
सुप्रीम कोर्ट को राजनीति का मंच न बनाएं, वकीलों की राह न रुके: CJI सूर्यकांत
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसर तक आवाजाही बाधित न करने की हिदायत दी। वकीलों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई होगी।

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सुप्रीम कोर्ट को राजनीति का मंच न बनाएं, वकीलों की राह न रुके: CJI सूर्यकांत
नई दिल्ली। लोकतांत्रिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन उसकी वजह से न्याय की चौखट तक पहुंचने का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और वकीलों की हिरासत से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक विवादों से दूर रखने की स्पष्ट हिदायत दी।
CJI ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे अदालत के कामकाज और वकीलों, कोर्ट स्टाफ तथा मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विरोध का अधिकार बरकरार, अदालत के काम में बाधा नहीं
सोमवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आत्माराम नाडकर्णी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष प्रदीप राय ने वकीलों की हिरासत और आवाजाही में आ रही परेशानियों का मुद्दा उठाया।
इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक गतिविधियां और शांतिपूर्ण प्रदर्शन निर्धारित सीमाओं में होने चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपनी बात शांतिपूर्वक रखने की अपील करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस विवाद में नहीं घसीटा जाना चाहिए।
अदालत की चिंता केवल न्यायिक कामकाज तक सीमित नहीं है। वकीलों, कर्मचारियों और अपने मामलों की सुनवाई के लिए आने वाले नागरिकों को भी बिना रुकावट अदालत तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।
SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने भी राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से जिम्मेदारी बरतने की अपील की। उनका जोर इस बात पर रहा कि राजनीतिक विवादों का असर न्यायिक व्यवस्था पर नहीं पड़ना चाहिए।
वकीलों के साथ पुलिस के बर्ताव पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ वकीलों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें सड़क पर घसीटा गया।
उन्होंने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा संदेश देने की मांग की। वकीलों की हिरासत और उनके साथ हुए कथित व्यवहार का मुद्दा अब सुनवाई के केंद्र में है।
CJI सूर्यकांत ने इस चरण में पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत टिप्पणी करने के बजाय संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई करने की बात कही। ऐसे में अगली सुनवाई में पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और आवाजाही से जुड़े सवालों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाओं पर भी नजर
प्रदर्शनों के कारण आम जनजीवन प्रभावित होने की आशंका के बीच सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ पहले ही मामले में स्वतः संज्ञान ले चुकी है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी नागरिक या वकील को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए।
आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो और ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रखने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदमों के अलावा इंटरनेट सेवाओं को बिना वजह बाधित नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को नोटिस जारी कर मंगलवार तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
मंगलवार की सुनवाई पर टिकी निगाहें
वकीलों की हिरासत, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन में व्यवधान से जुड़े मुद्दे अब एक साथ अदालत के सामने होंगे। अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों की रिपोर्ट और दलीलों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रशासन ने आवाजाही तथा सामान्य सेवाएं बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
इस पूरे मामले में अदालत का संदेश साफ है—लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और न्यायिक व्यवस्था के निर्बाध संचालन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

