
कैलगरी पुलिस ने जारी कीं 15 भारतीय युवकों की तस्वीरें, जबरन वसूली और फायरिंग के आरोपों में चार्जशीट
कनाडा के कैलगरी शहर में दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही जबरन वसूली की घटनाओं में पुलिस ने 15 भारतीय मूल के आरोपियों की तस्वीरें सार्वजनिक कर दी हैं। पुलिस के मुताबिक अप्रैल 2025 से अब तक 49 वसूली से जुड़ी घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें 19 फायरिंग की वारदातें शामिल हैं।

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कनाडा की कैलगरी पुलिस सेवा ने शहर के दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाकर हुई हिंसक जबरन वसूली की घटनाओं के सिलसिले में आरोपी 15 लोगों की तस्वीरें जारी की हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों, उनके सहयोगियों और मामले से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में कुल 16 लोगों पर 56 आरोप तय किए गए हैं। इनमें से सिर्फ एक आरोपी पुलिस हिरासत में है, जबकि बाकी सभी को जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आरोपी कनाडाई नागरिक नहीं है।
ज्यादातर आरोपी पंजाबी मूल के, स्टूडेंट या वर्क वीज़ा पर कनाडा में मौजूद
पुलिस ब्रीफिंग और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादातर आरोपी भारत के पंजाबी मूल के हैं और स्टूडेंट या वर्क वीज़ा पर कनाडा में रह रहे थे। जांच अभी जारी है और पुलिस लगातार जनता से जानकारी मांग रही है।
49 वसूली की घटनाएं, 19 में हुई फायरिंग
कैलगरी पुलिस के मुताबिक अप्रैल 2025 से अब तक जबरन वसूली से जुड़ी 49 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 19 मामलों में फायरिंग हुई। इनमें से 18 फायरिंग की घटनाएं पीड़ितों या उनकी संपत्ति पर सीधे निशाना बनाकर की गईं, जबकि एक मामले में आरोपी आपस में ही भिड़ गए और एक-दूसरे पर गोलियां चलाईं।
पुलिस के मुताबिक यह पैटर्न सिर्फ कैलगरी तक सीमित नहीं है। ब्रिटिश कोलंबिया और ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में भी दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाकर इसी तरह के अपराध नेटवर्क सक्रिय होने का दावा किया गया है, जिसमें कथित तौर पर पैसों की मांग को लेकर घरों और वाहनों पर फायरिंग की घटनाएं शामिल हैं।
इस पर काबू पाने के लिए पुलिस ने दो अलग ऑपरेशन शुरू कर रखे हैं — जांच पर केंद्रित "ऑपरेशन ओरियन" और बढ़ी हुई पुलिस मौजूदगी व सामुदायिक संपर्क पर आधारित "ऑपरेशन आउटेज"।
पुलिस अधिकारी का दावा — हिंसा में आई कमी
क्रिमिनल ऑपरेशंस एंड इंटेलिजेंस डिवीजन के सुपरिंटेंडेंट जेफ बेल के मुताबिक इन दोनों ऑपरेशनों से हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। बेल का दावा है कि 2026 के पहले 60 दिनों में वसूली से जुड़ी 9 फायरिंग की घटनाएं हुईं, जबकि उसके बाद के करीब 100 दिनों में यह संख्या घटकर सिर्फ 2 रह गई।
फरार आरोपी की तलाश, अलियास के पीछे छिपे नाम
पुलिस अब आरोपियों और उनके सहयोगियों के बारे में और जानकारी जुटा रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि वे कहां समय बिताते हैं और क्या वे कहीं काम कर रहे हैं। पुलिस ने जनता से जरमनजीत सिंह का पता लगाने में मदद मांगी है, जिसके खिलाफ वारंट जारी है।
बेल के मुताबिक कई आरोपी समुदाय में असली नाम की बजाय उपनाम (अलियास) से जाने जाते थे। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि एक आरोपी का असली नाम उसके रूममेट को तब तक नहीं पता था, जब तक पुलिस ने खुद उसे यह जानकारी नहीं दी। बेल ने ज्यादातर आरोपियों के दोबारा समुदाय में लौट आने को "चिंताजनक" बताया, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि जमानत का फैसला अदालतें अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद ही लेती हैं।
समुदाय ने जताई राहत
तस्वीरें जारी होने पर कैलगरी के दक्षिण एशियाई समुदाय ने राहत जताई है। साउथ एशियन रेडियो स्टेशन रेड एफएम के न्यूज़ डायरेक्टर ऋषि नागर ने इसे "राहत भरा" कदम बताया। उनके मुताबिक समुदाय लंबे समय से तस्वीरें जारी करने की मांग कर रहा था, क्योंकि लोगों के पास यह जानने का कोई जरिया नहीं था कि उनके आसपास मौजूद कोई व्यक्ति कहीं आरोपियों में शामिल तो नहीं है।
पुलिस ने अपील की है कि इस मामले से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए लोग कैलगरी पुलिस से संपर्क करें या क्राइम स्टॉपर्स के जरिए गुमनाम रूप से सूचना दे सकते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि मामला अभी भी सक्रिय है और आगे और आरोपियों की गिरफ्तारी संभव है।