तबादले की फाइल आगे बढ़ाने के बदले मांगी मोटी रकम! रेलवे के 2 अफसरों पर CBI का केस, जांच शुरू
प्रयागराज मंडल में स्पाउस ग्राउंड पर तबादले के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई ने सहायक कार्मिक अधिकारी और कार्यालय अधीक्षक के खिलाफ FIR दर्ज की है। गोपनीय जांच में अनुचित लाभ की मांग की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की गई।

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रेलवे में पति-पत्नी को एक ही जगह तैनाती दिलाने के नियम का इस्तेमाल अब घूसखोरी के आरोप में जांच का आधार बन गया है। प्रयागराज मंडल में तबादले से जुड़े एक मामले में सीबीआई ने दो रेल अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि पत्नी का कानपुर से प्रयागराज स्थायी तबादला कराने के लिए रकम मांगी गई थी।
मामले में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में तैनात सहायक कार्मिक अधिकारी अरविंद कुमार और कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मनी त्रिपाठी आरोपी बनाए गए हैं। सीबीआई की लखनऊ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जांच आगे बढ़ाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।
तबादले की अर्जी लेकर DRM ऑफिस पहुंचे थे दंपती
मामला प्रयागराज लाबी में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट आशीष केसरवानी से जुड़ा है। उनकी पत्नी सिम्मी केसरवानी भी रेलवे में सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट हैं और कानपुर की जीएमसी लाबी में पदस्थ हैं। फिलहाल वह ऑन-लोन व्यवस्था के तहत प्रयागराज में सेवाएं दे रही थीं।
दंपती ने स्पाउस ग्राउंड के तहत सिम्मी का कानपुर से प्रयागराज स्थायी तबादला कराने के लिए आवेदन किया था। इसी आवेदन की स्थिति जानने दोनों मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पहुंचे थे।
अधिकारी ने दूसरे अफसर से मिलने को कहा
आरोप के मुताबिक, सहायक कार्मिक अधिकारी अरविंद कुमार ने आशीष को कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मनी त्रिपाठी से संपर्क करने को कहा। इसके बाद तबादले की प्रक्रिया को लेकर हुई बातचीत में कथित तौर पर रिश्वत की मांग सामने आई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि काम कराने के एवज में पहले 70 हजार रुपये मांगे गए थे।
रिश्वत देने के बजाय CBI को दी शिकायत
आशीष केसरवानी ने कथित मांग को स्वीकार करने के बजाय 8 सितंबर को सीबीआई की लखनऊ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी।
इसके बाद एजेंसी ने शिकायत की सच्चाई परखने के लिए गोपनीय जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों की ओर से 50 हजार रुपये के अनुचित लाभ की मांग किए जाने की पुष्टि होने की बात सीबीआई ने दर्ज की है।
BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में केस
प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद सीबीआई ने 10 सितंबर को दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 लगाई गई है।
अब जांच अधिकारी सीबीआई निरीक्षक देवेश कुमार को बनाया गया है। एजेंसी शिकायत, बातचीत और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
अब जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
मामला केवल कथित रिश्वत मांगने तक सीमित है या इसके पीछे तबादलों से जुड़ी कोई बड़ी व्यवस्था काम कर रही थी, यह जांच के आगे बढ़ने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
