेषों का सुराग
निठारी मामले ने दिसंबर 2006 में पूरे देश का ध्यान खींचा था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित D-5 मकान के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद जांच ने गंभीर रूप लिया।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, निठारी इलाके में बच्चों और महिलाओं के लापता होने की शिकायतें पहले से सामने आ रही थीं। 29 दिसंबर 2006 को सुरेंद्र कोली को एक गुमशुदगी से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया और उसी दिन D-5 के आसपास खुदाई शुरू हुई।
यही घटनाक्रम आगे चलकर देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया।
कभी मौत की सजा, फिर अदालत में बदलती कहानी
कोली के खिलाफ मामलों में शुरुआत में अभियोजन की कहानी और अदालतों के फैसलों का रुख बेहद कठोर रहा। एक समय उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी।
लेकिन बाद की न्यायिक कार्यवाही में साक्ष्यों की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पर सवाल उठे। 2025 में आखिरी मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर संदेह को प्रमाण का विकल्प नहीं बनाया जा सकता और विश्वसनीय, स्वीकार्य साक्ष्य के बिना दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती।
इस फैसले के बाद कोली निठारी से जुड़े सभी मामलों में दोषमुक्त होकर जेल से बाहर आया था।
जेल से बाहर नई जिंदगी, फिर हरिद्वार में मौत
रिहाई के बाद कोली ने हरिद्वार में रहना शुरू किया था। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार वह चाय का खोखा चलाकर अपना जीवन गुजार रहा था। लेकिन बाहर आने के करीब दस महीने बाद उसकी मौत की खबर सामने आई।
अब पुलिस के सामने मौत की परिस्थितियों और उसके पीछे की वजहों की जांच का सवाल है। पोस्टमार्टम और आगे की जांच से मौत से जुड़े बाकी तथ्य स्पष्ट होंगे।
निठारी कांड की कानूनी कहानी अदालतों के फैसलों के साथ भले ही एक अलग निष्कर्ष तक पहुंच चुकी थी, लेकिन कोली की अचानक मौत ने उस पूरे घटनाक्रम की याद फिर ताजा कर दी है।
