सुप्रीम कोर्ट ने राहत रोकी, तुरंत बाद CID का एक्शन; अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय हिरासत में
साल्बोनी की सरकारी जमीन से जुड़े मामले में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की है। शीर्ष अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद उन्हें कोलकाता स्थित आवास से हिरासत में लिया गया।

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पश्चिम बंगाल में सरकारी जमीन से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को राज्य CID ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुई।
जांच एजेंसी साल्बोनी में सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, CID की टीम ने सुमित रॉय को कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से हिरासत में लिया।
अदालत के फैसले के बाद बदला घटनाक्रम
सुमित रॉय को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 6 अगस्त को अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।
गुरुवार को शीर्ष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही पहले दी गई गिरफ्तारी से सुरक्षा भी समाप्त हो गई।
इसके बाद CID ने बिना देर किए कार्रवाई की और सुमित रॉय को हिरासत में ले लिया।
जांच एजेंसी पहले भी भेज चुकी थी समन
साल्बोनी जमीन मामले की जांच के दौरान CID सुमित रॉय से पूछताछ करना चाहती थी। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी की ओर से उन्हें पहले भी कई बार पूछताछ के लिए समन भेजे गए थे।
मामला सरकारी जमीन की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़ा होने के कारण जांच एजेंसी अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
साल्बोनी जमीन मामले में क्या है आरोप?
CID जिस मामले की जांच कर रही है, उसमें साल्बोनी इलाके की सरकारी जमीन की कथित तौर पर अवैध खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। इसी जांच के सिलसिले में सुमित रॉय का नाम सामने आया और उनसे पूछताछ के लिए एजेंसी ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बढ़ी मुश्किल
अग्रिम जमानत का उद्देश्य गिरफ्तारी की स्थिति में पहले से कानूनी सुरक्षा हासिल करना होता है। सुमित रॉय को पहले गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद वह राहत खत्म हो गई।
इसी के बाद राज्य की जांच एजेंसी ने आगे की कार्रवाई की है। अब मामले की जांच किस दिशा में जाती है और पूछताछ में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।
