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‘द फॉलिंग मैन’ की वो तस्वीर, जिसे दुनिया भूल नहीं पाई; 9/11 के उस एक पल में छिपी थी हजारों जिंदगियां
‘The Falling Man’ 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक है।लोकस्वामी ग्राफिक्स
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‘द फॉलिंग मैन’ की वो तस्वीर, जिसे दुनिया भूल नहीं पाई; 9/11 के उस एक पल में छिपी थी हजारों जिंदगियां

Digital News Desk6 min read11/09/26

11 सितंबर 2001 की त्रासदी को दर्ज करने वाली ‘The Falling Man’ दुनिया की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गई। तस्वीर में दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान आज भी निश्चित नहीं है, लेकिन उस एक फ्रेम ने 9/11 की मानवीय पीड़ा को हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

Lokswami AI

11 सितंबर 2001 की सुबह न्यूयॉर्क की सड़कों पर रोज की तरह जिंदगी चल रही थी। लोग दफ्तरों की ओर जा रहे थे, काम शुरू हो चुका था और किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में पूरी दुनिया एक ऐसी घटना की गवाह बनने वाली है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देगा।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की इमारतों से उठता धुआं, सड़कों पर भागते लोग और आसमान की तरफ टिकी हजारों निगाहें उस दिन की पहचान बन गईं। लेकिन इसी भयावह दृश्य के बीच कैमरे में एक ऐसा पल कैद हुआ, जिसने पूरी त्रासदी को एक अलग अर्थ दे दिया।

एक आदमी हवा में नीचे की ओर गिर रहा था।

उसका चेहरा नजर नहीं आता। कपड़ों और शरीर की स्थिति से भी उसकी पहचान तय नहीं हो सकी। तस्वीर में सिर्फ एक इंसान है और उसके पीछे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की सीधी इमारती रेखाएं।

बाद में यही तस्वीर ‘The Falling Man’ के नाम से दुनिया भर में पहचानी गई।

कैमरे में कैद हुआ जिंदगी का आखिरी पल

इस तस्वीर को एसोसिएटेड प्रेस के फोटोग्राफर रिचर्ड ड्रू ने खींचा था। उस सुबह वह न्यूयॉर्क फैशन वीक को कवर करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की खबर मिलते ही उनका असाइनमेंट बदल गया।

ड्रू लोअर मैनहट्टन पहुंचे। वहां धुआं, मलबा और अफरा-तफरी थी। लोग इमारतों की तरफ देख रहे थे और बचने की कोशिश कर रहे थे।

इसी दौरान उनकी नजर टावरों की ऊंचाई पर गई। वहां से कई लोग नीचे गिर रहे थे। ड्रू ने लगातार तस्वीरें खींचीं और उन्हीं फ्रेम्स में एक तस्वीर ऐसी थी, जिसमें एक व्यक्ति लगभग सीधी मुद्रा में नीचे जाता दिखाई देता है।

तस्वीर देखने में बेहद संतुलित लगती है, लेकिन उसके पीछे की सच्चाई बेहद दर्दनाक थी। वह किसी दृश्य को सजाकर बनाई गई तस्वीर नहीं थी। वह एक इंसान के जीवन के आखिरी क्षण का दस्तावेज थी।

वह आदमी कौन था?

‘The Falling Man’ के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था—तस्वीर में दिखाई दे रहा व्यक्ति आखिर कौन था?

वर्षों में कई लोगों ने अलग-अलग संभावनाएं सामने रखीं। कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि वह वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ‘Windows on the World’ रेस्तरां में काम करने वाला व्यक्ति हो सकता है।

लेकिन इनमें से किसी पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

यही अनिश्चितता तस्वीर को और असहज बना देती है। उसके साथ कोई नाम नहीं जुड़ा, कोई निश्चित पहचान नहीं मिली। इसलिए वह सिर्फ एक व्यक्ति की तस्वीर नहीं रह गई, बल्कि उस दिन जान गंवाने वाले उन तमाम लोगों का प्रतीक बन गई, जिनकी व्यक्तिगत कहानियां दुनिया तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकीं।

तस्वीर छापने पर भी उठे थे सवाल

9/11 के अगले दिन कुछ अखबारों ने इस तस्वीर को प्रकाशित किया। लेकिन इसे लेकर तीखी बहस भी हुई।

सवाल था कि क्या किसी व्यक्ति के जीवन के आखिरी क्षण को इस तरह प्रकाशित करना पत्रकारिता का हिस्सा है? या फिर यह परिवार और मृतक की निजी त्रासदी को सार्वजनिक करना है?

तस्वीर के आलोचकों की अपनी वजहें थीं। दूसरी तरफ, पत्रकारिता के नजरिए से इसे उस दिन की वास्तविकता का रिकॉर्ड माना गया।

समय बीतने के साथ तस्वीर का अर्थ भी बदलता गया। यह सिर्फ मौत का दृश्य नहीं रही। यह उस भयावह सुबह में फंसे इंसानों की स्थिति को समझने का एक प्रतीक बन गई।

9/11 में क्या हुआ था?

11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार विमानों का अपहरण किया था।

दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराए। दोनों इमारतें बाद में ढह गईं। तीसरा विमान वॉशिंगटन के पास पेंटागन से टकराया।

चौथा विमान यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 था। उसके यात्रियों और क्रू को दूसरे हमलों की जानकारी मिल चुकी थी। उन्होंने विमान के कॉकपिट पर कब्जा करने की कोशिश की। विमान अंततः पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास एक खेत में गिर गया।

हमलों में कुल 2,977 लोगों की मौत हुई। इनमें आम नागरिकों के साथ पुलिस अधिकारी, फायरफाइटर, पैरामेडिक्स और विमान के क्रू सदस्य भी शामिल थे।

Flight 93 में फोन कॉल्स ने बदल दी कहानी

9/11 की सबसे मार्मिक घटनाओं में फ्लाइट 93 भी शामिल है।

विमान के यात्रियों को जब दूसरे हमलों की जानकारी मिली तो उन्हें समझ आया कि उनका विमान भी किसी बड़े हमले का हिस्सा हो सकता है। इसके बाद कई यात्रियों ने अपने परिवार और परिचितों को फोन किए।

नेशनल पार्क सर्विस के रिकॉर्ड के अनुसार, सुबह 9:28 से 10:03 के बीच विमान से 37 फोन कॉल किए गए।

किसी ने अपने परिवार को बताया कि विमान हाईजैक हो चुका है। किसी ने अपने करीबियों से प्यार का इजहार किया। कुछ यात्रियों ने बाहर मौजूद लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाई।

इन कॉल्स में डर भी था और यह एहसास भी कि शायद उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है।

आखिरी बातचीत के बाद लिया गया बड़ा फैसला

लॉरेन ग्रैंडकोलास, लिंडा ग्रोनलुंड और फ्लाइट अटेंडेंट सीसी लाइल्स उन लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने अपने करीबियों के लिए संदेश छोड़े।

टॉड बीमर ने भी फोन के जरिए बाहर संपर्क करने की कोशिश की। बाद में विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू ने कॉकपिट की ओर बढ़ने का फैसला किया।

नेशनल पार्क सर्विस के अनुसार, करीब 9:57 बजे यात्रियों और क्रू ने कॉकपिट पर धावा बोलने की कोशिश शुरू की।

कुछ मिनट बाद फ्लाइट 93 शैंक्सविल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

उस विमान ने अपने संभावित लक्ष्य तक पहुंचने के बजाय जमीन पर गिरना चुना—और यह फैसला यात्रियों के प्रतिरोध से जुड़ी 9/11 की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में दर्ज हो गया।

दूसरी तरफ सैकड़ों लोग सीढ़ियों से बाहर निकल रहे थे

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के भीतर उस समय हजारों लोग फंसे थे। लेकिन कुछ लोगों को बाहर निकलने का रास्ता मिल गया।

‘Survivors’ Stairs’ के नाम से पहचानी जाने वाली सीढ़ियों ने कई लोगों को परिसर से बाहर निकलने में मदद की। लोग धुएं और मलबे के बीच नीचे उतर रहे थे।

कोई अकेला भाग रहा था तो कोई घायल व्यक्ति को सहारा दे रहा था। किसी को नहीं पता था कि इमारत में अगले कुछ मिनटों में क्या होने वाला है।

आज वही सीढ़ियां उस दिन बच निकलने वाले लोगों की कहानी का हिस्सा हैं।

अस्पताल तैयार थे, लेकिन मरीजों की भीड़ नहीं पहुंची

हमले के बाद न्यूयॉर्क के अस्पतालों ने बड़ी संख्या में घायलों के आने की तैयारी कर ली थी।

डॉक्टर और नर्सें तैयार थीं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर लगाए गए थे। अस्पतालों को उम्मीद थी कि जल्द ही बड़ी संख्या में घायल लोग वहां पहुंचेंगे।

लेकिन वह भीड़ नहीं आई।

घंटों के इंतजार के बाद अस्पतालों में एक ऐसी खामोशी थी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। जितने लोगों के पहुंचने की उम्मीद थी, उनमें से बड़ी संख्या अस्पताल तक पहुंच ही नहीं सकी।

इस त्रासदी की भयावहता सिर्फ मलबे और धुएं में नहीं थी। कभी-कभी खाली पड़े स्ट्रेचर भी बता रहे थे कि नुकसान कितना बड़ा था।

25 साल बाद भी तस्वीर का सवाल बाकी

9/11 को अब 25 साल हो चुके हैं। न्यूयॉर्क बदल गया। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जगह नया परिसर खड़ा है। वहां स्मारक है, जहां हमले में मारे गए लोगों के नाम दर्ज हैं।

लेकिन ‘The Falling Man’ की पहचान अब भी निश्चित नहीं है।

शायद यही वजह है कि यह तस्वीर आज भी लोगों को रोककर सोचने पर मजबूर करती है। उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन था, यह दुनिया नहीं जानती। लेकिन वह किसी का बेटा था, किसी का पिता, किसी का पति, किसी का भाई या किसी का दोस्त—यह बात लगभग निश्चित है।

और इसी वजह से वह एक अनजान आदमी की तस्वीर होते हुए भी 9/11 की सबसे पहचानी जाने वाली तस्वीरों में शामिल हो गई।

इतिहास में कुछ तस्वीरें जीत की याद बनती हैं, कुछ सत्ता और युद्ध की। लेकिन ‘The Falling Man’ किसी जीत या हार की तस्वीर नहीं है।

यह उस एक पल की तस्वीर है, जब एक इंसान की पहचान दुनिया से छूट गई—लेकिन उसकी कहानी एक तस्वीर में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।

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