कुरकुरे-स्नैक्स से लेकर पैकेटबंद खाने तक, बच्चों की सेहत पर SC सख्त; FOPL पर जल्द आएगा बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर सामने चेतावनी लेबल लगाने के मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए गंभीर चिंता जताई। अदालत जल्द ही इस मामले में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

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पैकेट खोलने से पहले उसमें मौजूद नमक, चीनी और वसा की मात्रा कितनी आसानी से समझ में आती है? इसी सवाल से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत ने ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग यानी FOPL को लेकर चिंता जताई है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को कहा कि इस विषय पर सबसे बड़ी चिंता लोगों का स्वास्थ्य और विशेष रूप से बढ़ते बच्चों की सेहत है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए देखने को कहा है।
जल्द आएगा सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश
यह सुनवाई सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट ‘3S और आवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि मामले से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर जानकारी लेने के बाद विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि आदेश एक-दो दिन में अपलोड किया जा सकता है और सभी पक्षों को उसे ध्यान से पढ़ने के लिए कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
सिर्फ पीछे लिखी जानकारी काफी है या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI से पोषण संबंधी जानकारी को लेकर सवाल किया।
अदालत ने कहा कि पैक किए गए खाद्य पदार्थों पर पोषण संबंधी विवरण आम तौर पर पैकेट के पीछे दिया जाता है। लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किसी पोषक तत्व की मात्रा एक तय सीमा से ऊपर पहुंचने पर उसे हाई शुगर, हाई साल्ट या हाई फैट मानने के लिए क्या दिशानिर्देश मौजूद हैं।
यानी अदालत का फोकस सिर्फ जानकारी उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि उसे उपभोक्ता के लिए आसानी से समझ आने लायक बनाने पर भी है।
FSSAI ने बताई मौजूदा व्यवस्था
FSSAI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैकेट की पिछली तरफ पोषण से संबंधित जानकारी देने की व्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि पोषक तत्वों की मात्रा 100 ग्राम और प्रति सर्विंग के आधार पर बताई जाती है। सुनवाई के दौरान इसी व्यवस्था और प्रस्तावित फ्रंट लेबलिंग के बीच अंतर पर भी चर्चा हुई।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लेकर उठा सवाल
मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने खाद्य पदार्थों की अलग-अलग श्रेणियों को एक समान तरीके से देखने पर सवाल उठाया।
उनकी ओर से तर्क दिया गया कि कुरकुरे जैसे स्नैक प्रोडक्ट को अंडे या नमकीन काजू जैसे खाद्य पदार्थों के समान श्रेणी में रखना उचित नहीं माना जा सकता। सुनवाई में अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लिए ज्यादा स्पष्ट चेतावनी की जरूरत का मुद्दा भी उठाया गया।
चेतावनी लेबल के रंग पर भी बहस
सुनवाई के दौरान FOPL के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंग पर भी चर्चा हुई। तर्क दिया गया कि भारत में लाल और हरे रंग का इस्तेमाल क्रमशः मांसाहारी और शाकाहारी खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए किया जाता है।
ऐसे में अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लिए चेतावनी संकेत में लाल रंग के बजाय किसी अन्य रंग के इस्तेमाल का सुझाव सामने आया।
FSSAI ने लाल रंग के लेबल का प्रस्ताव दिया था
इससे पहले FSSAI सुप्रीम कोर्ट को बता चुका है कि उसने ऐसे खाद्य उत्पादों के लिए लाल रंग का फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल प्रस्तावित किया है, जिनमें अतिरिक्त संतृप्त वसा, चीनी और नमक की मात्रा अधिक है।
नियामक के अनुपालन शपथपत्र के मुताबिक, प्रस्ताव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों के बारे में साफ और आसानी से समझ आने वाली चेतावनी देना है, जिनमें चिंता वाले पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी और चेतावनी लेबल को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है।
